रायपुर - आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशलसूरि जैन दादाबाड़ी में आयोजित प्रवचन में पूज्य साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने अध्यात्म सार ग्रंथ का पाठ करते हुए कहा कि पहले की और आज की संतानों में काफी अंतर दिखाई देता है। वर्तमान समय में अधिकांश माता-पिता के मन में यह चिंता बनी रहती है कि उनका बुढ़ापा बच्चों के साथ किस प्रकार बीतेगा। उन्होंने कहा कि संतान ही परिवार की सबसे बड़ी संपत्ति भी होती है और यदि उसमें संस्कारों का अभाव हो तो वही सबसे बड़ी विपत्ति का कारण भी बन सकती है।
साध्वीश्री ने कहा कि सांसारिक जीवन में अनेक प्रकार की आशंकाएं और भय मनुष्य को घेरते रहते हैं। इसके विपरीत साधु जीवन में प्रवेश करने के बाद ऐसी अधिकांश चिंताएं समाप्त हो जाती हैं, क्योंकि साधु-संत प्रकृति के अनुरूप जीवन जीते हैं और उसके नियमों का पालन करते हैं।
उन्होंने कहा कि साधु-संत व्यक्तिगत चिंताओं में नहीं उलझते, बल्कि समाज की समस्याओं और जीवन मूल्यों पर चर्चा कर लोगों को सही मार्ग दिखाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य जन-जन तक धर्म, संयम और आत्मकल्याण का संदेश पहुंचाना होता है।
प्रवचन के अंत में साध्वी मंजुलाश्रीजी ने कहा कि साधु समुदाय का लक्ष्य अत्यंत ऊंचा होता है। वे अपने संपूर्ण पुरुषार्थ और साधना के माध्यम से स्वयं को परमात्मा से जोड़ने का निरंतर प्रयास करते हैं। यही साधना और आत्मअनुशासन मनुष्य के जीवन को भी श्रेष्ठ और सार्थक बना सकता है।
संस्कारों की यात्रा से बच्चों में धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों का होगा विकास।
आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत बच्चों में धार्मिक संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के विकास के उद्देश्य से "संस्कारों का शंखनाद – संस्कार यात्रा" अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत बच्चों को विशेष संस्कार यात्रा कार्ड प्रदान किए जा रहे हैं, जिनमें प्रतिदिन किए जाने वाले धार्मिक एवं सदाचार संबंधी कार्यों का विवरण दर्ज किया जाएगा।
संस्कार यात्रा कार्ड में बच्चों को प्रतिदिन भगवान के दर्शन, पूजा, नवकारसी, प्रवचन श्रवण, गुरु वंदन, सामायिक, प्रतिक्रमण, नवकार मंत्र का जाप, बड़ों के चरण स्पर्श, उबला हुआ पानी पीना तथा विभिन्न धार्मिक नियमों के पालन के लिए प्रेरित किया गया है। इसके साथ ही होटल का भोजन, जमीकंद, जंक फूड, फिल्में देखने और अन्य अनुचित आदतों से दूर रहने जैसे संकल्प भी शामिल किए गए हैं। प्रत्येक नियम के लिए अंक निर्धारित किए गए हैं, जिनके आधार पर बच्चों का मूल्यांकन होगा।
कार्ड में प्रतिदिन किए गए कार्यों पर माता-पिता हस्ताक्षर करेंगे। सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाले बच्चों को विशेष पुरस्कार दिए जाएंगे, वहीं सभी प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया जाएगा। कार्ड 31 दिनों तक मान्य रहेगा तथा इसे साफ-सुथरा रखने और ईमानदारी से भरने की अपील की गई है।
इसका संचालन श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट, रायपुर के तत्वावधान में किया जा रहा है। आयोजन समिति में अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष धरमराज बेगानी, महासचिव मुकेश निमाणी, कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हैं।
इसका उद्देश्य बच्चों को बचपन से ही धार्मिक आचरण, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के संस्कारों से जोड़कर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करना है।
11 उपवास पूर्ण करने पर ऋषिका बेगानी एवं 9 उपवास पूर्ण करने पर बबिता बेगानी का हुआ बहुमान।
आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशलसूरि जैन दादाबाड़ी में तप, संयम और आराधना के वातावरण के बीच 11 उपवास पूर्ण करने पर ऋषिका बेगानी तथा 9 उपवास पूर्ण करने पर बबिता बेगानी का श्रीसंघ द्वारा सम्मानपूर्वक बहुमान किया गया।
इस अवसर पर साध्वी मंडल के पावन सान्निध्य में तपस्वियों का अभिनंदन करते हुए उनके तप, संयम और धर्म आराधना की सराहना की गई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने तपस्वियों का मंगलाभिनंदन कर उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं निरंतर धर्म साधना की कामना की।