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तेल कंपनियों की बेशर्म मुनाफाखोरी पर केन्द्र सरकार मौन - जनता भुगत रही।

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कच्चे तेल की कीमतों में 28 प्रतिशत के लगभग गिरावट दर्ज की गई है।

पेट्रोल डीजल की कीमतें प्रत्येक नागरिक को करती है प्रभावित।

रायपुर - अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के उपरांत भी तेल कंपनियों द्वारा बेशर्म मुनाफाखोरी के उद्देश्य से पेट्रोल डीजल की कीमतों में कमी नही की जा रही है, जिसका सीधा असर गरीब मध्यमवर्गीय जनता पर कमरतोड़ महंगाई से पड़ रहा है। जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने कहा कि अप्रेल माह में कच्चे तेल का मूल्य लगभग 112 डॉलर प्रति बैरल था, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घटते घटते अभी 81 डॉलर प्रति बैरल लगभग हो गया है, बावजूद इसके तेल कंपनियों द्वारा पिछले 6 माह से पेट्रोल डीजल की कीमतों में किसी प्रकार की कमी नही की गई है। जबकि देश का लगभग हर नागरिक इससे प्रभावित है। इसका सीधा असर जनता पर कमरतोड़ महंगाई के रूप में पड़ रहा है। गरीब व मध्यमवर्गीय जनता प्रतिदिन ठगी जा रही है। करोना त्रासदी के बाद जब मार्केट पूर्ण रूप से खुल गया है, त्योहारी सीज़न के बाद शादी व्याह का सीजन चल रहा है, ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में कमी का फायदा आमजनता को मिलना चाहिए, परन्तु केन्द्र सरकार की निष्क्रियता के कारण मुनाफा तेल कंपनियां कमा रही है। जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने कहा कि पेट्रोल डीज़ल के मूल्य निर्धारण को तेल कंपनियों को सौपने के पीछे केन्द्र सरकार की मंशा यह थी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में घट बढ़ का फायदा प्रतिदिन जनता को सीधे मिले। कच्चे तेल का मूल्य बढ़ने पर पेट्रोल डीज़ल के दाम तुरन्त बढ़ाकर भार जनता पर डाला जाता रहा है, लेकिन पिछले 6 माह में कच्चे तेल के मूल्यों में कमी का फायदा जनता को नही दिया जा रहा है। पेट्रोल डीजल के मूल्यों को स्थिर रखकर तेल कंपनियां सीधे मुनाफाखोरी में लगी हुई है और केन्द्र सरकार की चुप्पी साधे रहना जनता के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाता है। जैन संवेदना ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी व पेट्रोलियम मंत्री श्री हरदीप पूरी को पत्र लिखकर संवेदनशीलता का परिचय देते हुए पेट्रोल डीजल के दामों में कमी की मांग की है। कोचर व चोपड़ा ने कहा कि सरकार का काम मुनाफा कमाना नही है, जनता की तकलीफों को समझना और दूर करने समुचित कदम उठाया जाना चाहिए। कच्चे तेल के दामों में 28 प्रतिशत की कमी का लाभ जनता को मिलना चाहिए। पेट्रोल डीजल के दामों से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है। प्रधानमंत्रीजी को तुरन्त संवेदनशील निर्णय लेने की अपेक्षा की जा रही है।

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