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दाल भात और सहायिका के भरोसे आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन, बाल अधिकारों का जिम्मेदार कर रहे है हनन।

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कवर्धा - दिया तले अंधेरा कहावत आज तक केवल सुनने में आया था लेकिन उसे चरितार्थ होते देखा जा रहा है। कबीरधाम जिला मुख्यालय में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल बे हाल है। केंद्र संचालन के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की नियुक्ति किया जाता है, और बच्चो के शरारिक विकास के लिए प्रतिदिन अलग अलग मीनू बनाकर भोजन दिया जाता है, लेकिन कबीरधाम जिला मुख्यालय के केंद्रों में केवल दाल भात खिलाकर बच्चो को भोजन के अधिकार से वंचित किया जा रहा है, साथ ही दो केंद्रों के एक ही केंद्र में संचालित किया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्र में दर्ज बच्चो का उपस्थिति भी आधा से कम था। जिला मुख्यालय का ये हाल तो दुरस्त और पहुंच विहीन केंद्रों का संचालन भगवान भरोसे होगा।


मीनू का पालन नहीं 

कवर्धा परियोजना अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 16/02 और 16/3 एक ही जगह पर संचालित है। जहा पर दोनो केंद्र 16/3 में संचालित किया जा रहा है और भोजन के नाम पर केवल दाल भात खिलाया जा रहा था। सब्जी और उपलब्धता के आधार भाजी भी पकाना था लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। देश के होने वाले भविष्य के साथ ऐसा किया जा रहा है जिसकी जिम्मेदार किसे ठहराया जा सकता है जबकि कवर्धा शहर में कार्यक्रम अधिकारी, परियोजना अधिकारी, कलेक्टर सहित सभी जिम्मेदार लोग निवास करते है।

बच्चो की उपस्थिति कम 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दोनो केंद्रों में नही था केवल सहायिका थी। साहयिकाओ ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बैठक में गई है इसलिए हम लोग ही केंद्र का संचालन कर रहे है। सहायिकाओ ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र 16/3 में 24 बच्चो का नाम दर्ज है और16/02 में 22 बच्चे है। केंद्र का संचालन केंद्र क्रमांक 16/3 किया जा रहा था जहा दोनो केंद्र मिलकर लगभग 20 बच्चे ही उपस्थित थे। जो चिंतनीय है। जिला मुख्यालय के केंद्रों में निर्धारित संख्या से बच्चो की उपस्थिति कम है तो दुरस्त के केंद्रों पर उम्मीद करना बेकार है।


जिम्मेदार भाग रहे हैं जिम्मेदारी से

आंगनबाड़ी केन्द्र का संचालन करने के लिए अलग अलग स्तर पर अधिकारी कर्मचारियों की नियुक्ति किया गया है। जो बच्चो के शरारीक, मानसिक, बौद्धिक और नर्सरी की संपूर्ण ज्ञान देने के लिए जिम्मेदार होते है साथ ही अपने अपने पदीय दायित्व के आधार पर निरीक्षण करते है, लेकिन कवर्धा जिला मुख्यालय पर ही अधिकारियो की पदीय दायित्व का निर्वहन का अंत दिखाई दे रहा है। जिम्मेदार केवल कागजी घोड़ा दौड़ाकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन कर पूर्ण कर रहे है।

कोविड के बाद से व्यवस्था में सुधार नहीं 

कोविड़ 19 के समय तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण ने कबीरधाम जिला को कुपोषण मुक्त जिला बनाने के लिए बीड़ा उठाया था, और उसी तर्ज पर केंद्र संचालन कराने में विभाग का मदद करते थे, लेकिन उनके स्थानांतरण होने के बाद से व्यवस्था में सुधार नहीं दिखाई दे रहा है जबकि वर्तमान कलेक्टर जनमेजय मोहबे पूर्व में महिला एवम बाल विकास विभाग के संचालक रह चुके है। कलेक्टर को विभाग का संपूर्ण जानकारी होने के बावजूद केंद्र संचालन में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

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