October 25, 2025


कैश लैस उपचार सिस्टम लागू करने की मांग, वर्तमान प्रक्रिया पेचीदा, राशि के लिए चक्कर काटते कई लोगों की हो जाती है मौत।

पंडरिया - छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कर्मचारियों को उपचार के लिए कैशलेश सुविधा नहीं दिया जा रहा है, जबकि कई राज्य शासन ने कैशलेश व्यवस्था लागू कर दी है। शासन द्वारा कर्मचारी व उनके परिवार को उपचार के लिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति राशि भुगतान उपचार के बाद किया जाता है। इससे पूर्व उन्हें स्वयं के व्यय से उपचार कराना होता है। प्रक्रिया जटिल व कई स्तर में होने के कारण इसका लाभ कर्मचारियों को नहीं मिल पाता है।लाभ विलम्ब से होता है या पूरा नहीं मिल पाता है।

शालेय शिक्षक संघ व तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ पंडरिया के ब्लाक अध्यक्ष मोहन राजपूत ने शासन से कैश- लैस उपचार की सुविधा प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कर्मचारियों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति राशि उपचार के पश्चात दी जाती है। जिसका पूरा लाभ बीमार कर्मचारी को नहीं मिल पाता है। बीमार होने के समय उपचार के लिए पर्याप्त राशि नहीं होती है, जिसके चलते कर्मचारियों को बाहर से उधार लेकर उपचार कराना पड़ता है, अथवा उपचार के लिए पैसे नहीं होने के कारण कई कर्मचारियों की मृत्यु हो जाती है। शासन द्वारा आखिरकार कर्मचारियों को प्रतिपूर्ति राशि प्रदान की जाती है, यदि शासन द्वारा कर्मचारियों को अस्पताल में कैश-लैस सुविधा प्रदान कर दी जाएगी तो कर्मचारियों को समय रहते उपचार कराने की सुविधा मिल जाएगी।कर्मचारी को कैशलेश उपचार की व्यवस्था होने पर उनका सही समय के उपचार हो सकेगा।

वर्तमान प्रक्रिया जटिल - शासन द्वारा वर्तमान में कर्मचारियों को दी जा रही प्रतिपूर्ति राशि की प्रक्रिया जटिल है। पैसे मिलते तक सालों बित जाते हैं। वहीं राशि का इंतजार करते कई कर्मचारी दुनिया छोड़ देते हैं। बीमार कर्मचारी को संबंधित हॉस्पिटल से निर्धारित प्रपत्र में जानकारी व बिल जमा करना होता है, जो जिला चिकित्सालय या संचनालय भेजा जाता है। जिसके पश्चात सीएमएचओ व अन्य अधिकारियों से जांच कर पुनः स्थानीय कार्यालय को भेजा जाता है। जहां से शासन को मांग पत्र भेजा जाता है। जिसके लिए आबंटन मिलने पर पुनः स्थानीय कार्यालय व विभाग से कोषालय भेजा जाता है। तत्पश्चात कर्मचारियों के खाते में राशि ट्रांसफर किया जाता है। इस प्रक्रिया में 4 से 6 महीने का समय लग जाता है। इन सबके बावजूद बीमार कर्मचारियों को संबंधित कार्यालय में रिश्वत भी देनी पड़ सकती है।

श्री राजपूत ने बताया कि यह प्रक्रिया अधिक जटिल है, जबकि बीमार कर्मचारी को तत्काल पैसे की जरूरत होती है। शासन को कैश-लैस सुविधा दिया जाना चाहिए जिससे तत्काल उपचार कराया जा सके।


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