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खरतरगच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में सूरत में एक इतिहास का सर्जन हुआ।

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सूरत - परम पूज्य गुरुदेव प्रज्ञापुरुष आचार्य प्रवर श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य पूज्य गुरुदेव युगदिवाकर अर्थात तीर्थोद्धारक खरतरगच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. पूज्य गणिवर्य श्री मयंकप्रभसागरजी म. पूज्य उपाध्याय प्रवर श्री मनितप्रभसागरजी म. पूज्य गणिवर्य श्री मेहुलप्रभसागरजी म. आदि ठाणा 17 व पूजनीया आगम ज्योति प्रवर्तिनी श्री प्रमोदश्रीजी म.सा. की शिष्या पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. पूजनीया बहिन म. डॉ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. आदि ठाणा 8 की पावन निश्रा में सूरत पाल नगर में श्री कुशल कान्ति खरतरगच्छ संघ के तत्वावधान में संघशास्ता चातुर्मास ऐतिहासिकता, भव्यता और प्रभावकता के साथ चल रहा है।

प्रतिदिन प्रवचनों में विशाल संख्या में श्रोतागण उपस्थित हो रहे हैं। पूज्य गुरुदेवश्री उत्तराध्ययन सूत्र व मलयसुन्दरी चरित्र पर प्रवचन फरमाते हैं। शनिवार को प्रश्नोत्तर प्रवचन व रविवार को पारिवारिक प्रवचन होता है। हर रविवार को युवाओं का विशेष शिविर आयोजित होता है। पूज्य उपाध्याय श्री मनितप्रभसागरजी म.सा. द्वारा संचालित इस शिविर में 700 से अधिक युवा भाग ले रहे हैं। साथ ही हर रविवार को बालक बालिकाओं का अलग से शिविर लगता है जिसमें 300 से अधिक बालक बालिकाएं भाग ले रहे हैं। इसका संचालन पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म.. पू. मुनि श्री मृगांकप्रभसागरजी म. पू. मुनि श्री मंथनप्रभसागरजी म. कर रहे हैं।

श्रावण शुक्ल पंचमी प्रभु नेमिनाथ जन्म कल्याणक के अवसर पर गिरनार तीर्थ की भावयात्रा करवाई गई। भावयात्रा कराते हुए पूज्य उपाध्याय श्री मनितप्रभसागरजी म.सा. ने गिरनार तीर्थ का इतिहास बताया। इस दिन स्वामिवात्सल्य का लाभ श्री शांतिलालजी लालचंदजी मंडोवरा परिवार सिणधरी वालों ने लिया।

श्रावण शुक्ल छठ ता. 10 अगस्त को खरतरगच्छ दिवस मनाया गया। इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपतिश्री ने गच्छ के इतिहास आदि की विशेष जानकारी दी। इस अवसर पर पूज्य गणिवर्य श्री मेडुलप्रभसागरजी म. ने आचार्य जिनेश्वरसूरि के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।

11 अगस्त रविवार को पूज्य उपाध्याय श्री मनितप्रभसागरजी म. द्वारा एक विशेष कार्यक्रम संपन्न हुआ। दो घंटे चले भावयात्रा के विशेष आयोजन में निगोद से परमात्मा बनने की यात्रा पूज्य उपाध्यायश्री ने करवाया। कार्यक्रम इतना रोचक था कि सभी ने भीगती आंखों से एकाग्र होकर सुना।

श्रावण शुक्ल अष्टमी प्रभु पार्श्वनाथ निर्वाण कल्याणक के दिन ता. 13 अगस्त को 108 पार्श्वनाथ तीर्थ को भावयात्रा संपन्न हुई। पूज्य उपाध्याय श्री मनितप्रभसागरजी म.सा. ने शंखेश्वर, जीरावला, नाकोडा, अवन्ति, कापरडा, लौद्रवा, पार्श्वमणि आदि अनेक तीर्थों का इतिहास बताते हुए उनकी महिमा का वर्णन किया। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराया गया। उसका व लड्डू वितरण का लाभ शेरगढ़ निवासी लीलादेवी भंवरलालजी लूणिया परिवार ने लिया। के पश्चात् पूज्यश्री का विशेष प्रवचन हुआ। बाद में गौतम स्वामी महापूजन व स्वामिवात्सल्य का आयोजन हुआ, जिसका लाभ होडू सिणधरी सूरत निवासी श्री हीरालालजी गौतमचंदजी श्रीश्रीमाल परिवार ने लिया। पूज्य उपाध्याय श्री मनितप्रभसागरजी म. ने महापूजन का संचालन करते हुए गौतमस्वामी के जीवन प्रसंगों व उनके अनेक गुणों का वर्णन किया।

पूज्य गच्छाधिपति गुरुदेव श्री की प्रेरणा प्राप्त कर श्री संघ में तपश्चर्या का अनूठा वातावरण चल रहा है। श्रद्धालुओं ने चातुर्मासिक चतुर्दशी से मासक्षमण महामृत्युंजय तप प्रारंभ किया। मासक्षमण तप का एक कीर्तिमान स्थापित हुआ। 50 मासक्षमण हुए। और भी कई मासक्षमण आगे चल रहे हैं। 280 से अधिक तपस्वी सिद्धितप की महान् तपस्या कर रहे हैं। 21. 15, व अ‌ट्ठाईयाँ तो सैकडों की संख्या में हो रही है। गौतम गणधर तप में 250 तपस्वी जुड़े हैं। पूज्य मुनि श्री महितप्रभसागरजी म. ने गौतम गणधर तप की आराधना की। गणधर तप के तपस्वियों का पारणा 25 अगस्त 2024 को संपन्न हुआ। मासक्षमण तपस्या के शाही पारणा का लाभ श्री पारसमलजी नेमीचंदजी देसाई परिवार सिणधरी वालों ने लिया।जबकि तपस्वियों के वर्धापना का लाभ श्रीमती शांतिदेवी जुगराजजी मरडीया परिवार चितलवाना वालों ने लिया। सांझी का लाभ शा. प्रतापमलजी मोहनलालजी मगनीरामजी बालड सिणधरी वालों ने तथा मेहंदी का लाभ संघवी शा. नारायणमलजी किशनाजी मरडीया परिवार सांचोर वालों ने लिया।

मासक्षमण तप के उपलक्ष्य में त्रिदिवसीय समारोह ता. 17 अगस्त से 19 अगस्त तक रखा गया। ता. 19 अगस्त को शाही पारणा संपन्न हुआ। तपस्वियों का वरघोडा ता. 25 अगस्त को भव्यता के साथ आयोजित हुआ। सभी तपस्वी शाही बग्धियों में सवार थे। लगातार चल रही बारिश के बीच वरघोडे के समय बारिश बंद हो गई। वरघोडा पूरा होने के बाद बारिश पुनः शुरु हो गई। दादा गुरुदेव की कृपा का यह साक्षात् चमत्कार था। वरघोडे के बाद पूज्यश्री का प्रवचन हुआ।


वर्षीतप का पारणा संपन्न

पूज्य गुरुदेव युगदिवाकर अवति तीर्थोद्धारक खरतरगच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. कं शिष्य पूज्य मुनि श्री श्रेयांसप्रभसागरजी म.सा. के पिछले 15 मास से चल रहे वर्षीतप तपस्या का पारणा सानन्द संपन्न हुआ। एक वर्षीतप पूर्ण कर बिना पारणा किये दूसरा प्रारंभ किया था। परन्तु अस्वस्थता वश डॉक्टर ने प्रतिदिन औषधि सेवन करना जरूरी होने के कारण आगे तप करने का मना किया। उनका मन न होने पर भी पूज्यश्री के आदेश को स्वीकार कर पारणा करना पड़ा। पूज्य आचार्यश्री आदि मुनि मंडल ने उन्हें पारणा कराते हुए वर्धापना दी।

11 उपवास की तपस्या

पूज्य गुरुदेव युगदिवाकर अवति तीर्थोद्धारक खरतरगच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य पूज्य मुनि श्री मुणालप्रभसागरजी म. के ।। उपवास की तपस्या संपन्न हुई। उनका पारणा श्रावण वदि ।। बुधवार 31 जुलाई 2024 को संपन्न हुआ। उनकी भागवती दीक्षा पालीताना में तीन वर्ष पूर्व हुई थी। पारणे के इस अवसर पर उनके माता पिता भाई आदि परिवार जन पधारे थे। श्री संघ द्वारा उनका बहुमान किया गया।

पू. बहिन म. डॉ. विद्युत्प्रभाश्रीजी म. के 51वीं ओली का पारणा

पूजनीया आगम ज्योति प्रवर्तिनी श्री प्रमोदश्रीजी म.सा. की शिष्या पूजनीया बहिन म. डॉ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. के वर्धमान तप की 51 वीं ओली के पारणा ता. 20 अगस्त को पूज्य गुरुदेव युगदिवाकर अवति तोर्थोद्धारक खरतरगच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. पूज्य गणिवर्य श्री मयंकप्रभसागरजी म. पूज्य उपाध्याय प्रवर श्री मनितप्रभसागरजी म. आदि ठाणा व पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. की पावन निश्रा में संपन्न हुआ। पारणा कराने पू. बहिन म. की शिष्या पू. साध्वी डॉ. श्री नीलांजनाश्रीजी म. आदि ठाणा पर्वत पाटिया कुशल दर्शन से पधारे।

ओली के उपलक्ष्य में ता. 19 अगस्त को दादा गुरुदेव महापूजन का आयोजन किया गया, जिसका लाभ श्रीमती सायरदेवी छगनलालजी देसाई परिवार धमाणा सूरत बालों ने लिया। पूज्य गणिवर्य श्री मेहूलप्रभसागरजी म. ने महापूजन की महत्ता समझाते हुए दादा गुरुदेव के उपकारों का वर्णन किया।

केयुप केएमपी व ज्ञान वाटिका का अधिवेशन।

पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में केयुप केएमपी का वार्षिक अधिवेशन सूरत पाल नगर में होने जा रहा है।

यह अधिवेशन सितम्बर महिने की 27 व 28 तारीख को दो दिवसीय संयुक्त रूप से होगा। ता. 29 सितम्बर रविवार को ज्ञान वाटिका का अधिवेशन होगा। तथा जिन्होंने परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है. उनका बहुमान किया जायेगा। यह ज्ञातव्य है कि ज्ञान वाटिका का संचालन पूरे भारत में हो रहा है। एक ही पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है तथा उनकी परीक्षाएं ली जाती है।

मुमुक्षु आरती बोथरा की भागवती दीक्षा 16 फरवरी को

बाडमेर निवासी श्री जोगेन्द्रजी सौ. मीनादेवी बोथरा की सुपुत्री मुमुक्षु सुश्री आरती बोथरा की भागवती दीक्षा बाडमेर नगर में कुशल वाटिका के विशाल प्रांगण में फाल्गुन वदि 4 रविवार ता. 16 फरवरी 2025 को संपन्न होगी। ता. 25 अगस्त को सुश्री आरती व उनके माता पिता ने पूज्य श्री से विनंती करते हुए भागवती दीक्षा का शुभ मुहुर्त प्रदान करने का व निश्रा प्रदान करने का निवेदन किया। परिवार की ओर से श्री जितेन्द्रजी बोथरा ने भावभीनी विनंती पूज्यश्री के सम्मुख प्रस्तुत की। बाद में मुमुक्षु आरती बोथरा ने अपने वक्तव्य में संयम की महिमा बताते हुए उपकारों का वर्णन किया। उन्होंने पूज्य मुनि श्री समयप्रभसागरजी म. के उपकारों का स्मरण किया। साथ ही पूजनीया बहिन म. के वात्सल्य का भावभीना स्मरण किया। अपने परिवार के प्रति कृतज्ञ होते हुए कहा उनके अनहद उपकार है। जो मुझे संयम की आज्ञा दी है। उसने पूज्यश्री से शीघ्र ही मुहूर्त की घोषणा करने का निवेदन किया।

पूज्यश्री ने उनकी विनंती स्वीकार करते हुए 16 फरवरी का शुभ मुहूर्त प्रदान किया। कुमारी आरती ने बी. कॉम तक का व्यावहारिक अध्ययन किया है। धार्मिक अध्ययन में सप्त स्मरण, चार प्रकरण, तीन भाष्य, तीन कर्मग्रन्थ तक का अध्ययन किया है। संस्कृत की पहली बुक का अभ्यास हो चुका है। मुहूर्त के अवसर पर मुमुक्षु के परिवार जन बाडमेर से बस लेकर आये थे।

कुमारी आरती पिछले दो वर्षों से पूजनीया बहिन म. डॉ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म.सा. के सानिध्य में संयम जीवन का अभ्यास कर रही है। इस अवसर पर मुमुक्षु आरती के माता पिता सौ. श्रीमती मीनादेवी व श्री जोगेन्द्रजी बोथरा का श्री कुशल कान्ति खरतरगच्छ जैन संघ द्वारा बहुमान किया गया। बाद में मुमुक्षु आरती बोधरा का संघ की ओर से बहुमान किया गया।

हैदराबाद सिकन्द्राबाद बोलारम कोरा सकल संघ की संयुक्त विनंती।

पूज्य गुरुदेव युग दिवाकर अवति तीर्थोद्धारक गुणायाजी तीर्थ जीणर्णोद्धार प्रेरक खरतरगच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. आदि के सानिध्य में हैदराबाद त्रयनगर से सकल जैन श्री संघ ता. 22 अगस्त को उपस्थित हुआ। इस प्रतिनिधि मंडल में दिगम्बर, श्वेताम्बर, स्थानकवासी, तेरापंथी, खरतरगच्छ, तपागच्छ, तीन थुई आदि सकल संघ शामिल हुआ।

कुलपाक तीर्थ के अध्यक्ष सुरेन्द्रजी बांठिया ने भाव व्यक्त करते हुए कहा कुलपाक तीर्थ की प्रतिष्ठा को 1400 वर्ष पूर्ण हुए हैं। उस उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्तर पर समारोह का विशेष आयोजन आपकी निश्रा में करना है। उस लक्ष्य से सन् 2026 का चातुर्मास हैदराबाद में करने की हमारी भावभरी विनंती है। ताकि समारोह को आपका संपूर्ण रूप से मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा- गुरुदेवश्री। यह चातुर्मास अनूठा होगा। इस चातुर्मास का आयोजन किसी एक संप्रदाय द्वारा नहीं होगा, अपितु सकल जैन संघ के बेनर तले यह चातुर्मास संपन्न होगा। पूरे देश में एकता का नया संदेश फैलेगा। पधारे हुए विभिन्न संघों के प्रतिनिधियों में दादावाडी ट्रस्ट के उपाध्यक्ष पन्नालालजी नाहटा, मंत्री बसन्तजी बाफना, कुलपाक तीर्थ के ट्रस्टी अमरचंदजी श्रीश्रीमाल, राजस्थानी मूर्तिपूजक संघ सिकन्द्राबाद के अध्यक्ष योगेशजी गांधी, मंत्री राजेन्द्रजी मुथा, ट्रस्टी प्रकाशचंदजी लूणिया, सुभाषजी गोलेच्छा, सुरेन्द्रजी छाजेड, महेन्द्रजी गोलेच्छा, कोठी संघ के मंत्री शीलकुमार जैन, गौतमचंदजी चौपडा, फीलखाना संघ के रमेशजी संखलेचा, बोलारम से गौतमचंदजी लोढा, चारकमान संघ के मंत्री प्रवीणजी नाहा, त्रिलोकजी झाबक, दिगम्बर समाज के पवनजी पांड्या, मलकपेट संघ के पारसजी दोसी, तेरापंथ समाज के विनोदजी संचेती, जीतो हैदराबाद के गौतमजी सहलोत, नवीनजी कावडिया आदि सभी समुदायों के प्रतिनिधियों ने पूज्यश्री से चातुर्मास की भावभरी विनंती की। पूज्यश्री ने फरमाया कुलपाकजी तीर्थ से हमारी परम्परा का पुराना संबंध है। पूज्य गुरुदेव आचार्य भगवंत श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में यहाँ श्री शांतिनाथ मंदिर व दादावाडी की प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी।

महामंगलकारी उपधान तप कराया था। पिछले काफी समय से ट्रस्ट मंडल आ रहा है। कुलपाकजी के महोत्सव हेतु चर्चा विचारणा हुई है। उन्होंने जैन समाज की एकता के वातावरण की अनुमोदना करते हुए श्रमण-मर्यादा में रहते हुए आश्वासन प्रदान किया। पूज्यश्री के भावों को सुनकर सकल श्री संघ में परम आनंद का वातावरण छा गया।

सूरि मंत्र साधना का प्रारंभ 4 अक्टूबर से

परम पूज्य गुरुदेव प्रज्ञापुरुष आचार्य प्रवर श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य पूज्य गुरुदेव युगदिवाकर अवत्ति तीर्थोद्धारक खरतरगच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा का चातुर्मास सूरत पाल में श्री कुशल कान्ति खरतरगच्छ जैन संघ के तत्वावधान में परम उल्लास के साथ ऐतिहासिक रूप से चल रहा है। इस वर्ष वे दूसरी पारी की पांचवीं पीठिका की साधना करेंगे। संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाशजी मंडोवरा ने बताया- इस पीठिका का प्रारंभ ता. 4 अक्टूबर 2024 से होगा। इस पीठिका का समापन 20 अक्टूबर 2024 को महामांगलिक के साथ संपन्न होगा। जबकि ता. 19 अक्टूबर को महापूजन होगा।

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