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मनुष्य जीवन को धर्म, सेवा और सदाचार से बनाएं सार्थक : सिद्धांत ज्योति जी म.सा.

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रायपुर - श्री विमलनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट, एवं अद्भुत अनुपम आध्यात्मिक चातुर्मास समिति के तत्वावधान में गुरुवार को आयोजित चातुर्मास व्याख्यान में साध्वी भगवंत पूज्या सिद्धांत ज्योति जी म.सा. ने मानव जीवन की दुर्लभता, धर्म साधना और आत्मकल्याण के महत्व पर प्रेरणादायी प्रवचन दिया।

अपने उद्बोधन में पूज्या सिद्धांत ज्योति जी म.सा. ने कहा कि जिस प्रकार कोई अज्ञानी व्यक्ति चिंतामणि रत्न को साधारण पत्थर समझकर त्याग देता है, उसी प्रकार अनेक लोग दुर्लभ मनुष्य जीवन का महत्व समझे बिना उसे केवल खाने-पीने, सोने और आपसी विवादों में व्यर्थ गंवा देते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य भव अनंत पुण्यों के प्रतिफलस्वरूप प्राप्त होता है और इसका उद्देश्य धर्म साधना, सेवा, सदाचार, आत्मचिंतन तथा आत्मकल्याण करने के लिए है।

उन्होंने कहा कि चातुर्मास आत्मपरिवर्तन, स्वाध्याय, तप, त्याग और आध्यात्मिक उन्नति का स्वर्णिम अवसर है। इस काल में यदि व्यक्ति अपने विचार, व्यवहार और आचरण को धर्ममय बनाता है, तो उसका जीवन सफल, सार्थक एवं कल्याणकारी बन सकता है।


पूज्या सिद्धांत ज्योति जी म.सा. ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे ज्ञान, दर्शन एवं चारित्र रूपी त्रिरत्न की आराधना करते हुए अपने जीवन को धर्ममय बनाएं तथा सेवा, करुणा, संयम और सदाचार जैसे मानवीय मूल्यों को अपनाकर समाज में सकारात्मक वातावरण के निर्माण में अपनी सहभागिता निभाएं।

व्याख्यान के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने धर्म आराधना तथा आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर रहने का संकल्प लिया।

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