रायपुर - आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए रविवार को साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने कहा कि जीवन में किए गए अच्छे और बुरे कर्म ही हमारे पाप और पुण्य का आधार बनते हैं। राग और द्वेष हमारे भीतर कब पैदा हो जाते हैं, इसका कई बार हमें पता भी नहीं चलता, लेकिन कर्म सत्ता हमारे प्रत्येक कर्म का राई-राई और पाई-पाई का हिसाब रखती है।
साध्वीश्री ने कहा कि जब तक व्यक्ति को सही ज्ञान प्राप्त नहीं होगा, तब तक वह मोह का त्याग नहीं कर सकता। यदि मोक्ष प्राप्त करना है तो मोह से दूर होना ही पड़ेगा। ज्ञान की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ना होगा। पूर्णता प्राप्त करने के लिए भीतर मग्नता जरूरी है, मग्नता के लिए स्थिरता चाहिए और स्थिरता तभी आएगी जब व्यक्ति मोह का त्याग करेगा।
उन्होंने कहा कि मनुष्य संसार में हर चीज को पूर्ण रूप से पाना चाहता है, जबकि संसार की कोई भी वस्तु पूर्ण नहीं है। संसार में जो कुछ भी मिलता है, वह किसी न किसी रूप में अधूरा है। इसके बावजूद व्यक्ति सांसारिक वस्तुओं में पूर्णता तलाशता रहता है। साध्वीश्री ने कहा कि धर्म के क्षेत्र में मिलने वाला ज्ञान और आत्मिक अनुभव ही व्यक्ति को वास्तविक पूर्णता की ओर ले जाता है।
साध्वीश्री ने कहा कि व्यक्ति को संसार की अधूरी वस्तुओं के पीछे भागने के बजाय ज्ञान, संयम और आत्मसाधना की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। ज्ञान की साधना करते-करते जब व्यक्ति कैवल्य ज्ञान की अवस्था को प्राप्त करता है, तब उसके लिए जानने और पाने को कुछ भी शेष नहीं रहता।
इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदसमुघा, राजेंद्र गोलछा एवं उज्ज्वल झाबक तथा आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष, महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
खेल के साथ संस्कार और सीख का हुआ संगम।
आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं आयोजन समिति की ओर से दादाबाड़ी परिसर में आयोजित संस्कारम शिविर में बच्चों के लिए विशेष गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों को रूबिक क्यूब सिखाया गया। इसके लिए रूबिक क्यूब की विशेष टीम ने बच्चों को प्रशिक्षण दिया।
शिविर में बच्चों ने उत्साह के साथ रूबिक क्यूब सीखने में भाग लिया। खेल और मनोरंजन के माध्यम से बच्चों में एकाग्रता, धैर्य, रचनात्मक सोच और समस्या का समाधान करने की क्षमता विकसित करने का प्रयास किया गया।
समिति ने बताया कि संस्कारम शिविर का उद्देश्य बच्चों को धर्म और जैन संस्कारों से जोड़ने के साथ उनके व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान देना है। शिविर में खेलों के माध्यम से संस्कार, प्रेरणादायक कहानियां और विभिन्न शिक्षाप्रद गतिविधियां आयोजित की गईं। प्रतिभागी बच्चों के लिए आकर्षक एवं उपयोगी उपहार भी रखे गए।
यह आयोजन परम पूज्य कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणा श्रीजी म.सा. की सुशिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका श्री मंजुला श्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा एवं प्रेरणा में आयोजित किया जा रहा है।
श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति की ओर से बताया गया कि संस्कारम शिविर के माध्यम से बच्चों में धर्म, संस्कार, अनुशासन, रचनात्मकता और आत्मविश्वास के गुण विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। शिविर में बच्चों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।