रायपुर - जैनधर्म के 20वें तीर्थंकर मुनिसुव्रत स्वामी का राजधानी रायपुर में पहला मंदिर बन रहा है। लालपुर के नवकार नगर में 11,100 स्क्वायर फीट में मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। गुरूवार को यहां शिलान्यास महोत्सव का आयोजन किया गया। मंदिर के निर्माण में मकराना और जैसलमेर के पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मंदिर का निर्माण श्रीमुनि सुव्रत स्वामी मंदिर और मणिधारी दादाबाड़ी ट्रस्ट द्वारा करवाया जा रहा है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष विवेक जी डागा ने बताया कि यह रायपुर का सबसे बड़ा मंदिर होगा। गुरूवार को सुबह 7 बजे शिलान्यास समारोह का स्नात्रपूजा और पाटला पूजा से शुभारंभ हुआ। शिलान्यास महोत्सव में छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव, विधायक सत्यनारायण शर्मा और नगर निगम सभापति श्री प्रमोद दुबे शामिल हुए।
मुलनायक श्री मुनिसुव्रत स्वामी भगवान की मुख्य शिला के लाभार्थी परम पूज्य मनोहर शिशु साध्वी श्री संघमित्रा श्री जी म.सा. की प्रेरणा से सुनील, सुदीप लुणावत की पावन स्मृति में मंगलचंद, नमन, ऋषभ, वन्या लुणावत परिवार हैं। इसके अंतर्गत पूर्व शिला के लाभार्थी पूज्य पिताजी के आत्मश्रेयार्थें मातुश्री सरोज देवी डागा के आशीर्वाद से विवेक-दीपिका, यश-सोनल (पुत्र-पुत्रवधु) हर्षवीर डागा परिवार (पौत्र), रायपुर हैं। पश्चिम शिला के लाभार्थी श्री चंदनमल जी - चूकी बाई सुराना के दिव्य आशीर्वाद से श्री प्रकाशचंद - निर्मला देवी, धीरज - मोनिका, कु. चेरिशा, आर्यन एवं समस्त सुराना परिवार हैं। उत्तर शिला के लाभार्थी सुमन लता - महावीरचंद बरड़िया परिवार, रायपुर हैं। दक्षिण शिला के लाभार्थी जी.सी. जैन परिवार, रायपुर हैं। ईशान कोण के लाभार्थी श्री भीखमचंद कोठारी की स्मृति में पुष्पादेवी कोठारी, मनोज - कविता, संभव, श्रेया, श्रेजष, सिद्धांत कोठारी परिवार हैं। अग्नि कोण के लाभार्थी स्वर्गीय चम्पालाल जी के आत्मश्रेयार्थे कौशल्या देवी - निखिल डागा परिवार, रायपुर हैं। नेऋत्य कोण के लाभार्थी पदमचंद, कमलचंद बोथरा परिवार, रायपुर, दल्लीराजहरा हैं। वायव्य कोण के लाभार्थी पूज्य बसंत कुमार की स्मृति में जितेंद्र कुमार, नीरज कुमार नाहर परिवार धमतरी हैं।
श्री भोमिया जी की शिला के लाभार्थी श्रीमती विमलादेवी - जसराजजी पारख के आत्मश्रेयार्थे राजेंद्र कुमार - चंद्रकला, निर्मलकुमार - मनीषा, योगेंद्र कुमार - शुभमदेवी, निमीषा, राहुल, सुयोग, नूतन एवं समस्त पारेख परिवार, प्रियंका - प्रतिकजी ललवानी, राजनांदगांव हैं।
श्री पद्मादेवी की शिला के लाभार्थी श्रीमती भवरी देवी - जवरीलाल जी खांटेड परिवार रायपुर है।
मणिधारी दादा जिनचंद्र सूरीश्वर जी की मुख्य शिला के लाभार्थी गुरूभक्त परिवार रायपुर है। पूर्व शिला के लाभार्थी पूज्य पिताश्री पारसचन्द जी के आत्मश्रेयार्थे मातश्री कमला बाई गोलेच्छा के शुभ आर्शीवाद से पुत्र विमल-ज्योति, निर्मल-प्रभा, राजेन्द्र-विभा, रोमिल-सोनाक्षी, रवि-निशी विरल, प्रांजल गोलेच्छा परिवार (सुपौत्री-दामाद) निकिता-शैलेष, प्राची-मोहित हैं। पश्चिम शिला के लाभार्थी आशकरण, शांतिलाल कोचर परिवार, रायपुर हैं। उत्तर शिला के लाभार्थी सेठ श्री कबरलाल जी - बरजु बाई, मोतीलाल जी - सपत बाई दुग्गड़ की स्मृति में संतोष कुमार - रंजना देवी, सचिन-नितिशा, अरिहंत, वृद्धि एवं समस्त दुग्गड़ परिवार रायपुर/धमतरी हैं। दक्षिण शिला के लाभार्थी चंद्रिका - धरमचंद लोढ़ा परिवार, रायपुर हैं।
श्री गौतम स्वामी जी की मुख्य शिला के लाभार्थी श्रीमान उतंमचन्द जी - मानुबाई भागचन्द जी - शकुन बाई मनीष, राजुल, अमन, आकाश बोथरा मनीष ट्रेवर्ल्स दुर्ग - रायपुर हैं। पूर्व शिला के लाभार्थी प्रेमचंद, प्रतीक कुमार लुणावत परिवार, रायपुर हैं। पश्चिम शिला के लाभार्थी बोथरा परिवार, न्यू राजेन्द्र नगर, रायपुर हैं। उत्तर शिला के लाभार्थी श्री भंवरलालजी की पुण्य स्मृति में श्रीमती चन्दरीबाई कांकरिया, टोडरमल - किरणबाई, सुरेशचंद - लीलादेवी, अशोक - संध्या, विजय- सीमा, अजित प्रीति, पंकज - अर्चना, पवन - हर्षारानी नमीत- मधु, सुमीत नम्रता, पीयुष - नम्रता, अंकित-शिखा, संयम - गौरी, शुभम - सुरभि, अर्पित, अंशुल, लक्ष्य, चैत्य, धैर्य, मौलिक, सुनम्र, अंश, आयांश, मानसी, हर्षिका, भूमिका, रीत, लविका, साची कांकरिया परिवार हैं। दक्षिण शिला के लाभार्थी शशि नाहटा परिवार, रायपुर नगरी हैं।