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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के द्वारा पर्यावरण संरक्षण दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम रखा।

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भखारा - प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय तपस्या भवन भखारा के द्वारा 5 जून पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम रखा गया। अतिथि के रुप में उपस्थित माननीय भ्राता हरख जैन पप्पू (लायन्स क्लब पूर्व अध्यक्ष एवं समाज सेवी), माननीय बहन आशा वर्मा (आंगनवाड़ी सुपरवाइजर), माननीय बहन भोजसोन (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता) माननीय बहन ईश्वरीय (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता), भारती साहू (पार्षद नगर पंचायत भखारा), ज्योति जैनजी (समाजसेवी), भ्राता दुलार सिन्हा (समाजसेवी), राजयोगी बी.के.करुना बहनजी,.राजयोगी बी.के.योगेश्वरी बहनजी व माधुरी डड़सेना उपस्थित थे। माननीय भ्राता हरखचंद जैन जी ने कहा कि आज विकास के नाम पर सड़क किनारे पेड़ काट दिए जाते हैं, नियमता आपको एक पेड़ काटने पर 100 पेड़ लगाना चाहिए, अपने जीवन का अनुभव बताते हुए हमें कुछ शिक्षा दिया कि हमें पेड़ लगाना चाहिए और पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए। दुलार सिन्हा जी ने कहा कि पर्यावरण अनादि काल से है, पर्यावरण का उपयोग करते करते आज इतना प्रदूषित कर दिए हैं कि आज हमको 5 जून पर्यावरण दिवस रूप में मनाना पड़ रहा है आज हम अधिक से अधिक पौधा लगाएं। पर्यावरण हमें मुफ्त में एक पौधा 17.5 लाख रुपए का ऑक्सीजन प्रदान करता है, ठीक उसी प्रकार 35 लाख रुपए के बराबर प्रदूषण से रोकता है, और एक 40 लाख रुपए के बराबर पानी को recycle करता है। पर्यावरण के बारे में और बहुत सारी जानकारी भी दिये। ज्योति बहन ने पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं दी,और आज से ही एक समूह बनाकर पौधारोपण किया। अनेक स्थानों पर जाकर अनेक पौधा लगाने का संकल्प लिया। भारती साहू ने भी पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं दी। बी.के.करुणा बहन जी ने कहाँ की पर्यावरण के दिन एक पौधा लगाना ही पर्यावरण दिवस मनाना नहीं है, बल्कि हो सके तो हर व्यक्ति को एक या एक से अधिक पौधा जरूर लगाना चाहिए क्योंकि पौधा है तो हमारा जीवन है। परी + आवरण से मिलकर बना है, पर्यावरण उसी प्रकार आत्मा का आवरण यह शरीर है, जो कि आंतरिक प्रकृति पांच तत्वों से बना हुआ है जिस प्रकार हम इस शरीर की देखभाल करते हैं समय-समय पर जो चाहिए वह देते हैं, उसी प्रकार बाहर की प्रकृति को भी देखरेख करें संभाल करें। प्रकृति पति परमात्मा दाता है, उसी प्रकार प्रकृति भी सदैव ही हमें निशुल्क देता है इसलिए आज से हम इस प्रकृति को शुद्ध बनाने के लिए सकाश दे उन्हें पवित्र बनाएं। अंत में कॉमेंट्री द्वारा प्रकृति को देवता के रूप सभी ने सकाश दिया। होरी भाई ने सभी को प्रतिज्ञा कराएं और नारें लगाये।

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