कवर्धा 06/05/25 - डोंडी लोहारा की मुमुक्षु साक्षी भंसाली का जैन श्री संघ कवर्धा के तत्वावधान में गत दिनों भावभीना अभिनंदन जैन स्थानक भवन कवर्धा में किया गया। समता संस्कार पाठशाला के बच्चों, समता महिला मंडल एवम शांति विजय बहू मंडल द्वारा स्वागत गीत समूह गान के रूप में प्रस्तुत किया गया। मुमुक्षु साक्षी की दीक्षा 4 जून 2025 को शास्त्रज्ञ, तपस्वी, परमागम रहस्य ज्ञाता पूज्य आचार्य प्रवर 1008 श्री रामलाल जी मसा के मुखारविंद से बीकानेर (राजस्थान) में होना संभावित है। दीक्षार्थी के साथ वीर भ्राता - भाभी श्री रजत - जूही भंसाली एवम दिव्या भंसाली का भी कवर्धा पदार्पण हुआ।

स्थानक में आयोजित अभिनंदन सभा में बैरागन बहन साक्षी को उनके सफल संयमी जीवन के लिए साधुमार्गी जैन महिला समिति अध्यक्ष श्रीमति लता बोथरा, सकल जैन संघ अध्यक्ष श्री नेमीचंद श्रीश्रीमाल, श्वेतांबर जैन मूर्ति पूजक संघ अध्यक्ष श्री अजय टाटिया, पूर्व अध्यक्ष श्री खुशाल टाटिया, वीर पिता श्री गुलाबचंद श्री श्रीमाल, श्रीमती सेजल कटारिया, सुश्री अदिति श्रीश्रीमाल, श्री पलाश टाटिया, श्री गेन्दमल मोदी, श्री दिनेश श्रीश्रीमाल आदि ने अपने उदगार व्यक्त करते हुए शुभकामनाएं दी। सकल जैन श्री संघ कवर्धा एवं टाटिया परिवार की ओर से भेंट किए गए अभिनंदन पत्र का वाचन युवा रत्न पलाश टाटिया ने किया। अभिनंदन के दरमियान श्रावक - श्राविकाओ के भक्ति गीतों की स्वर लहरियों ने ऐसा समां बांधा की लोग हर्ष एवं खुशी से झूम उठे। मुमुक्षु बहन साक्षी भंसाली ने अपने मनोभाव व्यक्त करते हुए कहा कि अमूमन भौतिक सुख की चाहत सभी को हुआ करती है। पुण्य एवं मोक्ष की कामना रखने वाले चंद भव्य भाग्यवान ही हुआ करते हैं। वस्तुत: सच्चा शाश्वत सुख यही है। "भगवान मुझे बनाना परमात्मा" स्तवन गायन करते हुए उन्होंने कहा कि आपने जो मेरा अभी बहुमान किया है इसे मैं गुरु चरणों में समर्पित करती हूं। जिनके कुशल मार्गदर्शन में परम लक्ष्य (मोक्ष) की राही बन सकूंगी। मुमुक्षु साक्षी ने सभी से क्षमा याचना कर दीक्षा प्रसंग पर पधार कर आशीर्वाद देने का अनुरोध कर मंगल पाठ श्रवण कराया। स्वागत के साथ समाज बांधवों द्वारा गोद भराई रस्म को श्रद्धा पूर्वक संपन्न कराया गया।
जैन श्री संघ कवर्धा के महामंत्री श्री अतुल देशलहरा एवं जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ पूर्व अध्यक्ष श्री खुशाल टाटिया की अपील से कार्यक्रम में उल्लेखनीय उपस्थिति देखी गई।