BREAKING

कांग्रेस भाजपा में चुनावी भीतरघातियों के नाराजगी का खेल जारी।

Share:

वरिष्ठ पत्रकार रामकुमार टंडन की रिपोर्ट

कवर्धा :- भीतरघात होना कोई नई बात नही है हर चुनाव में होता है इनके जहरीले वार से जो बचकर निकलता है वही विजेता होता है। इस समय छत्तीसगढ़ के 20 विधानसभा सीट के लिए 7 नवम्बर को मतदान हो रहा है, प्रत्याशी दिनरात मेहनत करने में लगे है। जनता के पास तरह तरह के वाद्ययंत्र के अलाव अन्य साधनों से रिझाने पहुँच रहे हैँ। जनता बेचारी भी नेताजी हमारे लिए कुछ लेकर आये होंगे कहकर मुस्कुरा कर भिड़ देखने पहुँच जाति है। किन्तु नीरस लौटकर मंथन में लग जाती है। भीतरघातियों के नाराजगीयों का शिकार नीरस लौटे जनता ज्यादा प्रभावित है। जिले के कवर्धा विधानसभा 72 व पंडरिया 71 दोनों में भीतरघात हो रहा है। "अपनों ने लुटा गैरों में दम कहाँ था जहाँ मेरी कस्ती डूबा वहाँ पानी कम था।" यह लाइन यहाँ चरितार्थ हो भी रहा है। कवर्धा में राजतंत्र का राज लोकतंत्र में संविधानिक राजा बनने जनता के बीच आशीर्वाद मांगते भटक रहा चुनावी मैदान में है। यही तो हमारे लोकतंत्र की खूबसुरती और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के द्वारा सचित संविधान में दी गई शक्ति एक वोट का अधिकार का महत्व है। यहाँ सभी बराबर हैं, राजा चुनाव के बाद भेदभाव जाति संख्या देखने में लग जाता है, अपने आपको शक्तिशाली मान बैठाता है। इसलिये भीतरघातियों का भी चुनाव में बहुत बड़ा स्थान होता है, जो मैदान में न होकर अंदर रहकर खेलता रहता है। लोकतंत्र के राजा बनने के सपने देख रहे अपने विरोधी को धूल चटा देता है। खैर यहाँ तो कवर्धा 72 नंबर के विधानसभा और 71 की बात चल रही है। कवर्धा में हिंदूवादी आबादी को लेकर चुनाव लड़े जा रहे हैं, पुराने और नये हुए घटनाक्रम लेकर बात कही जा रही है दोष किसी का भी हों लोकतंत्र के राजा के सिर मढ़ने का प्रयास होता है। जातिवादी ताकते संख्या बल के आधार पर कमजोर पर हावी होने का प्रयास कर रहे हैं। धार्मिक भावना को लेकर भी प्रचार प्रसार का अंश बना लिए है, इस खेल में गैरों का शामिल होना जायज है, किन्तु अपने भी शामिल हों भीतरघाती बन नुकसान ज्यादा पहुँच रहे हैं। पंडरिया में इस समय भोली भाली जनता को समझ नही पा रही है कि कौन नेता कांग्रेस का प्रचार कर रहा है कौन सा नेता भाजपा के पक्ष में है। इसलिए जिसे हम जनता समझाकर भिड़ में देखते हैं, वह भी दिन में दो तीन बार पाला बदलकर कुछ पाने के चाह में नेताओं के रैली और मैदान में दिखाई देते हैं। ये खुबसुरत नजारा रोज देखने को मिलता है। इसलिये पार्टी के कार्यकर्ता भी ईमानदारी से रोजी रोटी कमाने में लग गये हैं, नेताओं के बीच आरोप प्रत्यारोप लग रहा है। भीतरघाती मौके के ताक में बैठे हैं, इस बात् की जैसे ही जानकारी होती है, तत्काल अपनी पीड़ा साझा करने लग जाते हैं, और अपनी ताकत बढाकर प्रयोग कर रहे हैं। बहरहाल अब देखना ये है कि किस पार्टी के भीतरघाती किसे कितना नुकसान पहुंचने में कामयाब होते हैं, ये बात 7 नवम्बर के मतदान व 3 दिसंबर 2023 के परिणाम ही बताएगा।

Share:

Popular News