बिलासपुर (वैशाली नगर) - पर्युषन पर्वाराधना के चौथे दिन वाणी संयम के दिन उपासिका बहनों ने प्रातः कालीन प्रवचन के दौरान वाणी संयम के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि हमें
1-सत्य वचन बोलना चाहिए लेकिन ऐसा सत्य वचन भी नहीं बोलना चाहिए जो किसी को अप्रिय लगे ।कहा गया है कि सत्यम् ब्रुयात प्रियं ब्रुयात मा
2-बिना बोले नहीं बोलना चाहिए
जितना जरूरी हो उतना ही बोलना चाहिए कम से कम शब्दों में अपनी बात कह देनी चाहिए। जो कम बोलता है उसकी मानसिक शक्ति बढ़ती है।
3- बिना पूछे नहीं बोलना चाहिए दो व्यक्ति बात करें तो बीच में नहीं बोलना चाहिए
4-ऐसे वचन नहीं बोलने चाहिए जो किसी को अप्रिय लगे या किसी के दिल को चोट पहुंचाएं । उन्होंने कहा की वाणी संयम का मतलब सिर्फ मौन रखना नहीं है बल्कि हमें कैसे, कहां, कितना व कब बोलना चाहिए इसका विवेक रखना जरूरी है।
भगवान पारसनाथ के पूर्व भाव के बारे में बताया गया कि कैसे भगवान पार्श्वनाथ के जीव और उनके भाई कमठ के बीच में बैर का अनुबंध बंधा और जो आगे जन्मों जन्मों तक चला। भगवान महावीर के जीवन के बारे में बताते हुए भगवान महावीर के जन्म और बाल्य काल के बारे में बताया गया था ।सामायियक दिवस के दिन कल यहां सामायिक की पचरंगी कराई गई।
सायंकालीन प्रतिक्रमण का समय 6:30 से 7.30 है और उसके बाद में 8:30 से प्रतिदिन प्रवचन भी होता है। जिसमें जैन धर्म के प्रभावक आचार्यो की जीवनी का वांचन होता है।