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दसलक्षण महापर्व प्रथम दिवस "उत्तम क्षमा"

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बिलासपुर में आत्म शुद्धि का महापर्व 10 दिवसीय भक्ति सरिता, आत्म का महायज्ञ "दसलक्षण महापर्व" शुरू।

बिलासपुर - समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज एवं आचार्य श्री समय सागर महाराज की शिष्या आर्यिका श्री 105 अकम्प मति माता जी, आर्यिका श्री 105 अचल मति माता जी के सानिध्य में “दशलक्षण पर्व “ का आयोजन 1008 श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, क्रातिनगर में  बुधवार “भाद्रपद शुक्ल” से  बुधवार को प्रारम्भ हुवा। क्रांतिनगर, सरकंडा, सन्मति विहार मंगला तीनों मंदिर जी मे मंगलाष्टक अभिषेक, शांतिधारा संपन्न हुवा। मुख्य कार्यक्रम आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, क्रातिनगर में संपन्न हो रहा है। 


जैन सभा अध्यक्ष दीपक जैन ने बताया कि “दशलक्षण पर्व “ के दौरान प्रातःकाल  06.30 बजे सें मंगलाष्टक, अभिषेक, शांतिधारा माताजी के मुखारबिंद से, प्रातः 7.30 बजे से पूजन, प्रातः 8.45 से माताजी के प्रवचन एवं प्रातः 9.15 बजे से “तत्त्वार्थ सूत्र” का वाचन हुवा । 1008 पंचबालयती दिगम्बर जैन मंदिर, सन्मति विहार, मंगला में प्रातः 7.00 बजे से मंगलाष्टक, अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन संपन्न हुवा। 1008 श्री पार्श्व नाथ दिगम्बर जैन मंदिर, सरकंडा में प्रातः 6.45 बजे से मुख्य वेदी में मंगलाष्टक प्रारंभ, अभिषेक , शांतिधारा एवं पूजन तथा प्रातः 7.00 बजे से अस्थाई वेदी में मंगलाष्टक प्रारंभ, अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन का कार्यक्रम सम्पन्न हुवा। अभिषेक एवं शांतिधारा के पात्रों का चयन बोलियों के माध्यम से किया गया ।

उत्तम क्षमा - तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन

समाज के सुप्रीत जैन ने बताया कि बुधवार को तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन समाज की श्रीमती स्वीटी जैन, श्रीमती प्रतिमा जैन, श्रीमती नम्रता जैन, श्रीमती नामिता जैन , श्रीमती पिंकी जैन, श्रीमती सोना जैन, श्रीमती रितिका जैन, श्रीमती संगीता ममता जैन, श्रीमती मीनल जैन ने किया।

"खुला प्रश्न मंच" प्रतियोगिता

समाज की अमिता गोयल ने बताया कि महिला मंडल सरकंडा द्वारा शुक्रवार को "खुला प्रश्न मंच" प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता मे सभी उम्र के श्रावक श्राविका भाग लेंगे। 30 प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रश्न दस धर्मो से संबंधित रहेंगे विजेता को महिला मंडल सरकंडा द्वारा पुरुस्कार भी दिया जाएगा।


आज भजन प्रतियोगिता

श्रीमती क्षिप्रा जैन ने बताया कि गुरुवार को धार्मिक भजन देव, शास्त्र, गुरु पर आधारित रहेगा। समय  केवल 3 मिनट भजन कराओके के साथ ही गाना है। केवल मुखड़ा और एक अंतरा गाना है। यह प्रतियोगिता 12 वर्ष से अधिक प्रतिभागियों के लिए ही है।

प्रवचन

 दशलक्षण महापर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म के बारे में बताते हुए माताजी ने कहा कि क्रोध एक कषाय है, जो व्यक्ति को अपनी स्थिति से विचलित कर देती है।  इस कषाय के आवेग में व्यक्ति का विचार शून्य हो जाता है और हित-अहित का विवेक खोकर कुछ भी करने को तैयार हो जाता है, जिस प्रकार लकड़ी में लगने वाली आग जैसे दूसरों को जलाती ही है, पर स्वयं लकड़ी को भी जलाती है। उन्होंने कहा कि क्रोध कषाय को समझ लेना और उस पर विजय पा लेना ही क्षमा धर्म है। मनीषियों ने कहा है कि क्रोध अज्ञानता से शुरू होता है परन्तु पश्चाताप से विचलित नहीं होना ही क्षमा धर्म है।

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