पंडरिया - नेहरू युवा केंद्र कवर्धा छत्तीसगढ़ युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वाधान में जिला युवा अधिकारी के कुशल मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत कुंडा में पर्यावरण के लिए जीवनशैली अनाज मेला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रीमती समुंद सेवाराम कुर्रे जनपद अध्यक्ष पंडरिया मुख्य रूप से शामिल हुए। महेश्वर साहू सरपंच पंचायत कुंडा, उमेश चंद्राकर उप सरपंच प्रतिनिधि, निधि चंद्राकर, परसदिया निषाद इस अवसर पर शामिल रहे। पंडरिया जनपद अध्यक्ष समुंद सेवाराम कुर्रे के द्वारा लगाए गए स्टाल का अवलोकन किया। मिलेट के विषय पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा जो कोदो, कुटकी, बाजरा, राखी यह एक अनाज ही नहीं बल्कि एक पोषक तत्व है। जो हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो औषधि के रूप में शुगर पेशेंट के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह शुद्ध और प्राकृतिक रूप से उत्पादन किया जाने वाला फसल है। जो कि यह कम पानी कम खाद पर उत्पादन होने वाला अनाज है। इसकी उत्पादन में बहुत कम खर्च आता है। यह पूरा प्राकृतिक पर निर्भर रहता है। वनांचल क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में आज भी इसका खेती किया जाता है, कुछ वर्ष पूर्व कोई प्रकार का हाइब्रिड फसल नहीं बोया जाता था। कोदो कुटकी बाजरा रागी की फसल हर क्षेत्र में उगाया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे विलुप्त होने के कगार् मे पहुँच गया है। आज देश के द्वारा मिलेट थीम देकर इस महत्वपूर्ण अनाज का प्रचार प्रसार किया जा रहा है, कोदो कुटकी रागी बाजरा से अनेक प्रकार की खाद्य सामग्री बनाई जा सकती है, और बनाया भी जा रहा है। नेहरू युवा केंद्र कवर्धा के द्वारा एक मेला लगा कर विभिन्न स्टाल के माध्यम से प्रदर्शन किया गया है। जिसमे कोदो का चावल, कुटकी, बिस्किट, आदि इस अनाज से बनाई हुई खीर भी बहुत ही स्वादिष्ट होता है। इन् खाद्य पदार्थों से अनेक सामग्री बनाई जाती है। जो बहुत ही शुद्ध और पोषक तत्वों से भरा होता है। जो हम सबके लिए अत्यंत लाभदायक है, अधिक से अधिक इन खाद्य पदार्थों का सेवन करें। और अपने आसपास में लोगों को खेती करने के लिए प्रेरित करें। पुराने पद्धतियों का प्रयोग करें ताकि हमारा आसपास और हम शुद्ध वातावरण शुद्ध भोजन प्राप्त कर अपने शरीर को मजबूत बनाये रख सके। कार्यक्रम में काफी लोगों ने इस अनाज व इससे बनी खाद्य पदार्थ खरीदी की। कार्यक्रम को सफल बनाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक कुलेश्वर निर्मलकर, चोक सिंह राजपूत, सूरज निर्मलकर, पूर्व राष्ट्रीय संघ सेवक पुरुषोत्तम निर्मलकर, रोहित निर्मलकर, मनोहर निषाद और महिला समूह की महिलाओं का विशेष योगदान रहा।