दुर्ग - जैन धर्म के महान पर्व पर्युषण के दृतीय दिवस तेरापंथ धर्मसंघ के युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की विद्वान शिष्या प्रवक्ता उपासिका श्रीमती भाग्यवती कच्छारा ने परंपरानुसार आगम के वाचन से धर्मप्रेमियों को तृप्त करते हुए जैन इतिहास की उल्लेखनीय घटनाओं का वर्णन किया।
स्वाध्याय की महिमा बताते हुए उपासिका श्रीमती हेमलता कोठारी ने कहा की स्व का अध्यन स्वाध्याय है, स्वयं को जानने - पहचानने - बदलने का उपक्रम है - स्वाध्याय। स्वाध्याय से ज्ञानावरणीय कर्मों का क्षय होता है ,अज्ञानता दूर होती है, कर्मों की निर्जरा का उपाय है स्वाध्याय। साथ ही आपने स्वाध्याय करने की प्रेरणा प्रदान की।
सभाध्यक्ष संजय चौपड़ा एवं श्रीमती नीता बरमेचा ने उपासिका द्वय का परिचय दिया। श्रीमती सूरज बरमेचा एवं ग्रुप ने स्वागत गीतिका का गायन किया। ऋषभ बरमेचा ने स्वाध्याय दिवस की गीतिका का संगान किया। श्रावक - श्राविकाओं की समृद्ध उपस्थिति रही। संचालन दिलीप बरमेचा ने किया।
श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, दुर्ग [ छ. ग.]
02 सितंबर 2024
दिलीप जैन बरमेचा 9425562722