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ट्रेनों को रद्द करना प्लेटफॉर्म पर रोजगार करने वालों के पेट पर लात मारने जैसा कृत्य।

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प्रधानमंत्री को पत्र - 1 अक्टूबर वृद्धजन दिवस पर सीनियर सिटीजन रेलवे कन्सेशन पुनः लागू करें। संदेह - क्या रेल्वे को निजी हाथों में सौंपने का षड़यन्त्र। रायपुर - कोरोनाकाल के बाद जब से ट्रेनों का परिचालन आरम्भ हुआ है, तब से लगातार भारतीय रेल द्वारा कभी भी अचानक ट्रेनों को रद्द किया जाना चिंताजनक है। जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने कहा कि ट्रेनों के परिचालन रद्द होने से प्लेटफार्म पर रोजगार करने वाले लाखों लोगों के व्यवसाय बर्बाद हो गए हैं। प्लेटफॉर्म पर कार्यकर अपनी आजीविका चलाने वाले कुली, वेन्डर्स, दुकानदार व छोटे-छोटे रोजगार से परिवार का पेट पालने वाले लाखों लोगों के सामने दो वक़्त की रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। सैकड़ों ट्रेनों के परिचालन रद्द होने से देशभर के सैकड़ों प्लेटफॉर्म पर कार्यरत लोगों की आजीविका पर असर पड़ा है। जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा आज रेल्वे स्टेशन जाकर कुली, वेन्डर्स ऑटो व ईरिक्सा चालकों जैसे अनेक लोगों से मिलकर उनकी दिक़्क़तों की जानकारी प्राप्त की। सुरेश यादव, लेखराम जांगड़े, रिंकू यादव, प्यारेलाल केवट आदि कुलियों ने बताया कि ट्रेनों के रद्द होने की वजह से कई बार दिनभर में बोहनी तक नही होती परिवार का भरण पोषण दूभर हो गया है। वेन्डर्स ने बताया कि पहले दिनभर में सौ प्लेट से अधिक नास्ता बनाते थे, अब मुश्किल से दस बीस प्लेट ही बिक्री होती है, बहुत दिक्कत हो रही है। प्लेटफॉर्म को मॉल के रूप में विकसित करने की बात कर सरकार ने अनेक लोगों को महंगे दामों पर दुकान आबंटित की है, और अब ट्रेनों के परिचालन रद्द होने से सबके व्यापार घाटे पर चल रहे हैं। जैन संवेदना ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी व रेलमंत्री श्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर कुलियों, वेन्डर्स, ऑटो ईरिक्शा चालकों व प्रभावित लोगों को उचित मुवावजा देने की मांग की है। पत्र में आगे लिखा है कि 1 अक्टूबर को वृद्धजन दिवस पर सीनियर सिटीजन रेल्वे कन्सेशन पुनः लागू किया जावे। विगत चार माह में सैकड़ों ट्रेनों के रद्द होने से लगेज़ में बुकिंग से आने वाले सामग्री में स्वाभाविक कमी आई है, महानगरों से माल की आवक नही हो पा रही है, महानगरों में हजारों डाग कई हफ्तों से लेट आ रहे हैं, इस परिवहन से जुड़े अनेक लोगों के सामने भी आजीविका का संकट आ पड़ा है। जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा से संदेह जाहिर किया है, कि यह सब रेल्वे के निजीकरण की भूमिका बनाने के लिए सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है  पिछले एक वर्ष में सैकड़ों ट्रेनें कभी भी रद्द कर दी गई, जिससे चार माह पहले बुकिंग करने वाले यात्रियों को मानसिक व आर्थिक हानि का सामना करना पड़ रहा है। और रेल्वे चार माह हजारों करोड़ की राशि का मुफ्त में उपयोग करता है। सरकार का दायित्व जनता को सुविधा मुहैया कराना है, परन्तु केन्द्र का रेल प्रशासन जनता को परेशान करने में लगा है। रेल्वे सुविधाओं में कमी करता जा रहा है। बुजुर्गों के लिये रियायत को बन्द करना केन्द्र सरकार का संवेदनहीन निर्णय है, जिस पर शीघ्र पुनर्विचार करना चाहिये।

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