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चरोदा में मनाई गई पूज्य गुरुदेव रत्नमुनि जी म.सा. की 78वीं दीक्षा जयंती, गुणानुवाद सभा में श्रद्धालुओं ने किया स्मरण।

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चरोदा - श्री मंगल साधना केंद्र, मंगलम चरोदा में शुक्रवार को पूज्य गुरुदेव श्री रत्नमुनि जी महाराज साहब की 78वीं दीक्षा जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ गुणानुवाद सभा के रूप में मनाई गई। कार्यक्रम नेपाल केसरी, मानव मिलन संस्थापक डॉ. श्री मणिभद्र मुनि जी महाराज साहब (ठाणा-3) के सान्निध्य में आयोजित हुआ। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के विभिन्न जैन संघों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर गुरुदेव के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया।

सभा में वक्ताओं ने पूज्य गुरुदेव रत्नमुनि जी महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने मात्र 13 वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण की थी। उनका दीक्षा जीवन लगभग 76 वर्षों तक धर्म प्रभावना, संयम और साधना को समर्पित रहा। जब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ एक ही राज्य थे, उस समय उनका पहला चातुर्मास दुर्ग श्रीसंघ में हुआ था। इसके बाद उन्होंने गांव-गांव, गली-गली और शहर-शहर निरंतर विहार कर जैन धर्म का व्यापक प्रचार-प्रसार किया।

वक्ताओं ने बताया कि धर्म प्रभावना में उनके अतुलनीय योगदान के लिए विभिन्न जैन संघों ने उन्हें विदर्भ केसरी, लोकमान्य संत, वाणीभूषण, छत्तीसगढ़ प्रवर्तक, परम स्थविर और नवकार साधक जैसी सम्मानित उपाधियों से अलंकृत किया। श्रद्धालुओं के बीच वे 'भोले बाबा' और 'छत्तीसगढ़ के भगवान' के नाम से भी लोकप्रिय रहे।

गुरुदेव ने अपने साधना काल में साजा, बीजा, कवर्धा, डौंडी-लोहारा, दुर्ग, रायपुर, शेषपुर-लोहारा, भिलाई-3, नेहरू नगर सहित प्रदेश के अनेक स्थानों पर चातुर्मास कर हजारों लोगों को धर्म, संयम और सदाचार का संदेश दिया।

सभा में उनके 31 दिसंबर 2022 को हुए देवलोकगमन का भी भावपूर्ण स्मरण किया गया। 90 वर्ष की आयु में अस्वस्थता के कारण दुर्ग स्थित श्री आनंद रत्न मधुकर भवन, बांधा तालाब में उनका देवलोकगमन हुआ था। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर श्री मंगल साधना केंद्र, मंगलम चारोदा लाया गया, जहां अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।

दीक्षा जयंती समारोह में भिलाई, दुर्ग, अहीवारा, चरोदा, नेहरू नगर, रायपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए जैन समाज के प्रतिनिधियों ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए और गुरुदेव के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने छत्तीसगढ़ प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री रत्नमुनि जी महाराज के जयघोष के साथ सभा का समापन किया।

कार्यक्रम के पश्चात श्री मंगल साधना केंद्र मंगलम ट्रस्ट की ओर से उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई।

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