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रिमझिम फुहारो के बिच निकली श्री जी की शोभायात्रा ध्वजा रोहण कर आरम्भ किया श्री सिद्ध चक्र महामण्डल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ।

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रायपुर - श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़े मंदिर मालवीय रोड मे अष्टानिका महापर्व पर आज 26/6/23 को 8 दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान के प्रथम दिवस पर आज श्री जी की घट यात्रा (शोभायात्रा) बरसते पानी मे रिमझिम फुहारो के बिच सुबह 7 बजे धार्मिक धुनो पर बाजे गाजे के साथ निकाली गयी ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष संजय जैन नायक एवं सचिव राजेश रज्जन जैन ने बताया की बरसते पानी मे भी धर्मप्रेमी बंधुओ का उत्साह कम नहीं हुआ बड़ी संख्या मे महिलाये कलश लेकर पारम्परिक परिधान साड़ी एवं पुरुष वर्ग व बच्चे कुर्ते पैजामे मे उपस्थित थे, यह घट यात्रा मालवीय रोड बड़े मंदिर सें शुरू होकर कोतवाली चौक सादर बाजार, एडवर्ड रोड, गोल बाजार होते हुए मालवीय रोड स्थित बड़े मंदिर मे समाप्त हुई। तत्पश्चात जबलपुर गुरुकुल सें पधारे ब्र.जिनेश भैया के मार्गदर्शन पर मन्दिरजी की छत पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम संपन्न कर श्री सिद्ध चक्र महामण्डल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ का आरम्भ किया गया। जिसमे आज 5 शांति धारा 5 जिनप्रतिमाओ की गयी, और उन्हें विधान स्थल पर विराजमान करके पूजन आरती कर विधान के अर्घ चढ़ाये गए, विधानाचार्य ब्र जिनेश भैया ने आज बताया की सयम शारीरिक और आत्मा शुद्धि का श्रेष्ठ उपाय है, वर्तमान समय मे शारीरिक व्याधिया जैसे कैंसर बी.पी. हार्ट अटेक आदि अनेक बीमारिया शरीर मे बहुत पहले सें बीज के रूप मे अंकुरित हो जाती है अतएव भारतीय संस्कृति एवं वैदिक जैन धर्म बचपन सें ही प्रत्येक मानव समाज परिवार मे सयम त्याग नियम के द्वारा शरीर मे आयी हुई। व्यधियों को अंकुरित होकर आगे बढ़ने सें बचाती है शरीर मे अशुद्ध भोजन तामसिक आहार बार बार गरिष्ठ भोजन का सेवन हमारे शरीर मे व्यधियों को रोगों को बढ़ाने मे सहभागी होते है चातुर्मास काल मे वर्षा ऋतू मे भोजन अन्न पानी आदियों मे जीवाणु दिन दुगनी रात चौगनी स्वाभाविक रूप सें बढ़ते जाते है, इसलिए हमारे ऋषि मुनि साधु संत वर्षा काल मे पृथ्वी हरियाली सें भर जाती है, इसलिए साधु संत एक जगह रह कर आत्मा साधना आत्मा शुद्धि और शारीरिक शुद्धि के उपाय करते रहते है वर्तमान समय मे जब सें इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बिजली के अत्यधिक ऊपयोग हमारी शरीरिक क्षमताओ को घटाते जा रहे है और इनका प्रदुषण का असर खाद्य सामग्री पर पड़ता है और रासायनिक तत्वों के मिश्रण सें कीटनाशक के दुष्प्रभाव हमारे शरीर को खोखला कर रहे है आज छोटे छोटे बच्चों मे युवाओं मे शुगर बीपी हार्ट अटेक जैसी जानलेवा बीमारिया घर करते जा रहा ही अतएव हमारे ऋषि मुनियो ने शुद्ध अहार शुद्ध विचार शुद्ध आचरण सें ही हम इन जानलेवा रोगों पर नियंत्रण कर सकते है। अतएव हमारे ऋषि मुनियो ने उपदेश दिया है मोटा खाओ मोटा पहनो जल्दी सोओ जल्दी जागो सूर्यास्त के बाद पशु पक्षी भी खाना पीना छोड़ कर अपने घर मे प्रवेश कर ब्रह्म मुहर्त मे विचरण को निकल पड़ते है इसलिए जैन धर्म हमें त्याग सयंम नियम शारीरिक शुद्धि मानसिक शुद्धि प्राप्त करने की प्रेरणा देता है सूचनादाता संजय नायक जैन अध्यक्ष प्रणीत जैन मीडिया प्रभारी Mo. 9425209998

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