रायपुर - टैगोर नगर स्थित श्री पार्श्व पद्मावती सच्चियाय मंदिर इन दिनों धार्मिक उल्लास और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। यहां 6 दिसम्बर से प्रारंभ हो रहे पंचान्हिका महोत्सव के अवसर पर अलौकिक पार्श्वनाथ परमात्मा की प्रतिमा की अंजनशलाका प्रतिष्ठा संपन्न होगी।
यह मंदिर केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में संप्रदाय एकता की अनूठी मिसाल प्रस्तुत कर रहा है। यहां दिगंबर, श्वेतांबर, स्थानकवासी आदि सभी जैन संप्रदायों के आचार्य, साधु–साध्वी भगवंतों का निरंतर आगमन होता रहा है और मंदिर ने सदैव सर्वसमभाव का संदेश दिया है। पिछले 15 वर्षों से श्री महेंद्र जी गदिया परिवार द्वारा पार्श्वनाथ परमात्मा, पद्मावती माता एवं सच्चियाय माता की अखंड सेवा, पूजा एवं भक्ति का क्रम निरंतर जारी है। समाज में एकता और समरसता का यह उदाहरण देखकर प. पू. उपाध्याय प्रवर अध्यात्मयोगी श्री महेंद्रसागर जी म. सा. एवं युवामनीषी श्री मनीषसागर जी म. सा. की पावन निश्रा में उनके सुशिष्य श्री विनम्रसागर जी म. सा. ने इस घर देरासर को “अलौकिक” नाम प्रदान करने की प्रेरणा दी।
मंदिर विकास एवं प्रतिष्ठा कार्यक्रम
श्री महेंद्र जी गदिया परिवार के उदार सहयोग और श्री अलौकिक पार्श्व पद्मावती ट्रस्ट मंडल की भावना से इस छोटे से घर देरासर को सुंदर, भव्य और अलौकिक स्वरूप देने की परिकल्पना साकार हो रही है। 6 नवंबर से आरंभ हो रहे पंचान्हिका महोत्सव में प. पू. उपाध्याय प्रवर आदि ठाणा की पावन निश्रा एवं खाचरोद के सुप्रसिद्ध विधिकारक श्री पंकज जी चोपड़ा के निर्देशन में अंजनशलाका प्रतिष्ठा के समस्त विधान संपन्न होंगे। इसमें परमात्मा के पाँच कल्याणक, विविध पूजन एवं रात्रि भक्ति के आयोजन होंगे। 9 नवंबर को विवेकानंद नगर जैन मंदिर से भव्य वरघोड़ा निकलेगा, जो नव–निर्मित घर देरासर तक पहुंचेगा।
10 नवंबर की मध्यरात्रि में पार्श्वनाथ परमात्मा, गौतम स्वामी एवं दादा गुरुदेव की प्रतिमाओं का अंजनविधान संपन्न होगा। प्रातः शुभ मुहूर्त में प्रतिष्ठा समारोह में नगर के साधु–साध्वी भगवंतों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।