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अनुशासन से ही व्यक्तित्व बनता है कीमती, स्वभाव सुधारने के लिए करें प्रयास : साध्वी मंजुलाश्रीजी

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बाल संघपति एवं श्री सम्मेत शिखर भाव यात्रा 16 अगस्त को, 5 से 18 वर्ष के बालक-बालिकाओं को मिलेगा संघपति बनने का अवसर।

रायपुर - आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए गुरुवार को साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने कहा कि स्वभाव को बदलने में समय नहीं लगता, लेकिन स्वभाव को बिगड़ने में भी समय नहीं लगता। इसलिए व्यक्ति को अपने व्यवहार और आदतों के प्रति सजग रहना चाहिए।

साध्वीश्री ने कहा कि जीवन में अनुशासन रखना जरूरी है, लेकिन अनुशासन रखने से पहले स्वयं अनुशासित होना पड़ेगा। जब व्यक्ति अपने जीवन में नियम, संयम और अनुशासन को अपनाता है, तभी उसके व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव आता है।


उन्होंने कहा कि हमें अपने जीवन को कीमती बनाना है और इसके साथ ही अपने व्यक्तित्व को भी ऐसा बनाना है, जिससे समाज और परिवार में हमारी पहचान अच्छे संस्कारों और व्यवहार के रूप में बने। इसके लिए आत्मचिंतन, संयम और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है।


इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष, महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

बच्चों को मिलेगा संघपति बनने का अवसर, 16 अगस्त को होगी सम्मेत शिखर भाव यात्रा।

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं श्री आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास समिति की ओर से बाल संघपति एवं श्री सम्मेत शिखर भाव यात्रा का आयोजन 16 अगस्त रविवार को किया जाएगा। यह आयोजन परम पूज्य कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणा श्रीजी म.सा. की सुशिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका परम पूज्य मंजुला श्रीजी महाराज साहब की निश्रा में होगा।

आयोजन के तहत सुबह 7 बजे श्री ऋषभदेव मंदिर, सदर बाजार से दादाबाड़ी परिसर में निर्मित सम्मेत शिखर की प्रतिकृति तक भव्य चतुर्विध संघ यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा में ट्रस्टियों द्वारा विजय तिलक किया जाएगा। इसके बाद दादाबाड़ी परिसर में सम्मेत शिखर की प्रतिकृति के दर्शन एवं भाव यात्रा कराई जाएगी।

इस आयोजन की विशेषता यह है कि 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं को संघपति बनने का अवसर मिलेगा। आयोजन समिति के अनुसार यह पहल बच्चों में धर्म, संस्कार, नेतृत्व तथा सेवा-भावना की भावना जागृत करने का प्रयास है। 

यात्रा के उपरांत दादाबाड़ी परिसर में ही संघमाला का आयोजन किया जाएगा। भाव यात्रा की विधि श्री विपिनजी बागरेचा, नागदा द्वारा कराई जाएगी। आयोजकों के अनुसार इस आयोजन के माध्यम से बच्चों को जैन धर्म, तीर्थ एवं धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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