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बिलासपूर्णश्री जैन श्वेतांबर समाज का नेहरू नगर में महावीर जन्म वाचन महोत्सव में 14 स्वप्नों की बोली एवं 108 दीए से महा आरती।

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पर्युषण पर्व का आज पांचवा दिन।

बिलासपुर -!श्री जैन श्वेतांबर श्री संघ समाज के द्वारा परम पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व 2026 का शनिवार को बड़ी संख्या में समाज के लोग सुबह भगवान महावीर जन्म वाचन को बड़े ही धूमधाम से मनाया। विशेष शांति कलश की पूजा, सामायिक, कल्प सूत्र, भक्ति हुए। शाम को प्रतिक्रमण एवं रात्रि में 108 दिए से महा आरती एवं भक्ति की गई । 


          पर्युषण महापर्व के शनिवार को नेहरू नगर में भगवान महावीर का जन्म वाचन दिवस मनाया गया । सुबह एवं रात्रि में विशेष पूजा की के साथ 14 स्वप्नों की बोली लगाई गई। पूजन वेशभूषा धारण कर स्तवन कुलनायक पूजा, शांति कलश पूजा, मंगल दीपक सहित कई धार्मिक आयोजन संपन्न हुवे। समाज की श्रीमती ज्योति चोपड़ा एवं श्रीमती शोभा मेहता द्वारा कल्प सूत्र का वाचन किया गया। उसके पश्चात रात्रि में जैन समाज के श्रावक एवं श्राविकाओं ने एक से बढ़कर एक भक्ति गीत प्रस्तुत कर पूरे माहौल को भक्ति मय बना दिया। कार्यक्रम का संचालन सुभाष श्रीश्रीमाल ने किया। मंगलाचरण महिला मंडल ने किया। 

          इस अवसर पर विमल चोपड़ा, सुभाष श्रीश्रीमाल, संजय कोठारी, नरेंद्र मेहता, इंदरचंद बैद, कविता मुनोत, ज्योति कोचर, संगीता भयानी, ज्योति भयानी, संजय जैन, अमरेश जैन, रूपेश गोलछा, निशी चोपड़ा, अंजलि मेहता, भव्या, राशि, वंशिका, इच्छा, मौली, नक्श, महावीर, पंखुड़ी, दर्श, जिगर, प्रखर, सहित समाज के लोग उपस्थित थे।

महावीर जन्म वाचन महोत्सव मे लगी 14 स्वप्नों की बोली।

पर्युषण महापर्व के पांचवे दिन चोपड़ा भवन तारबाहर में भगवान महावीर स्वामी के जन्म वाचन दिवस उत्सव मनाया गया। 14 स्वप्नों की बोली लगाई गई। बोली रवीन्द्र सुषमा जंदानी, श्वेत हस्ती की बोली पतासी बाई सुभाष श्रीश्रीमाल, श्री केसरी सिंह की बोली विमल वैभव विवेक चोपड़ा परिवार, श्री लक्ष्मी जी की बोली श्रीमति प्रमिला देवी अविनाश शुभम चोपड़ा परिवार, श्री पुष्पमाला अमित छाजेड़ परिवार, श्री चंद्र मंडल बोली संजय ललिता कोठारी, श्री सूर्यमंडल एवं श्री पदम सरोवर डॉ उषा सेंडे, श्री महाध्वज श्रीमति कचरीबाई प्रवीण रूपेश गोलछा परिवार, श्री स्वर्ण कलश, श्री क्षीरसागर इन्दर चंद शितेश बैद, श्री देव विमान शशि रमेश भयानी परिवार, श्री रत्नों की राशि त्रिलोक चंद झाबक एवं परिवार, निर्धून अग्नि हीरचंद संजय संजीव चोपड़ा एवं परिवार, नितीन सिंघई परिवार ने लिया। 


स्थानकवासी - टिकरापारा

पर्युषण महापर्व का यह पांचवा दिवस है। इस दिन भगवान महावीर का जन्म कल्याणक मनाया जाता है इसीलिए इस दिन तीनों बहनों ने भगवान महावीर के जीवन चरित्र को बहुत ही सरल शब्दों में समझाया है। भगवान महावीर ने 12:30 वर्षों तक बिना कुछ खाए उपवास तप किया। भगवान महावीर ने 172 दिवस तक चोवियार तप भी किया इस तक में न हीं कोई अन्न खाया जाता है और न हीं पानी की एक बूंद भी पिया जाता है जैन धर्म में यह तप बहुत ही कठिन माना जाता है। भगवान महावीर के दीक्षा उपरांत जब वह भोजन के लिए भीक्षा मांगने के लिए जाते थे तब उनको भिक्षा भी बहुत कम जगह से मिलती थी। कोई बासी खाना दे देता था तो कोई भिक्षा में मांसाहारी भोजन दे देता था इससे भगवान महावीर स्वामी उसे दिन का भोजन नहीं कर सकते थे क्योंकि भगवान महावीर स्वामी में जब से दीक्षा ली है कब से वहां एक ही समय भोजन करते थे और जब-जब इन्हें अभक्ष भोजन मिलता था तब तक वह उसे दिन भोजन नहीं करते थे।

जैन श्वेतांबर तेरापंथ, वैशाली नगर

आज अणुव्रत दिवस पर उपासिका श्रीमति भाग्यश्री सूर्या एवं श्रीमती लक्ष्मी मेहता द्वारा समता, अणुव्रत आंदोलन के माध्यम से संयम, अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह एवं नैतिक जीवन के छोटे-छोटे संकल्पों को अपनाने का दिया गया संदेश।

अणुव्रत दिवस के अवसर पर अणुव्रत आंदोलन के माध्यम से संयम, अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह एवं नैतिक जीवन के छोटे-छोटे संकल्पों को अपनाने का संदेश दिया गया। अणुव्रत व्यक्ति के जीवन में आत्मानुशासन और सदाचार की भावना को मजबूत करता है तथा स्वस्थ एवं शांतिपूर्ण समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है।


जैन आगम परंपरा के अनुसार भगवान महावीर स्वामी ने मोक्ष प्राप्ति से पूर्व 27 भवों में अनेक प्रकार की आध्यात्मिक साधना और कर्मनिर्जरा की। इनमें नयसार, मरीचि और विश्वभूति जैसे भव विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। नयसार भव में उनमें धर्म के प्रति श्रद्धा का जागरण हुआ, मरीचि भव में उन्होंने आध्यात्मिक जीवन से जुड़े संस्कार प्राप्त किए तथा विश्वभूति भव में वैराग्य एवं आत्मकल्याण की दिशा में उनकी यात्रा आगे बढ़ी। इन भवों की कथा हमें यह प्रेरणा देती है कि आत्मा की उन्नति निरंतर पुरुषार्थ, संयम और सद्‌कर्मों से होती है। अणुव्रत का संदेश है-छोटे-छोटे संकल्पों के माध्यम से जीवन में बड़े परिवर्तन लाना।

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