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तेरापंथ स्थापना दिवस - रायपुर

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रायपुर - आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या समणी निर्देशिका डॉं. ज्योति प्रज्ञा जी, समणी डॉं. मानस प्रज्ञा जी के सान्निध्य में 264 तेरापंथ स्थापना दिवस तेरापंथ के इतिहास को रेखांकित करते हुए मनाया गया। उपस्थित समाजजनों को संबोधित करते हुए समणी डॉं. मानस प्रज्ञा जी ने बताया कि आचार्य भिक्षु का लक्ष्य अभिनिष्क्रमण कर किसी पथ का निर्माण करना नहीं था सहसा एक घटना का चित्रण हुआ जिसकी व्याख्या से प्रभो यह तेरा पथ है, मैं इस पथ का पथिक मात्र हूं से तेरापंथ धर्मसंघ का उदय हुआ। तेरापंथ धर्मसंघ की नींव मर्यादा और अनुशासन है। धर्मसभा को उद्बबोधित करते हुए समणी निर्देशिका डॉं. ज्योति प्रज्ञा जी ने सुमधुर गीतिका "भिक्षु तेरा नाम मंगल.... " के माध्यम से तेरापंथ के उदय या स्थापना को समझाने का प्रयास किया। समणी जी कहा जिस प्रकार अंक गणित में 9 का अंक महत्वपूर्ण है उसी प्रकार Terapanth में भी 9 लेटर है जिसका अपना महत्व है। तेरापंथ धर्मसंघ में समर्पण भाव व कृतज्ञता का जागरण समाहित है जो इसके प्रगति पथ में साधक की भूमिका का निर्वहन कर रहा है।

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