रायपुर - तप से होती है कर्मो की निर्जरा, आहार का राग तोड़ना ही अपने आप में तपस्या है, सभी तरह के पाप का कारण हमारी इंद्रियाँ है, हमें अपनी इन्द्रियो पर विजय प्राप्त करना होगा, हमें अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण पाना बहुत आवश्यक है, इन्द्रियों पर विजय पाना ही एक महान् तप का आरंभ है, तप से आत्मा कुन्दन की तरह निखरती है, और उसपे लगे सूक्ष्म कर्मो का क्षय होता है।
तपस्वी भाई विजय संचेती ने रायपुर नगर के दादाबाडी़ विराजित तप चक्रवर्ती प.पु. श्री विराग मुनिजी म.सा. से विवेकानंद नगर विराजित प.पु. श्री तीर्थ विजय जी म.सा. से एवं देवकर स्थित उप प्रवर्तक प.पु. श्री डाँ सतीश मुनिजी म.सा. आदि ठाणा 4 से प्रत्याखान, आशीर्वाद एवं मंगलपाठ श्रवण किया। पुजारी पार्क विराजित घोर तपस्वी महात्मा, आडा़ आसन त्यागी, सूर्य आतापनाधारी, महास्थिवर, मौन साधक, प.पु. श्री शीतल मुनिजी म.सा. के मुखारबिंद से आज तपस्वी भाई विजय संचेती 31वें मासक्षमण के 31 वें उपवास का प्रत्याखाण लिया।
तपस्वी भाई विजय संचेती पिछले 30 वर्षो से आप सिर्फ गर्म जल के आधार पर 31 दिन का उपवास (मासक्षमण) की तपस्या कर रहें है। यह आपका 31 वाँ मासक्षमण है। आप सभी तपस्वीयों की तपस्या निर्विघ्न संपन्न हो ऐसी वीर प्रभु से मंगल कामना करते है। आज संघ की ओर से संपूर्ण चार्तुमास के लाभार्थी भाई श्री दिपेश जी संचेती, प्रियंका संचेती, अध्यक्ष सुरेशजी सिंगवी मोहनी बाई बागरेचा रीता संचेती ने तपस्वी भाई विजय जी संचेती का माला पहनाकर प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।