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जैन दादाबाड़ी में हुआ मनोहरस्पर्शना ग्रंथ का मनोहरमय विमोचन।

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रायपुर - एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी में नवकार दरबार के अंतर्गत छत्तीसगढ़ रत्न शिरोमणि महत्तरापद विभूषिता परम पूज्य मनोहर श्री म.सा. की 18वीं पुण्यतिथि निमित्त मंगलवार को मनाई गई। नवकार जपेश्वरी परम पूज्य शुभंकरा श्रीजी की पावन निश्रा में आज भव्यता के साथ मनोहरस्पर्शना ग्रंथ का विमोचन हुआ, जिसकी लेखिका कुमारी कोमल गोलछा, फलोदी और संयोजिका परम पूज्य म.सा. वसुंधराश्रीजी है। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन श्रीमती सरोज गोलछा, राजनांदगांव ने किया। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में मंगलवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि आज व्यक्ति बिना सोचे समझे कुछ भी बोलता है, अज्ञानता में जीता है। वह यह नहीं सोचता कि उसके मुख से निकले शब्दों का अंजाम क्या हो सकता है। जबकि कर्म सिद्धांत हमारे राई-राई और पाई-पाई का हिसाब रखता है। यह सिद्धांत हमारे बांधे हुए कर्मों को बिल्कुल भी नहीं बख्शने वाला है, आज नहीं तो कल वह हिसाब जरूर करेगा। आज हम बिना सोचे समझे किसी को भी कुछ भी कह रहे हैं। हम आज किसी बात पर सामने वाले की छोटी सी गलती पर बहुत बड़ी बात कह जाते है। यदि हम ऐसा कर रहे है तो हमें सावधान हो जाना चाहिए। आज यदि हमारी भाषा से किसी का दिल दुखता है तो हम बहुत खुश हो जाते है लेकिन यह क्षणभर की खुशी होती है। अगर ऐसे ही कर्म हम समय-समय पर बांधते रहे तो यह सब इकट्ठा होता जाएगा और समय आने पर यह एक बार में हिसाब करेगा और इस समय व्यक्ति टस से मस नहीं हो पाएगा। बोलने से पहले सौ बार सोचना चाहिए। साध्वी जी कहती है कि व्यक्ति को जब भी मुख से कोई बात कहनी हो तो पहले सोच विचार कर लेना चाहिए। क्योंकि जिस तरह से कमान से निकलने के बाद तीर वापिस नहीं लौटता है उसी प्रकार मुख से निकली हुई बात वापिस नहीं होती है। इसलिए तौलमोल कर ही बोलना चाहिए। आज जितने भी विवाद हैं उनके नेपथ्य में बिना विचार किए बोलना ही है। जब व्यक्ति सोच विचार कर बोलता है तो उसकी बात को गंभीरता से लिया जाता है। ऐसे व्यक्ति की हर कोई बात सुनता है और उसका अनुशरण करता है। जो लोग बिना विचार किए ही बोल देते हैं ऐसे लोग समाज में कभी-कभी हास्य का पात्र भी बनते हैं। ऐसे लोगों की गरिमा गिर जाती है और समाज में ऐसे लोगों की बात को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। इसलिए जब भी बोले बहुत सोच समझकर ही बोलें। क्योंकि मुख से निकले शब्द कभी नष्ट नहीं होते हैं। जीवन में लाएं अनुशासन साध्वी जी कहती है कि सफलता पाने के लिए जीवन में अनुशासन बहुत जरूरी है। अनुशासन के बिना किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। जिनके जीवन में अनुशासन नहीं है वे जीवन जीने की कला ही नहीं जानते हैं। ऐसे लोगों में न तो श्रम की कुशलता होती है और न ही ऐसे लोग पूरी तरह से प्रसन्न रहते हैं। ऐसे लोग सम्मान पाने के भी हकदार नहीं होते हैं। क्योंकि समाज उन्हीं लोगों का अनुकरण करता है जो सफल होते हैं, जो सफल होते हैं वे अनुशासन से जीवन को जीते हैं। अनुशासन न होने से जीवन में आलस्य बना रहता है और कार्य को अगले दिन पर टालने की प्रवृत्ति पनपने लगती है जिस कारण प्रतिस्पर्धा में अन्य लोग बाजी मार ले जाते हैं। ऐसे लोग समय आने पर हाथ ही मलते रह जाते हैं। सफल व्यक्ति के हर कार्य का समय निर्धारित होता है। ऐसा इसलिए संभव बना पाता है क्योंकि उस व्यक्ति ने अपने जीवन में अनुशासन बनाया हुआ है। अनुशासन ही कार्य की सफलता की पहली सीढ़ी है। मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्री सुशील कोचर और महासचिव श्री नवीन भंसाली ने बताया कि मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन 2023 ललित विस्त्रा ग्रंथ पर आधारित है। नवकार जपेश्वरी परम पूज्य शुभंकरा श्रीजी आदि ठाणा 4 के मुखारविंद से सकल श्री संघ को जिनवाणी श्रवण का लाभ दादाबाड़ी में मिल रहा है। साथ ही उन्होंने नगरवासियों से साध्वीजी के मुखारविंद से जिनवाणी का श्रवण करने का आग्रह किया है।

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