बिलासपुर - जैन समाज के द्वारा परम पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व 2026 मे रविवार को बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। दिन भर पूजा-पाठ कई धार्मिक आयोजन होते रहे। इस वर्ष भी स्थानकवासी गुजराती जैन, श्वेतांबर जैन, तेरापंथ जैन समाज के प्रत्येक घरों में बच्चों से लेकर बुजुर्ग श्रावक श्राविका बड़ी संख्या में बड़ी तपस्या कर रहे हैं।
श्वेतांबर समाज- नेहरू नगर
पर्युषण महापर्व के रविवार को नेहरू नगर में पूजन वेशभूषा धारण कर स्तवन कुलनायक पूजा, शांति कलश पूजा, मंगल दीपक सहित कई धार्मिक आयोजन संपन्न हुए। समाज की श्रीमती ज्योति चोपड़ा एवं श्रीमती संगीता चोपड़ा द्वारा कल्प सूत्र का वाचन किया गया।
"नव तत्व" का नाट्य मंचन
समाज की निशी चोपड़ा द्वारा समाज के बच्चों के माध्यम से एक नाट्यः प्रस्तुत किया गया। जिसमें जैन समाज के *नव तत्व* की जानकारी नाट्य के माध्यम से समाज के बच्चों ने जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आश्रव, निर्जरा, बंध, मोक्ष बनकर अतुल्या, पाखी, पंखुड़ी, प्रखर, दर्श, नक्श, महावीर, मौली, इप्सा ने एक अच्छी प्रस्तुति की एवं नव तत्वों के बारे में जानकारी दी। समाज के वरिष्ठ जनों ने बच्चों के इस प्रस्तुति को बहुत ही सराहा एवं अनुमोदना की। संगीता चोपड़ा द्वारा सभी बच्चों को उपहार स्वरूप गिफ्ट प्रदान की गई।
इस अवसर पर विमल चोपड़ा, नरेंद्र मेहता, संजय कोठारी, इन्दर चंद बैद, संजय चोपड़ा, गौतम बाफना, योगेश चोपड़ा, सुभाष श्रीश्रीमाल, दिनेश जैन, अमित, संजय छाजेड़, रमेश भयानी, रविन्दर जंदानी, रुपेश अमिता गोलछा, रविन्द्र जंदानी, ममता डाकलिया, अजय छाजेड़, संजीव चोपड़ा, सुनीता जैन, मंजू गोलछा, शुभचंद जैन, नितीन सिंघई, मलय जैन, सहित समाज के लोग उपस्थित थे।
वैशाली नगर में 13 घंटे का नवकार मंत्र जाप हूवा।
जैन श्वेतांबर तेरापंथ संघ के पर्यूषण पर्व का आज छठा दिवस है। इस अवसर पर धर्म विद विशारद तेरापंथ के युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की महती कृपा से दो उपासिका बहने श्रीमती भाग्यश्री सूर्या से और श्रीमती लक्ष्मी मेहता पधारी है और उनके सानिध्य में निर्बाध रूप से हुलासचन्द गोलछा के निवास स्थान वैशाली नगर में पर्यूषण पर्व की आराधना हो रही है। प्रातः भजन, प्रार्थना, योग के पश्चात सुबह 6 बजे से रात 7:15 बजे तक लगातार नवकार मंत्र के जाप् का कार्यक्रम हूवा। छठा दिवस 'जप दिवस' के रूप में मनाया गया। उपासिका जी ने जप की महत्ता बताते हुए मंत्रों का विशद विवेचन किया। उन्होंने कहा कि एक शब्द की आवृत्ति करना, उसे बार-बार दोहराना जप कहलाता है। जप का अर्थ है मंत्र की पुनरावृत्ति। उपासिका जी ने मंत्र 'ऊं' की रचना पर प्रकाश डालते हुए व्याकरणिक दृष्टि से इसका विवेचन किया। जैन धर्म के अनुसार इस छोटे से मंत्र में पाँच पदों का समावेश है। 'अर्हम' का जप लयबद्ध करने से एक प्रकार का रसायन बनता है, जो हमारे भीतर के विकारों का शमन कर हमें पवित्र बनाता है। जप दिवस में सुरेंद्र मालू, चंद्रप्रकाश बोथरा, विनोद लुनिआ, भीखम दुग्गड़, हनुमान बोथरा, अंजू गोलछा, शीला छल्लानी, ललिका मालू, कुसुम लुनिआ, लक्ष्मी जैन के साथ समाज के अन्य श्रावक श्रविकाएं उपस्तिथ रहे।
13 Sep 2026