रायपुर - बालाघाट का जैन दादाबाड़ी इन दिनों जैन समाज ही नहीं बल्कि सभी के लिए उत्सुकता का केंद्र बना हुआ है। यहां जैन मुनिश्री विरागमुनि जी उपवास पर हैं। वो भी कुछ दिनों से नहीं बल्कि पूरे 171 दिन से। बुधवार को 172वां दिन है लेकिन उन्होंने ईश्वरीय मर्यादा को ध्यान में रखते हुए बुधवार को उपवास बंद कर पारणा का निश्चय किया है। ये ईश्वरीय मर्यादा ये है कि भगवान महावीर स्वामी ने अपने जीवनकाल में 178 दिन के उपवास रखे थे। इससे अधिक दिनों तक उपवास का वर्णन जैन समाज में नहीं है। डॉक्टर्स की एक रिसर्च टीम ने मुनिश्री विरागमुनि जी की सेहत की जांच की है और उन्हें पूरी तरह फिट देखकर हैरानी भी जताई है। ये रिपोर्ट टीम WHO को देगी।
भगवान महावीर और उनके उपवास के बारे में जानिए।
भगवान महावीर का जन्म वैशाली गणराज्य के कुंडग्राम में ईसा से 540 साल पहले हुआ था। जैन ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार उन्होंने छह मासी तप किया था जो 178 दिनों तक चला। इसके अलावा उन्होंने 4 मास की तपस्या अपने जीवनकाल में 9 बार की। भगवान महावीर को जैन समाज 24वें तीर्थंकर के रूप में मानता है।
मुनिश्री के स्वास्थ्य की जानकारी लेने पहुंची बड़ौदा से विशेषज्ञों की टीम।
तो आइए विस्तार से बताते हैं करीब ‘ढाई हजार साल बाद’ इतने लंबे उपवास की पूरी कहानी
15 जून 2023 को महाराष्ट्र के चंद्रपुर से जैन मुनिश्री विरागमुनि जी ने आहार का त्याग कर दिया था। खुद मुनिश्री के शब्दों में-’ आत्मा की शक्ति अनंत है। इस उपवास से युवा पीढ़ी और पूरी दुनिया ये जान सकेगी कि ये शक्ति कितनी विराट है। उपवास सिर्फ इस शक्ति के प्रकटीकरण के लिए है। योग, ध्यान, प्राणायाम, सूर्य और पानी की उर्जा से यह तप संभव हो सका है।
मुनिश्री के उपवास को मंगलवार को 171 दिन पूरे हो गए और बुधवार को 172वां दिन है। श्री पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर ट्रस्ट, मैनेजिंग ट्रस्टी अजय लूनिया ने बताया कि 171 उपवास की दीर्घ तपस्या के पारणा का लाभ उसी परिवार को मिलेगा, जो त्याग, तपस्या, उत्सव, महोत्सव करना चाहते हैं। इस भावना को एक पर्ची में लिखकर जो भी परिवार यह लाभ लेना चाहता है, उसे मंगलवार रात 11 बजे तक श्री जिनकुशल सूरी दादाबाड़ी मंदिर में चातुर्मास समिति के पास जमा करवाना था। भाग्यशाली व्यक्ति के यहां गुरुदेव पारणा के लिए पधारेंगे।
बड़ौदा के सुमनदीप विद्यापीठ विश्वविद्यालय से तीन डॉक्टरों की रिर्सच टीम मंगलवार को बालाघाट पहुंची। टीम में बड़ौदा से डॉ. आशीष शाह, डॉ. घनश्याम और दुर्ग से डॉ. डीपी बिसेन शामिल रहे। इन्होंने मुनिश्री के स्वास्थ्य की जांच की और ये पता लगाने की कोशिश की कि इतने लंबे उपवास का उनके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ा है। डॉ शाह ने बताया कि ये रिसर्च इसलिए भी अहम है क्योंकि सामान्यत: बिना भोजन के सिर्फ गर्म पानी पीकर इतने दिनों तक उपवास पर रहने के बाद स्वस्थ तो दूर जीवित रहना भी करीब असंभव है।
डॉ. शाह का कहना है कि एनालिसिस रिपोर्ट की जांच के बाद ही सामने आ पाएगा कि ऐसा कैसे संभव हुआ लेकिन फिलहाल गुरूदेव फिजिकली नार्मल हैं और ना खाते हुए भी उनमें एनर्जी लेवल पूरी तरह मेंटेन है। ये देखकर हमें खुशी भी हुई और हैरानी भी।
उपवास के दौरान ही तीन राज्यों की पदयात्रा।
15 जून 2023 को निराहर रहने का संकल्प लेकर चंद्रपुर से निकले मुनिश्री विरागमुनी जी छत्तीसगढ़ पहुंचे। यहां राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, खैरागढ़ से मध्यप्रदेश के बालाघाट तक सफर किया। इस दौरान उन्होंने कुल मिलाकर करीब 400 किमी की पदयात्रा कर ली है।
दिनचर्या और गुरूओ एवं साथियो के लिए आहार लेने स्वयं जाते।
मुनिश्री की दिनचर्या सुबह 3 बजे से शुरू हो जाती है जो रात्रि विश्राम तक चलती है। इस दौरान वे प्रातः उपाध्याय, प्रवचन, दोपहर अध्ययन, गुरूओं और साथी छोटे साधुओं के लिए आहार लेने वे स्वयं जाते हैं। उनकी गतिशीलता विश्राम तक चलती रहती है। सूरज डुबने के पहले गर्म पानी की अंतिम बूंद जो ले ली, वही आहार है। इसके बाद गर्म पानी भी नहीं लेते।
मुनिश्री का समूचा परिवार ही संन्यासीजैन समाज के साधक मनोज डाकलिया से मुनिश्री विरागमुनि जी म.सा. बनने तक का उनका पूरा जीवन प्रेरणादायी, और पथ प्रदर्शक है। राजस्थान के पाली निवासी मनोज डाकलिया ने पूरे परिवार के साथ श्री कुशलमुनिजी म.सा. से अहमदाबाद के नवरंगपुर दादावाड़ी में 21 जून 2014 को दीक्षा ली थी। पत्नी सुश्राविका मोनिकाजी वर्तमान में साध्वी श्री विरतियशाश्रीजी, पुत्र भव्य वर्तमान में मुनि श्री भव्यमुनि, पुत्री कुमारी खुशी वर्तमान में श्री विनयम्रयशाश्रीजी ने भी दीक्षा ली है। पुत्र मुनिश्री भव्यमुनी उनके साथ हैं। बताया जाता है कि करोड़ो की मोह-माया को त्याग, भगवान महावीर के रास्ते पर चलने का संकल्प पूरे परिवार ने लिया।
मुनिश्री ने उपवास के दौरान करीब 400 किमी की पदयात्रा भी की है, शरीर दुर्बल हुआ लेकिन चेहरे का तेज बढ़ता गया।
मुनिश्री ने बताया 14 जनवरी 2023 को अंतिम बार आहार लेने के बाद उन्होंने 171 दिनों से अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया है। रोजाना सिर्फ आधा लीटर गरम पानी ग्रहण करते हैं वह भी सूर्योदय से 48 मिनट बाद और सूर्यास्त के पूर्व।
आम आदमी के लिए इस तरह का तप करना तो दूर, सोचने पर भी रोंगटे खड़े हो जाते है कि कोई संत व्यक्ति स्वाद का अनुराग छोड़कर इतना ‘विराग’ कैसे हो सकता है। इतने लंबे उपवास के बाद उनका शरीर दुर्बल जान पड़ता है लेकिन चेहरे का तेज बढ़ता ही गया है।
लंबे उपवास पर एक्सपर्ट ने दी प्रतिक्रिया जानी प्रक्रिया।
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में एंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ मनुज शर्मा ने बताया खाना न लेते हुए सिर्फ पानी पर व्यक्ति 30 दिनों में काफी कमजोर महसूस करने लगता है। 45 से 70 दिनों में उसकी मौत होने की संभावना होती है। मृत्यु हर व्यक्ति में अलग-अलग समय में हो सकती है। ये इस बात पर निर्भर करती है कि उस व्यक्ति की उम्र कितनी है, जब उस व्यक्ति ने खाना बंद किया तो उस समय वजन कितना था। पानी कितना ले रहे हैं। हाइड्रेशन लेवल कितना मेंटेंन है। फीमेल ज्यादा सर्वाइव कर पाती हैं। बच्चे सबसे जल्दी प्रभावित हो जाते हैं।
हमारे शरीर के अंदर एक काउंटर रेगुलेटरी सिस्टम होता है। काउंटर रेगुलेशन का मतलब होता है कि जब भी शरीर पर विपत्ति का समय आएगा, मान लिजिए कोई व्यक्ति बीमार है और उसे खाना नहीं मिल पा रहा है किसी वजह से तो हमारे शरीर के अंदर ग्लूकोज सप्लाय का एक सिस्टम होता है। हमारे शरीर में ऐसे हार्मोन्स और एंजाइम्स होते हैं जिनका काम ही यही है कि ऐसी परिस्थिति में ग्लूकाेज की सप्लाय को निरंतर जारी रखना। भले ही खाना न मिल रहा हो। हमारे जो स्टोर हैं जो सामान्यत: मसल्स के तौर पर होता है वो कन्वर्ट हो जाता है प्रोटीन में। ये कन्वर्ट हो जाता है कार्बोहाइड्रेड में। ये काम ग्लूकोज बनाने का भगवान ने दिया है किडनी और लीवर को।
किडनी और लीवर हमारे फैट और प्रोटिन को खत्म करके ग्लूकोज की सप्लाय जारी रखते हैं। इस प्रक्रिया से ग्लूकोज की सप्लाय बंद होने पर ग्लुकोनियोजेनेसिस की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इससे भी ग्लूकोज की सप्लाय बहाल रहती है लेकिन इस तरह भी इंसान डेढ़ दो महीने तक ही जिंदा रह सकता है।