बालोद 21जून 2023 - समता भवन बालोद में प्रवचन में उपस्थित जनसभा में आचार्य श्री रामेश की सुशिष्या साध्वी श्रीमंजुलाश्रीजी मसा. ने फरमाया कि संसार के भोग के मार्ग में व्यक्ति को महारत हासिल है ,संसार की भौतिक सुख-सुविधाओं से व्यक्ति बाहर कैसे आए? यह प्रश्न आज समाज में है? मानव ने आज व्यापार की व अन्य कला बहुत सीख ली, लेकिन इससे अब बाहर कैसे आए यहां कला नहीं सीख पाए, भोग की कला जान पाए लेकिन योग की कला अब तक सीख नहीं पाए। आज संपूर्ण विश्व में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। योग की कला प्रभु ऋषभदेव ने आज से कई हजारों साल पहले बताया था, आज बाबा रामदेव ने प्राचीन योग की कला को पूरे विश्व में फैला दिया है, भगवान ऋषभदेव के समय से ही योग, त्याग का जीवन जीना बताया जा रहा है, भगवान महावीर ने साडे 12 वर्ष तक साधना काल में मात्र दो घड़ी नींद ली, योग साधना में डूबे रहे, साधना में जो डूब जाता है उसका आलस्य गायब हो जाता है। जैन धर्म में भी 3 योग मन, वचन, काया के बताए हैं, हर समय हमारे मन में चार प्रकार की बातें सत्य, झूठा सत्य, सच्चा झूठा, ना सच्चा ना झूठा यह बात चलती रहती है, लेकिन याद नहीं रहती है, व्यक्ति व्यवहार में योग की एकाग्रता को साथ रखें अंतरराष्ट्रीय जगत में एक योग के बल में बाबा रामदेव ने भारत की प्राचीन सभ्यता को जन-जन तक पहुंचाया। मन के योगों की बीमारी भी, वचन के योग की बीमारी योग से दूर हो जाती है व्यक्ति थोड़ा विचार करके ही बोले। साध्वी श्री मंजुलाश्रीजी ने कहा कि आज घरों में झगड़े वचन बोल के कारण से बढ़ रहे हैं, यदि मन ने पकड़ लिया तो तत्काल स्पष्ट करके सुलझा लेवे, पहले के जमाने में समाज में 5 मुखिया होते थे, जो कोई भी झगड़ा परिवार का हो उसे मिल कर हल कर लेते थे आज देखा जाता है, सभी मुखिया बन बैठे हैं, मुखिया को गौण कर दिया है जिसके चलते हर घरों में शांति का अभाव है, किसी को किसी का डर है नहीं है आज परिवारिक मामले न्यायालय - कोर्ट में जा रहे हैं, जिससे परिवार व समाज का नुकसान हो रहा है, व्यक्ति की नासमझी से तनाव के चलते परिवार बिखर रहे हैं, यदि एक दूसरे को आपस में सीख गए, समझ गए तो छोटी सी बात सुलझा ली जाएगी, घर के मुखिया किसी का भी पक्ष ना ले, पहले के जमाने में व्यक्ति कम पढ़ा लिखा था, लेकिन समझदारी से परिवार चलाता था, आज पढ़ाई को विशेष दर्जा दिया जा रहा है, लेकिन व्यक्ति घर चलाने में सक्षम नही है। दुनिया में चारों और भोग का रास्ता बढ़ रहा है समाज में सभी व्यक्ति पावर चाहते हैं, वर्चस्व चाहते हैं लेकिन यह पावन क्षनिक समय का ही रहता है, मन वचन एकाग्रता रहे तो घर बर्बाद होने से बच सकते हैं, व्यक्ति को पुरुषार्थ करना होगा, सदैव सूर्योदय के पहले उठ जाएं, उगता सूरज देखें जिससे हजारों बीमारी दूर होती है, शुद्ध हवा मिलती है कहा जाता है कि सौ दवा एक हवा जीवन जीने के लिए महत्वपूर्ण है। योग के माध्यम से गहरे लंबा सांस लेने से उम्र लंबी होती है, योग के माध्यम से सही प्राणायाम लेवे मन से एकाग्र हो जावे। तीर्थंकर देव भी जंगलों में जाते थे वे वहां सिर्फ मन वचन काया ही साथ ले गए, मन वचन काया की साधना ही योग है इससे तनाव दूर हो जाएंगे, व्यक्ति को साधना निरंतर बढ़ानी होगी शांति होगी तो एकाग्रता बढ़ेगी, ब्रह्म मुहूर्त में उठकर जो साधना करता है, उसका मानव जीवन सफल हो जाता है, समय को सही जगह लगावे फिजूल की बातों में नहीं, दुनिया के पीछे मत दौड़ो। उन्होंने जैन भाइयों से आग्रह किया कि प्रभु ऋषभनाथ देव भगवान का दिया हुआ धर्म योग साधना को घर-घर में धारण करें और अपने आप को वश में कर लेवे। समता भवन में प्रवचन श्रृंखला के दौरान श्री सुरक्ती श्रीजी मसा ने कहा कि जिस व्यक्ति में जैसी योग्यता है, वह दूसरों को देखकर वैसा ही ग्रहण कर लेते हैं, व्यक्ति को गुण देखना चाहिए और अवगुण नहीं, व्यक्तियों में गुण अवगुण दोनों रहते हैं, हम जिस नजरियां से देखेंगे हमें गुन अवगुण वैसा ही दिखेगा जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि। जिनवाणी कहती है कि साधना के क्षेत्र में बढ़ना है तो गुन को देखकर आगे बढ़ सकते हैं, दूसरे को गुणों की देखकर प्रशंसा करें, बाहरी जगत में विकास करना है बढ़ाना है तो उसके गुणों के बारे में बताना होगा, आज हम दूसरों के अवगुण देखते हैं लेकिन हम हमारा अवगुण नहीं देख पाते कोई बताता है तो क्या हम शांत रहते हैं? सुधारने का प्रयास करें अपने अवगुणों को। अपनी दृष्टि गुण दृष्टि बनाएं, व्यक्ति यदि एक अच्छे गुण धारण कर लिए तो गुणों के सागर बन जाएंगे।