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जैन साध्वियों का जैन मंदिर परिसर कवर्धा में मंगल प्रवेश।

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कवर्धा - प्रख्यात व्याखात्री कनक प्रभाजीएसयम बोधीजी, शुद्ध बोधिजी का मुंगेली चातुर्मास पूर्ण कर कवर्धा नगर में मंगल प्रवेश हुआ। वहीं दूसरी ओर महासमुंद का ऐतिहासिक चातुर्मास पूर्ण कर बेमेतरा की ओर से संवर बोधिजी व शुद्ध बोधिजी एवं शौर्य बोधिजी का जैन मंदिर परिसर कवर्धा में मंगल प्रवेश हुआ। दोनों की ओर से पधारे चरित्र आत्माओं का परस्पर मधुर मिलन एवं शुभेच्छाओं का आदान प्रदान हुआ। महासती की निश्रा में प्रतिदिन सुबह 8.45 पर प्रवचन हो रहा है। मंगलवार को अपनी प्रवचन श्रृंखला में महासती ने कहा कि किसी ने पानी का गिलास पकड़ाया और हम थैंक यू बोल देते हैं, किंतु क्या हमारे मनोभावों इस से जुड़ पाते हैं। कृतज्ञता भाव भीतर से उपजता है। सुख और आनंद की तड़प सभी को है पर क्या हमारे कर्म उसके अनुरुप है। परमात्मा, गुरु, माता-पिता, घरेलू सवका के उपकारा का पुसत क क्षणों में याद करें और अहोभाव से कृतज्ञता व्यक्त करें। भोजन की रेसिपी को 50 बार पढ़ने से पेट नहीं भरेगा, इसके लिए सामग्री जुटानी पड़ेगी तब भोजन तैयार होगा। उसे ग्रहण करने से ही क्षुधा मिटेगी। कनक प्रभाजी महाराज ने अति परी ग्रह एवं अति परिचय को खतरनाक बताया। तीर्थकर परमात्मा महावीर के पास क्या कमी थी। उन्हें ये भलीभांति याद था कि यह शांति का मार्ग नहीं है। खुद में ही खुदा छिपा हुआ है। सदा इस बात का स्मरण रखे। श्वेताम्बर मूर्ति पूजक जैन संघ अध्यक्ष अजय टाटिया ने अल्प कालीन प्रवास का अधिक- अधिक लाभ उठाने की अपील की है। दोपहर में श्रावक का प्रथम कर्तव्य विषय पर शिविर दैनिक रुप से चल रहा है। यहां से महासतीवर्याओं का बिहार लोहारा की ओर जाने की संभावना है।

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