पंडरिया - पंडरिया के एकमात्र 50 बिस्तर मातृत्व एवं शिशु अस्पताल में अस्पताल के बी एम ओ तिवारी से शासन को हो रहा है लाखों का नुकसान। ज्ञात हो कि यहां के 50 बिस्तर के इस अस्पताल से लगा हुआ स्टाफ क्वार्टर बना हुआ है, अस्पताल के नियमित कर्मचारी और स्टाफ के लोगों के नियमित आवेदन पर विभाग से निर्धारित मासिक शुल्क पर किराए पर दिया जाता है, पर पंडरिया बीएमओ की कृपा दृष्टि से नियमित कर्मचारी के आवेदन को दरकिनार करते हुए अनियमित कर्मचारी को आवास दे दिया गया है। ज्ञात हो कि यहां के 50 बिस्तर के इस अस्पताल से लगा हुआ स्टाफ क्वार्टर बना हुआ है, अस्पताल के नियमित कर्मचारी और स्टाफ के लोगों के नियमित आवेदन पर विभाग से निर्धारित मासिक शुल्क पर किराए पर दिया जाता है। पर पंडरिया बीएमओ की कृपा दृष्टि से नियमित कर्मचारी के आवेदन को दरकिनार करते हुए अनियमित कर्मचारी को आवास दे दिया गया है। ज्ञात हो कि पंडरिया के पुराना अस्पताल में अस्पताल के ही एक अनियमित कर्मचारी को आवास दिया हुआ है, जबकि अस्पताल के कई नियमित कर्मचारी आवास के लिये पूर्व में आवेदन लगाए हुए हैं, पर बीएमओ ने उन सभी आवेदनों को दरकिनार करते हुए अनियमित कर्मचारी को आवास क्यु दिया है, यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा। इसे बड़ी विडंबना ही कही जाए कि अस्पताल में कार्यरत एक नियमित कर्मचारी जो कि फार्मासिस्ट के पद पर कार्यरत है, और दोनों पैर से विकलांग भी है, और बैसाखी के सहारे अस्पताल के दूर से आना जाना करती है, उन्होंने भी आवास के लिए आवेदन किया हुआ है, पर बीएमओ की कृपा अनियमित कर्मचारी पर ही क्यों रही जबकि उसे पहले ही पुराने अस्पताल पर आवास दिया हुआ है, फिर नियमित कर्मचारी को छोड़कर अनियमित कर्मचारी को मकान देना जांच का विषय है। वही देखा जाए तो अस्पताल में H टाइप के क्वार्टर को संविदा डॉक्टरों को बिना आवेदन के एलॉट कर दिया गया है, इन से मासिक किराया में कटौती राजस्व के हिसाब से की जा रही है, या फिर इनका पैसा राजस्व शुल्क में जमा ना होकर कहां जमा हो रहा है, यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा। क्या सभी नियमित व अनियमित कर्मचारियों को आवास आबंटन नियमो के अनुसार ही किया गया है, या अधिकारी के द्वारा अपने चहेतों को फायदा पहुचाया जा रहा है, ये जाँच का विषय है।