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बैगा आदिवासियों के खेत पर खोदी की गई नलकूप खनन पर भ्रष्टाचार।

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कवर्धा - एक तरफ सरकार बैगा आदिवासियों के सुविधा आर्थिक उन्नति के लिए विशेष योजना के माध्यम राशि स्वीकृत कर हितग्राहियों के खेत में सिचाई करने एवं अन्य सुविधा के लिए बोर खनन व सोलर पम्प स्थापना की उपलब्धता हेतु राशि स्वीकृत किया है, किन्तु कृषि विभाग के अफसर शासकीय नियमों को धत्ता बताकर अनियमितता किया है इस बात का खुलासा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी से हुआ है। कवर्धा जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा आदिवासी कुछ हितग्राहियों के खेत में सिचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार के द्वारा विशेष योजना के माध्यम बैगाओं को लाभ मिल सके इसके लिए राशि स्वीकृत कर हितग्राहियों के खेत में नलकूप बोर खनन कर सोलर पम्प स्थापना कराया गया है। अधिकारियों के मिलीभगत से स्टीमेट के आधार पर सामग्री न लगाकर अपने मनपसंद चहते ठेकेदार से अधिकाधिक कमीशन की राशि अर्जित करने के लिए धन पीपासा अधिकारियों ने शासकीय नियम क्रय भंडारण नियम का उलंघन कर कार्य को अंजाम दिये हैं। शिकायतकर्ता आशीष अग्रवाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दस्तावेज प्राप्त किया है, उसमे सारा चिठ्ठा निकलकर सामने आया है। शिकायत पर जाँच भी हुई है। जाँच अधिकारियों ने अपने प्रतिवेदन रिपोर्ट पर सबंधित अफसरों के माध्यम अनिमियतता किये जाने की बात कही गई है। यहाँ पर यह बताना आवश्यक है कि अधिकारियों के द्वारा स्थानीय पंजीकृत बोर खनन व सामग्रीय उपलब्ध करने के लिए ठेकेदार होने के बाऊजूद 325 किलोमीटर दूर विश्रामपुर जिला सूरजपुर के ठेकेदार से निम्न मानक स्तर के समान प्रयोग में लगाकर् कार्य को अंजाम दिया है। अधिक दूर के ठेकेदार से खनन करना और सामग्री पर्चेस करना मतलब अतिरिक्त भार को स्वीकार करना है। सहायक संचालक उद्यांकीय व अन्य अधिकारी कर्मचारी के माध्यम से कार्य को अंजाम दिया गया है। शिकायतकर्ता प्रधानमंत्री, राज्यपाल, विभागीय मंत्री, स्थानीय विधायक, प्रशासनिक अधिकारियों तथा जिला कलेक्टर तक उचित कार्यवाही हेतु किया है। बिंदुवार शिकायत किया गया। प्राप्त दस्तावेज से लगता है, कि अधिकारियों के मिलीभत से 2019 - 20 में स्वीकृत राशि से कराये गये बोर खनन व सोलर पम्प स्थापना हेतु प्रयोग में लाये गये सामग्री पर क्रय भंडारण नियम का उलंघन हुआ है। दोषी अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ अपराधिक मामला दर्जकर सिविल सेवा अधिनियम के तहत कार्रवाई कर बरखास्त करने की मांग शिकायतकर्ता ने किया है।

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