रायपुर - विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास की प्रवचनमाला में आत्मकल्याण का मार्ग बताया जा रहा है। परम पूज्य मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. द्वारा आचार्य वीरभद्राचार्य रचित ‘आतुर प्रत्याख्यान’ ग्रंथ के माध्यम से श्रावक -श्राविकाओं को जीवन में आत्मचिंतन और कषायों से मुक्ति की सीख दी जा रही है। शनिवार को मुनिश्री ने मान ध्यान की प्रवचनमाला को आगे बढ़ाते हुए इसके दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला।
मुनिश्री ने कहा कि मान ध्यान की परंपरा जीव के लिए दुख, दुर्गति और पीड़ा को जन्म देने वाली होती है। मान की भावना एक बार मन में घर कर ले तो वह समाप्त होने के बजाय भावांतर में भी बढ़ती जाती है। मान न मिले तो उसकी चाह में मन अशांत रहता है और मान मिलने के बाद उसे और बढ़ाने की इच्छा बनी रहती है। इस प्रकार जीव निरंतर मान ध्यान के चक्र में उलझा रहता है।
मुनिश्री ने कहा कि जीवन को मान ध्यान की परंपरा से निकालकर सद्ध्यान की परंपरा से जोड़ने की आवश्यकता है। इसके लिए मन में चलने वाले अहंकार और मान के भावों पर विराम लगाना होगा। आत्मचिंतन के माध्यम से ही जीव अपने भीतर के विकारों को पहचानकर उनसे दूर हो सकता है।
मुनिश्री ने समझाया कि मान ध्यान में फंसकर जीव द्वेष, क्रोध, लोभ और हिंसा जैसे कषायों में उलझता चला जाता है। मान की भावना बढ़ने के साथ वैर और द्वेष भी बढ़ता है, जिससे मन की शांति भंग होती है और आत्मकल्याण का मार्ग बाधित होता है। इसलिए जीवन में ऐसे भावों को बढ़ावा देने के बजाय सद्भाव, विनय और आत्मचिंतन को स्थान देना चाहिए।
भक्तिभाव से रविवार को निकलेगी चैत्य परिपाटी
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया और एवं महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि 27 सितंबर रविवार को सुबह बैंड बाजे के साथ भक्तिभाव के माहौल में परम पूज्य मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा में श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय से चैत्य परिपाटी निकली जाएगी। मुनि भगवंतो के साथ श्रावक-श्राविकाएं चार जिनालियो में पहुंचकर परमात्मा का दर्शन, वंदन एवं पूजन करेंगे। चैत्य परिपाटी में शामिल होकर सभी सर्वप्रथम विवेकानंद नगर के श्री संभावनाथ जिनालय पहुंचेंगे। यहां से श्री पार्श्वनाथ जिनालय टैगोर नगर, इसके पश्चात नवकार नगर जिनालय एवं राजेंद्र नगर जिनालय में दर्शन लाभ लेंगे। दोपहर में 3 से बालक बालिकाओं के लिए शिविर का आयोजन किया गया है। साथ ही द लिगेसी ऑफ महावीर थीम पर प्रस्तुत झांकियां का पुरस्कार वितरण किया जाएगा। लक्की ड्रॉ निकालकर विजेता को आध्यात्मिक सामग्री मुनि भगवंत के द्वारा आशीर्वाद स्वरुप प्रदान की जाएगी।