हैदराबाद - परम पूज्य गुरुदेव सूरि सम्राट, राष्ट्ररत्न, अवंती तीर्थोद्धारक, गुणायाजी तीर्थ जीर्णोद्धार प्रेरक, खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा., पूज्य गणिवर्य श्री मयंकप्रभसागरजी म.सा. आदि ठाणा–9 की पावन निश्रा तथा पूज्या गणिनी प्रवरा श्री सुलोचनाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा–34 की पावन सानिध्यता में दिनांक 29 जुलाई 2026, आषाढ़ सुदी पूर्णिमा के पावन अवसर पर त्रयनगर स्थित श्री जैन श्वेताम्बर जिनकुशलसूरिजी दादाजी बाग मंदिर, कारवान दादावाड़ी में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
प्रातः पूज्य गुरुदेवश्री को पालकी में विराजमान कर गुरु भक्तों द्वारा भक्तिभाव एवं हर्षोल्लास के साथ मंडप में आगमन हुआ। इस दौरान समस्त वातावरण गुरु भक्ति के जयघोष एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान हो उठा।
महोत्सव का शुभारंभ पूज्य गुरुदेव श्री के मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात् मुमुक्षु वेदांत श्रीश्रीमाल ने भावपूर्ण कथा के माध्यम से गुरु भक्ति एवं गुरु समर्पण की भावना को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया। तत्पश्चात् मुमुक्षु हर्ष संचेती एवं मुमुक्षु गौरव ने गुरु चरणों में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। केयुप की ओर से श्री रमेशजी पारख ने प्रेरणादायी प्रस्तुति दी। वहीं बाड़मेर–हैदराबाद से श्री भरत वडेरा ने रैप प्रस्तुति के माध्यम से गुरु भक्ति का अनूठा भाव प्रस्तुत कर सभी का ध्यान आकर्षित किया। श्री मंत्र बरलोटा ने भी भावपूर्ण शब्दों द्वारा गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा समर्पित की।
धर्मसभा में पूज्य गुरुदेव श्री ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि गुरु केवल पूजनीय व्यक्तित्व नहीं, अपितु जीवन के सच्चे मार्गदर्शक होते हैं। गुरु पूर्णिमा केवल पूजन का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मपरिवर्तन एवं गुरु आज्ञा के प्रति पूर्ण समर्पण का पावन अवसर है।
तत्पश्चात् पूज्य मुनि श्री महितप्रभसागरजी म.सा. एवं पूज्य मुनि श्री मृणालप्रभसागरजी म.सा. ने प्रेरणादायी उद्बोधन प्रदान किया। पूज्य मुनि श्री मधुरप्रभसागरजी म.सा. ने अंग्रेजी भाषा में प्रेरक वक्तव्य दिया, वहीं नूतन मुनि श्री मंत्रप्रभसागरजी म.सा. ने गीतिका के माध्यम से गुरु के प्रति अपनी कृतज्ञता एवं समर्पण भावना व्यक्त की।
इसके पश्चात् पूज्या साध्वी श्री प्रियस्वर्णांजनाश्रीजी म.सा. ने प्रेरणादायी उद्बोधन प्रदान करते हुए गुरु भक्ति, गुरु कृपा एवं धर्माराधना के महत्व पर प्रकाश डाला तथा उपस्थित श्रद्धालुओं को गुरु आज्ञा के अनुरूप संयम एवं धर्ममय जीवन जीने की प्रेरणा दी।
महोत्सव में केएमपी की ओर से श्रीमती शीतल तातेड़, कु. खनक तातेड़ एवं कु. गीतिका ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी। ज्ञानवाटिका एवं विहार ग्रुप की ओर से श्री विक्रमजी ढड्डा ने अपने विचार व्यक्त किए। केएमपी सिकंदराबाद की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती आरती जैन ने भी भाव प्रस्तुत किए। छवि छाजेड़ एवं प्रीति बांठिया ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। वीर बहनों खुशबूजी वडेरा, आरतीजी भंसाली एवं गीतिका ने भी भक्तिमय प्रस्तुतियों से वातावरण को भावविभोर बना दिया।
इसके पश्चात् दादावाड़ी ट्रस्ट की ओर से श्री रितेशजी भंसाली एवं श्री संदीपजी देवड़ा (धोका) ने सहभागिता निभाई। श्री संपतजी संखलेचा (इचलकरंजी) ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
तत्पश्चात् भाग्यदीप रेजिडेंसी के निर्माणकर्ता परिवार की ओर से आगामी 28 नवम्बर 2026 को आयोजित होने वाले प्रतिष्ठा महोत्सव की विनती की गई। ज्ञानवाटिका, केएमपी एवं केयुप की ओर से संकल्प पत्र का निर्माण किया गया। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने गुरुदेव श्री को साक्षी मानकर गुरु आज्ञा में रहते हुए यथाशक्ति नियम ग्रहण कर अपनी गुरु भक्ति एवं समर्पण भावना व्यक्त की।
इस अवसर पर पूज्या गणिनी प्रवरा श्री सुलोचनाश्रीजी म.सा., भावी महत्तरा पद विभूषिता द्वारा हस्तलिखित ग्रंथ श्रद्धापूर्वक पूज्य गुरुदेव श्री के चरणों में अर्पित किया गया।
तत्पश्चात् तेलंगाना राज्य के वरिष्ठ एवं अनुभवी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक श्री गोविंदजी विशेष रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने गुरुदेव श्री के चरणों में वंदना कर अपने भाव व्यक्त किए, जिसके पश्चात् उनका बहुमान किया गया।
इसके बाद गुरुपूजन का आयोजन सम्पन्न हुआ, जिसका लाभ प्रधान संयोजक श्री मनोहरलालजी, श्री कुशलराजजी, श्री संजयकुमारजी, श्री दिनेशकुमारजी एवं कांकरिया परिवार ने प्राप्त किया। गुरु वधावणा का लाभ श्री जीरावला ट्रस्ट मंडल की ओर से प्राप्त किया गया, जिसमें हैदराबाद के श्री प्रवीणजी संखलेचा ने सहभागिता निभाई।
इस दिव्य अवसर पर उपस्थित समस्त श्रमण–श्रमणी भगवंतों ने पूज्य गुरुदेव श्री की प्रदक्षिणा कर गुरु वंदना एवं अनुमोदना की। तत्पश्चात् उपस्थित श्रद्धालुओं ने अक्षत द्वारा गुरुदेव श्री का वधामणा कर अपनी अटूट श्रद्धा एवं गुरु भक्ति व्यक्त की।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं प्रेरणादायी मंच संचालन पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म.सा. ने किया। अपने सहज एवं प्रभावशाली संचालन से उन्होंने संपूर्ण आयोजन को भावपूर्ण बनाए रखा तथा प्रसंगानुकूल आध्यात्मिक विचारों के माध्यम से श्रद्धालुओं को गुरु भक्ति एवं धर्माराधना से जोड़े रखा।
अंत में सुप्रसिद्ध गायक श्री अनिश राठौड़ ने भक्तिमय भजनों की मनोहारी प्रस्तुति देकर संपूर्ण वातावरण को गुरु भक्ति से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर देशभर के विभिन्न नगरों से पधारे अनेक गुरु भक्तों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह समाचार नेमिकांतिमणि टीम द्वारा संकलित एवं प्रस्तुत किया गया है।