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विचक्षण जैन विद्यापीठ में बालमुनि हंसभद्रजी द्वारा शतावधान का अद्भुत प्रदर्शन।

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विद्यार्थियों ने देखा स्मरण शक्ति का विलक्षण उदाहरण।

कुम्हारी - विचक्षण जैन विद्यापीठ के प्रज्ञायतन हॉल में विद्यार्थियों के समक्ष आयोजित शतावधान का अद्भुत एवं प्रेरणादायी प्रदर्शन सभी के लिए अविस्मरणीय रहा। इस अवसर पर परमपूज्य आचार्य श्री जिनचंद्रसुरिश्वरजी महाराज, भीष्म तपस्वी श्री विराग मुनिजी, नेपाल केसरी मणिभद्रसूरिजी, निपुणा मंडल की साध्वीवृंद, विद्यापीठ ट्रस्ट के सदस्य, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था के अध्यक्ष श्री राजेश सावनसुखा ने गुरु भगवंतों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए अतिथियों को विचक्षण जैन विद्यापीठ की गतिविधियों एवं उद्देश्यों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आज के समय में कठोर तप, साधना और आत्मानुशासन के माध्यम से सहस्त्रावधान जैसी विलक्षण स्मरण क्षमता विकसित करने वाले साधक अत्यंत विरले हैं। शतावधान कोई चमत्कार नहीं, बल्कि जैन परंपरा में ज्ञान, ध्यान और आत्मशक्ति के विकास का सजीव प्रयोग है। प्रत्येक आत्मा में असीम संभावनाएँ निहित हैं, जिन्हें उचित साधना, एकाग्रता और संकल्प के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। विद्यार्थियों के लिए यह अवसर गुरु भगवंतों की सरलता, नम्रता, अनुशासन और आत्मबल से प्रेरणा लेने का एक अनुपम अवसर रहा।

प्रख्यात वक्ता श्री महेन्द्र मुकीम के प्रभावी संचालन में आयोजित इस प्रयोग में विद्यार्थियों ने 20 विभिन्न श्रेणियों में पाँच-पाँच नाम अथवा वस्तुएँ बताईं, जिससे कुल 100 शब्दों का संकलन तैयार हुआ। इसके पश्चात बालमुनि हंसभद्रजी ने मात्र 2 मिनट 38 सेकंड में सभी 100 नाम क्रमवार सुनाकर उपस्थित जनों को आश्चर्यचकित कर दिया। उन्होंने समान समय में सभी नाम उल्टे क्रम में भी सुनाए तथा बीच में किसी भी क्रमांक का नाम पूछे जाने पर तत्काल सटीक उत्तर दिया।

बालमुनि के इस अद्भुत स्मरण, एकाग्रता और आत्मशक्ति आधारित प्रदर्शन ने विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि नियमित साधना, अनुशासन और अभ्यास से मानवीय चेतना एवं स्मरण शक्ति का असाधारण विकास संभव है।

कार्यक्रम के दौरान परमपूज्य विराग मुनि जी महाराज साहब ने विद्यार्थियों को अवधान की अवधारणा, मस्तिष्क को केंद्रित करने की विधि तथा उसके व्यावहारिक प्रयोग के बारे में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बच्चों को एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाने के उपयोगी सूत्र भी प्रदान किए।

इस अवसर पर विद्यापीठ ट्रस्ट से श्री संपत्त झाबक, श्री विजयमालु, श्री सुनील गोलछा, श्री नरेश बूरड, श्रीमती सुनीता लूनिया, कोर कमेटी के सदस्य, प्राचार्य श्री ए.पी. सिंह, शिक्षकगण एवं अभिभावक उपस्थित रहे। उपस्थित सभी जनों ने इस विलक्षण प्रस्तुति की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं जीवनोपयोगी अनुभव बताया।

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