रायपुर - आज श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड में 22 जुलाई अष्टान्हिका पर्व के द्वितीय दिवस आषाढ़ शुक्ल नवमी दिन बुधवार को मुनि 108 श्री पुनीत सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में मूलनायक भगवान के समक्ष श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा का आयोजन किया गया। श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर के अध्यक्ष श्री संजय नायक जैन ने बताया कि आज मुनि 108 श्री पुनीत सागर महाराज के मुखारविन्द से वाचन की गई शांति धारा करने का सौभाग्य श्री दिलीप निकुंज जैन परिवार गुढ़ियारी वालों को प्राप्त हुआ। आज नवधा भक्ति के साथ मुनि संघ को आहार देने का सौभाग्य अनुराग जैन परिवार,श्री संजय नायक जैन परिवार,श्री बंशी लाल जी जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
आज मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज की मंगल देशना (प्रवचन) में मुनि श्री ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व वर्ष में 3 बार (आषाढ़, कार्तिक और फाल्गुन) आता है, जिसे स्वर्गलोक के देवगण में नंदीश्वर द्वीप में बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं। यह पर्व ऋतु परिवर्तन (ठंड, गर्मी, बरसात) के संधि काल में आता है। जब मौसम बदलता है, तो शरीर में स्वास्थ्य संबंधी विषमताएँ आती हैं। अष्टान्हिका पर्व में उपवास और तप करने से न केवल आत्म-कल्याण होता है, बल्कि आने वाले 4 महीनों के लिए हमारा शरीर पूर्णतः स्वस्थ और ऊर्जावान हो जाता है।
भगवान महावीर या अन्य तीर्थंकर कोई जन्मजात भगवान नहीं थे, वे "पतित से पावन" बने हैं। यदि वे अपनी आत्मा का कल्याण कर भगवान बन सकते हैं, तो चातुर्मास और पर्वों का सही लाभ उठाकर आप भी भगवान बन सकते हैं।
स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने जैन धर्म की संगठनात्मक शक्ति को गहराई से समझा था। उन्होंने देखा कि जैन समाज इन 8 दिनों के पर्वों में कैसे एक साथ मिलकर धर्म-साधना करता है। इसी एकता की प्रेरणा से उन्होंने भारत को एकजुट करने के लिए सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अग्नि का धर्म उष्णता है, पानी का धर्म शीतलता है, और वायु का वेग है —ठीक उसी प्रकार जीव (आत्मा) का भी अपना मूल धर्म है। अपने इस आत्म-धर्म को समझकर ही हम मंदिर आते हैं, अभिषेक, पूजन और बीजाक्षर मंत्रों का जाप करते हैं, जिससे हमारे मस्तिष्क और विचारों में पवित्रता आती है।
अष्टान्हिका पर्व यह 8 दिन केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि परमार्थ और आत्म-साधना का सबसे उत्तम अवसर हैं। आप सभी इस पावन अवसर पर तप, संयम और स्वाध्याय अपनाकर अपने जीवन को सार्थक बनाएं।
सूचनादाता - प्रणीत जैन (मीडिया प्रभारी)
श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड, रायपुर