April 22, 2026


विश्व पृथ्वी दिवस पर मनोहर गौशाला का संदेश, 12 साल से तालाब-जंगल बनाकर धरती संरक्षण की मिसाल

गौसेवा, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संतुलन को जोड़ा; फसल अमृत और ऑर्गेनिक गोल्ड से किसानों को नया रास्ता।

रायपुर - विश्व पृथ्वी दिवस पर खैरागढ़ की मनोहर गौशाला ने पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश दिया। गौशाला पिछले 12 वर्षों से तालाब और जंगल निर्माण कर धरती को बचाने की अनूठी पहल कर रही है। यहां गौसेवा के साथ प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और जैविक उत्पादों के जरिए किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का काम भी हो रहा है। गौशाला का कहना है कि धरती को बचाना केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी है।

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मनोहर गौशाला ने पर्यावरण संरक्षण को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाया है। यहां पिछले एक दशक से अधिक समय में तालाब निर्माण और हरित क्षेत्र विकसित कर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है। गौशाला में तैयार किए गए “फसल अमृत” और “मनोहर ऑर्गेनिक गोल्ड” जैसे उत्पाद खेती को रसायन मुक्त बनाने में मदद कर रहे हैं। संस्था का फोकस सिर्फ गौसेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि जल बचाने, पेड़ लगाने और किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है। गौशाला के सदस्य इसे सेवा नहीं, बल्कि धरती के प्रति कर्तव्य मानते हैं।

धरती और किसान दोनों को फायदा

मनोहर गौशाला की पहल से आसपास के क्षेत्रों में खेती का तरीका बदल रहा है। किसान धीरे-धीरे रासायनिक खाद छोड़कर जैविक विकल्प अपना रहे हैं। तालाब और हरित क्षेत्र से जल स्तर में सुधार और तापमान संतुलन में भी मदद मिल रही है। इससे खेती की लागत घट रही है और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हो रही है। यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक व्यवहारिक उदाहरण बन रहा है।

आप भी ऐसे जुड़ सकते हैं अभियान से

पृथ्वी दिवस पर गौशाला ने लोगों से छोटे-छोटे कदम उठाने की अपील की है। हर व्यक्ति साल में कम से कम एक पेड़ लगाए, पानी बचाए और जैविक उत्पादों को अपनाए। घरों में किचन वेस्ट से खाद बनाना भी एक आसान शुरुआत हो सकती है। गौ आधारित जीवनशैली और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण बनाया जा सकता है।

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