पांडातराई - फिरोज खान अध्यक्ष नगर पंचायत पांडातराई जिला- कबीरधाम ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ द्वारा किमीनल विविध पिटिशन कमांक 328 / 2023 के माध्यम से के फारूक खान वगैरह विरुद्ध छ.ग. शासन द्वारा थाना पाण्डातराई. शिव गुप्ता, त्रिलोचन सिंह वाले मामले में याचिकाकर्तागण के पक्ष में आदेश करते हुए प्रथम सूचना कमांक 23 / 2023 को निरस्त करते हुए निम्न न्यायालय को विधि संगत कार्यवाही का आदेश दिया गया है।
ज्ञातव्य हो कि, के फारूक खान, नूरी खान, फिरोज खान, वजीर खान, विनोद गुप्ता, युनुस खान, भीष्म गुप्ता, भीषणचंद तिवारी, राधेलाल कोसले जिसमें सभी याचिकाकर्तागण सचिव अजान शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति, उक्त समिति के कोष प्रभारी एवं अन्य उक्त समिति के सदस्य के द्वारा थाना पाण्डातराई जिला कबीरधाम, शिव गुप्ता पूर्व सरपंच ग्राम पंचायत पाण्डातराई, त्रिलोचन सिंह पिता रबेल सिंह निवासी पाण्डातराई के विरूद्ध एक याचिका माननीय उच्च न्यायालय में एफ.आई.आर. क्रमांक 23 / 23 को निरस्त करवाने और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पण्डरिया के आदेश दिनांक 30.01.2023 को निरस्त करवाने प्रस्तुत किया था। उक्त याचिका का निराकरण करते हुए माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ ने दिनांक 15.02.2023 को आपराधिक विविध याचिका क्रमांक 328 / 2023 का निराकरण करते हुए उक्त दिनांक को आदेश की कंडिका 2 से उल्लेखित करते हुए प्रकरण के तथ्य का उल्लेख करते हुए बताया है कि शिव गुप्ता एवं त्रिलोचन सिंह उत्तरवादी के द्वारा एक परिवाद दिनांक 21.09.2022 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पण्डरिया जिला कबीरधाम के समक्ष धारा 156 ( 3 ) दण्ड प्रक्रिया संहिता याचिकाकर्तागण के विरुद्ध थाना पाण्डातराई को यह निर्देश देने कि धारा 420, 468, 470 एवं 471 भा.द.वि. के तहत प्रकरण दर्ज किये जाने प्रस्तुत किया परिणाम स्वरूप विद्वान दण्डाधिकारी ने दिनांक 21.10.2022 को संबंधित रिपोर्ट पाण्डातराई थाने द्वारा प्रस्तुत किये जाने आदेशित किया। परिणामतः विद्वान दण्डाधिकारी ने यह पाया कि जो रिपोर्ट थाना पाण्डातराई के द्वारा प्रस्तुत किया गया है वह स्पष्ट नहीं है। परिणामतः एक नवीन रिपोर्ट फाईल करने आदेशित हुआ जो दिनांक 25.11.2022 को जमा हुआ। तत्पश्चात् दिनांक 03.01.2023 को विद्वान मजिस्ट्रेट ने धारा 156 ( 3 ) दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत आवेदन को स्वसंज्ञान से निरस्त कर दिया और प्रक्रिया धारा 200 दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत संज्ञान में लिया और तत्पश्चात् मामले को पंजीयन पर तर्क हेतु दिनांक 30.01.2023 को नियत कर दिया। विद्वान दण्डाधिकारी ने यह निष्कर्ष पाया कि याचिकाकर्तागण ने धारा 420, 468, 470 एवं 471 भा.द.वि. का अपराध किया है और अपने नवीनतम आदेश को वापस लेते हुए धारा 156 (3) दण्ड प्रक्रिया संहिता को स्वीकार किया और संबंधित पुलिस थाने को निर्देशित किया कि जांच पूर्ण होने पश्चात् रिपोर्ट जमा करें।
उक्त निर्देश के अवलोकन में पुलिस थाना पाण्डातराई ने दिनांक 04.02.2023 को प्रश्नास्पद प्रथम सूचना क्रमांक 23/2023 पंजीबद्ध किया। परिणामतः वर्तमान याचिका उक्त आदेश दिनांक 30.01.2023 को निरस्त करने और तद् अनुक्रम में प्रथम सूचना क्रमांक 23 / 23 को निरस्त करने प्रस्तुत किया गया। याचिकाकर्तागण के विद्वान वरिष्ठ अधिवक्तागण ने निम्न न्यायालय द्वारा समुचित प्रक्रिया का पालन न किये जाने अभिवचन लिया आगे अपने अभिवचन में उन्होंने कहा कि, 156 (3) दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत या तो मजिस्ट्रेट पुलिस विभाग को प्रकरण दर्ज करने आदेशित करता है या मामले में संज्ञान लेकर धारा 190 की उपधारा 1 दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत संज्ञान लेकर कार्यवाही करता है। पर अपने ही आदेश को पलटने का अधिकार धारा 156 (3) दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत नहीं है। इस संदर्भ में माननीय उच्चतम न्यायालय का न्याय दृष्टांत माधो और अन्य विरुद्ध महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य (2013) 5 SCC 615 का उल्लेख लेते हुए उक्त निर्णय के पैरा 18 पर न्यायालय का ध्यान आकृष्ट कराया गया और उक्त पैरा में 156 (3) की प्रक्रिया की उल्लेख के बारे में बताया गया आगे माननीय उच्चतम न्यायालय के न्याय दृष्टांत धर्मेश भाई वासुदेव भाई एवं अन्य विरूद्ध गुजरात राज्य (2009) 6 SCC 576 का उल्लेख करते हुए उक्त निर्णय के पैरा 10 पर ध्यान आकृष्ट कराया गया जिसमें धारा 200 दण्ड प्रक्रिया सहिता एवं धारा 156 (3) दण्ड प्रक्रिया संहिता के मध्य अंतर को स्पस्ट किया गया है। आगे विद्वान वरिष्ठ अधिवक्तागण ने माननीय उच्चतम न्यायालय के न्याय दृष्टांत प्रियंका श्रीवास्तव विरुद्ध उत्तरप्रदेश राज्य (2015 ) 6 SCC 287 का उल्लेख करते हुए उक्त निर्णय के दिशा निर्देशों का पालन न होने संबंधी अभिवचन लिया है और आगे उल्लेख किया गया है कि उक्त निर्णय के दिशा निर्देशों के बिना पालन किये हुए सीधे आदेश कर दिया गया है। आगे संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई शिकायत न किये जाने संबंधी उल्लेख किया गया है। केवल एक मात्र आरोप है कि मान्यता के प्रश्न पर किराया के इकरारनामा जो भवन खसरा नं. 171/8 प्रदर्शित हो रहा था स्कूल ख.नं. 191 / 2 व 192 पर संचालित हो रहा है, जो कि. शासन की भूमि है, और गांव के कोटवार बोधनदास को शासन द्वारा स्वीकृत हुई है, आगे ख.नं. 171 / 8 को कृषि भूमि होना बताया गया है, परिणाम स्वरूप कार्यालय के पदाधिकारियों द्वारा जो अजान शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति पाण्डातराई के हैं, ने एक आवेदन दिनांक 24.10.2019 को जिला शिक्षा अधिकारी के पास प्रस्तुत कर स्कूल परिसर को अन्य भूमि पर शीट किये जाने प्रस्तुत किया। कोटवार बोधनदास की रिपोर्ट के आधार पर कुछ लोगों के विरुद्ध शिकायत दर्ज हुई थी और वे धारा 447 सहपठित धारा 34 भा.द.सं. के तहत दोषसिद्ध भी हुए थे। परंतु अपील में वे दोषमुक्त हुए परिणामस्वरूप यह पूर्व दुश्मनी शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता कमांक 3 के मध्य जो उत्तरदाता क्रमांक 2 का पुत्र है, ने अविश्वास प्रस्ताव याचिकाकर्ता कमांक 3 के विरूद्ध प्रस्तुत किया था, कि उन्होंने नगर पंचायत पाण्डातराई के अध्यक्ष का पद धारण किया है, परिणामस्वरूप प्रश्नास्पद आदेश स्थिर रखे जाने योग्य नहीं है। और विधि की दृष्टि से प्रथम सूचना का पंजीकरण भी कानून की दृष्टि से अनुचित है। इसलिए निरस्त किये जाने योग्य है। दूसरी तरफ राज्य की ओर से विद्वान अधिवक्ता उत्तरदाता कमांक 02 और 03 की ओर से विद्वान अधिवक्ता ने इस बात पर कोई विवाद होना व्यक्त नहीं किया है, कि विद्वान मजिस्ट्रेट ने अपने ही आदेश को उलट दिया है, तो ऐसा आदेश निरस्त हो और पूर्व के आदेश अनुसार विधिक प्रक्रिया का पालन हो। दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना गया और याचिका में प्रदर्श हुए दस्तावेजों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया। यह स्पष्ट है कि 156 (3) दण्ड प्रक्रिया संहिता के आवेदन को निरस्त कर विद्वान मजिस्ट्रेट ने पुनः उस पर आदेश कर दिया है।
जो विभिन्न न्याय दृष्टांतो और आदेशात्मक प्रावधानों के आलोक में उचित नहीं है और प्रश्नास्पद आदेश दिनांक 30.01.2023 स्थिर रखे जाने योग्य नहीं है। और परिणाम स्वरूप प्रथम सूचना क्रमांक 23/ 2023 जो थाना पाण्डातराई द्वारा पंजीबद्ध की गई है वह भी स्थित रखे जाने योग्य नहीं है इस प्रकार दोनों निरस्त किये जाने योग्य है। परिणाम स्वरूप प्रश्नास्पद आदेश दिनांक 30.01.2023 को निरस्त किया जाता है और प्रथम सूचना क्रमांक 23 / 2023 को निरस्त किया जाता है। इस प्रकार से माननीय उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय के अंतिम कंडिकाओं में याचिकाकर्तागण के पक्ष में आदेश करते हुए उक्त एफ. आई. आर. को अवैध घोषित किया है।
फिरोज खान पिता श्री हलीम खान ने जो वर्तमान नगरपंचायत अध्यक्ष पाण्डातराई हैं ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि, मेरे विरूद्ध मुझसे द्वेष भावना रखने वाले मेरे राजनीतिक प्रतिद्वंदियों द्वारा मेरी छवि खराब करने और मुझे अपमानित करने की दृष्टि से न्यायालय में मामला संस्थित करवाया गया था, लेकिन माननीय न्यायालय का निर्णय मेरे पक्ष में आया है, जो जिस रूप में है, मैं माननीय न्यायालय के निर्णय का पूरा सम्मान करता हूं, और मेरे विरूद्ध पहले भी अविश्वास प्रस्ताव पास कराने का प्रयास किया गया जो ध्वस्त हुआ।
मेरे विरूद्ध जो अपमानजनक और झूठा शिकायत कर अपमानित किया गया उसके विरूद्ध में आपराधिक मानहानि और सिविल मानहानि की कार्यवाही करने के लिए उचित कानूनी कदम बढाउंगा।