रायपुर - श्री विमलनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट, अद्भुत अनुपम आध्यात्मिक चातुर्मास समिति के तत्वावधान में सोमवार को चातुर्मास व्याख्यान के दौरान भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के पावन अवसर पर विशेष प्रवचन एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
परम पूज्य सिद्धांत ज्योति जी म.सा. ने बताया कि त्रिशला माता ने जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को जन्म दिया था। उन्होंने कहा कि जिस समय प्रभु का जन्म हुआ, उस समय प्रकृति भी आनंदित हो उठी थी। कोयलें चहक रही थीं, शीतल पवन बह रही थी और पौधे खिलखिलाकर लहरा रहे थे। संपूर्ण वातावरण में हर्ष और उल्लास का माहौल व्याप्त था।
कार्यक्रम की शुरुआत भक्ति गीत के साथ हुई। प्रवचन से पूर्व सिमंधर महिला मंडल द्वारा मारा साहब का मंगल उद्बोधन प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात भैरव बालिका मंडल की बालिकाओं ने मंगलाचरण एवं नृत्य की अत्यंत मनोहारी एवं भव्य प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर च्यवन कल्याणक की गाथा का गायन किया गया तथा अरिहंत वंदनावली का सामूहिक गान हुआ।
परम पूज्य सिद्धांत ज्योति जी म.सा. ने अपने प्रवचन में बताया कि प्रभु को जन्म से पूर्व तीन ज्ञान - मति ज्ञान, श्रुत ज्ञान और अवधि ज्ञान प्राप्त होते हैं। जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हुए हैं, जिनमें भगवान महावीर का नाम सबसे अधिक प्रसिद्ध और पूजनीय है। परमात्मा को यह गौरव उनके पांच कल्याणकों - च्यवन, जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान और निर्वाण कल्याणक के कारण प्राप्त हुआ।
प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान के शुभ जन्म की कथा सुनकर आनंद मनाया। म.सा. द्वारा परमात्मा के जन्म का वर्णन सुनकर सभी भाव-विभोर हो गए और खुशियों का माहौल बन गया। अंत में सभी ने भगवान महावीर के जन्म कल्याणक पर भक्ति गीतों के साथ उल्लासपूर्वक सहभागिता की।