कबीरधाम - कवर्धा के राजा साहब श्री यदूनाथ सिंह ने वर्ष 1943 में एक गौ शाला की स्थापना हेतु वर्तमान बस स्टेंड के पास भूमि एवं गौ शाला के कुशल संचालन हेतु 101 एकड़ (एक सौ एक एकड़) भूमि दान मे देकर नगर सेठ एवं राजा साहब की खास श्री धनराज बोथरा की निगरानी में दे दी, जिसका पब्लिक ट्रस्ट में पंजीयन श्री यदूनाथ गौशाला राजधानी नागपुर में वर्ष 1950 कराया था। कार्यकारिणी सदस्य बृजलाल अग्रवाल ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि श्री यदूनाथ गौशाला के आजाद भारत में 75 वर्षों में सन् कुछ बदल गया, किन्तु इन 50 वर्षों में गौशाला की स्थिति नहीं बदली, इसका मुख्य कारण वर्चस्व की लड़ाई रही। गत् 14 वर्षों में प्रशासक तहसीलदार पदस्थ है, इसके पूर्व प्रमुख ट्रस्टी सेठ धनराज बोथरा थे, इस गौशाला में वर्तमान में एक सौ पैसठ (165) गौवंश की देख रेख हो रही है। गौशाला के पास 101 एकड़ (एक सौ एक एकड़) कृषि भूमि है एवं सागौन के वृक्ष भी है, किन्तु प्रशासक के अनदेखी के कारण कृषि भूमि की नीलामी नहीं की जाती। कार्यकारिणी के अध्यक्ष श्री श्यामसुंदर पाठक अधिवक्ता ने कहा कि प्रशासक कोई रुचि नहीं लेते ना ही देख रेख करते और ना ही मानते एवं ना ही इसके लिए कोई फैसले ले रहे। किसानों को लीज में दी गई भूमि की भी रकम वसूली नहीं की जाती एवं अभी भी भूमि की नीलामी ना कर पुरानी दर पर ही जमीन यथावत आबंटित है। जिससे ट्रस्ट को 10 लाख रुपये वार्षिक आर्थिक क्षति पहुचाने का दावा किया। थोड़ा बहुत धान जो बटाई में आता है, वो 15 सौ रुपये क्विंटल में बेच दिया जाता है, जबकि सरकार 25 सौ रुपये से अब 28 सौ रुपये में खरीदती है। गौशाला का चारों ओर से क्षति पहुचाई जा रही है, इस 14 वर्षों में कई प्रशासक आकार चले गए, किन्तु गौशाला आज भी वही है। गौशाला में यदि रुचि लेकर चलाई जाए तो प्रदेश में प्रथम स्थान पर होगी। प्राईवेट सभी संस्थान गौशाला के नाम पर अनुदान सरकार से ले रही है, किन्तु इस गौशाला के लिए शासन के द्वारा कोई भी अनुदान नहीं लिया जा रहा है। अतः प्रशासन से अनुरोध है कि गौशाला को उनकी मंसारूप संरक्षण एवं संवर्धन व आर्थिक विकास में सहयोग करे अन्यथा विधि रूप फैसला करे।