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जैन संत श्री विराग मुनि के 154 उपवास पूर्ण, दादागुरुदेव की बड़ी पूजा कर सुखशाता की मंगलकामना।

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रायपुर - खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी म सा हस्ते प्रतिष्ठित चमत्कारी श्री जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी भैरव सोसायटी में अमावस्या के पावन अवसर पर दादागुरुदेव की बड़ी पूजा कर जैनसंत श्री विराग मुनि के अभिग्रहपूर्वक जारी 154 उपवास व बालाघाट की ओर पद विहार की सुखशाता की मंगलकामना की जावेगी उक्ताशय की जानकारी श्री सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व दादाबाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष सन्तोष बैद व महासचिव महेन्द्र कोचर ने दी। श्री विराग मुनि द्वारा आत्मकल्याण सह विश्वकल्याण की भावना से अभिग्रह पूर्वक 15 जनवरी से लगातार जैन उपवास जारी है। श्री विराग मुनि ने अपने गुरु आगम ज्ञाता, युवा हृदय सम्राट, सरल स्वभावी प पु गणाधीश, पन्यास प्रवर, गणिवर्य श्री विनयकुशल मुनिजी म सा की अनुमति व आशीर्वाद से 17 जून को 154 वां उपवास पूर्ण हुआ है। महेन्द्र कोचर ने बताया कि जैनधर्म के वर्तमान शासनपति भगवान महावीर स्वामी ने भी अपने साधना काल में अभिग्रह युक्त 5 माह 25 दिन का उपवास किया था, और परमात्मा का पारणा चंदनबाला के हाथों हुआ था। जैनसंत श्री विराग मुनिजी को खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी के आशीर्वाद से तप चक्रवर्ती की उपाधि रायपुर श्रीसंघ द्वारा प्रदान की गई, श्री सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व दादाबाड़ी ट्रस्ट ने उपाधि की अनुमोदना कर जयजयकार की। श्री विराग मुनिजी की उपवास की साधना अभिग्रह पूर्वक जारी है। अध्यक्ष संतोष बैद ने बताया कि दादागुरुदेव की बड़ी पूजा में जैन संत तप चक्रवर्ती श्री विराग मुनि के 154 उपवास की सुखशाता व पद विहार हेतु मंगलकामना करने श्रद्धालु भाग लेंगे। चारों दादागुरुदेव से सकल जैन समाज श्रीसंघ ने प्रार्थना कर शीघ्र अभिग्रह पूर्ण होने की अरदास होगी। आज अमावस्या को दादागुरुदेव की बड़ी पूजा के लाभार्थी जयचंद रमेश, मोहनचंद बच्छावत, दिनेश कुमार जैन, बसंत जितेन्द्र नाहर, नीलमचंद डॉ अंशुल बरड़िया, वर्तिका वर्धमान वैभव चोपड़ा, गुमानचंद कांतिलाल झाबक, संतोष सरला बैद परिवार हैं।

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