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राजनांदगाँव सीट भूपेश के समाने संतोष का डगर कठिन, सांसद चुनने में कबीरधाम जिले की भूमिका महत्वपूर्ण।

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8 विधानसभा में 5 कांग्रेस तो 3 भाजपा के पास।

            वरिष्ठ पत्रकार रामकुमार टंडन की रिपोर्ट

कवर्धा - तेज गर्मी से असहनीय ताप चढ़ा हुआ है तो राजनितिक बयान बाजी ने कांग्रेस-भाजपा की राजनितिक पारा को और भी बढ़ा दिया है। इन दिनों लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ी चर्चा हो रही है। छत्तीसागढ़ में राजनांदगांव 6 नम्बर की संसदीय सीट हाई प्रोफ़ाइल सीट बन गया है। यहाँ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेस प्रत्याशी व भाजपा से सिटिंग सांसद संतोष पाण्डेय का आमना समाना हो रहा है। नामांकन की प्रक्रिया जारी है। बड़ी संख्या में लोग नामांकन फार्म खरीद रहे हैं। अबतक लगभग 3 सौ से अधिक फार्म खरीदे जा चुके है। ऐसा इसलिए हो रहा है । इलेक्ट्रैनिक वोटिंग मशीन की विश्वसानियता पर उठ रहे सावल को लेकर अधिकाधिक फार्म खरीदे जा रहे हैं, ताकि बलेट पेपर पर चुनाव कराया जा सके और जनता की विश्वास को कायम  रखा जा सके। खैर इस  मामला पर जो निर्णय लिया जाना है ये तो निर्वाचन आयोग का काम है। वोट तो जनता को डालना है। उन्हें वोटिंग मशीन या फिर बैलेट पेपर से मतदान करना पड़े।

इधर कवर्धा जिले के दो विधानसभा राजनांदगाँव के अंतर्गत आता है, 26 अप्रेल को मतदान होना है। चुनावी समीकरण को देखा जाय तो कांग्रेस पार्टी की स्थिति बेहतर नजर आ रही है। पांच साल पूर्व की स्थिति मोदी लहर थी आज यहां वो परिस्थिति दिखाई नही दे रही है। सिटिंग सांसद के कार्यकाल पर नजर डाली जाय तो कोई विशेष उपलब्धि नजर नही आता है। कार्यशैली शिथिल है। भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोस दिखाई पड़ता है। वैसे भी कांग्रेस के पास खोने के लिए हार के आलावा कुछ नही है पाने के लिये बहुत कुछ दिखता है। कांग्रेस हमेशा से बिखरी हुई दिखाई देती थी। किन्तु भूपेश बघेल के प्रत्याशी बनाने के बाद से सभी एक जुट दिखाई दे रहें हैं। हाल ही में कुछ महीने पहले समपन्न विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बिखरी हुई थी। दोनो विधानसभा से भाजपा में जीत का आन्कड़ा देखा जाय तो बहुत बड़ा है। इसी को देखकर भाजपा ने गलतफहमी पाल रखा है और आशान्वित है। पिछले विधानसभा की तुलना किया जाय तो दोनों विधानसभा कांग्रेस पार्टी ने जिता था इस बार भाजपा के पास है। कांग्रेस पार्टी ने पूर्व प्रत्याशी पिछड़ावर्ग साहू को बनाया था इस बार कुर्मी समाज यानी पिछड़ावर्ग पर फिर से अपना विश्वास जताया है। ये बात अलग है कि वर्तमान कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री हैं। भाजपा प्रत्याशी संतोष पाण्डेय भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नजदिक रहें हैं। खुद राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ से जुड़े हैं। जनता विकास के नाम पर आंकलन कर रही है। गाँवों में जनता के बिच जो चर्चा निकलकर आ रहा है उससे पता चलता है भाजपा इस सीट को फीर से दुबारा दुहारा पाना मुश्किल भरा लगता है। राजनांदगांव संसदीय सीट पर 8 विधानसभा है जिसमें 5 पर कांग्रेस का कब्ज़ा है तो 3 पर भाजपा काबिज है। सीटों पर आंकड़ों के लिहाज से कांग्रेस भारी है तो वोटों के लिहाज से भाजपा भारी दिखाई देता है। किन्तु जातीय समीकरण को आधार मानकर रखा जाय तो अनुसूचित जाति -जनजाति- पिछड़ावर्ग बाहुल्य क्षेत्र है। राजनांदगाँव सीट पर 18 लाख 65 हजार से अधिक मतदाता अपने मतदान का उपयोग से सांसद चुनेंगे किन्तु इनमें से लगभग 8 लाख मतदाता अकेले कबीरधाम जिले के पंडरिया व कवर्धा विधानसभा के हैं जिनकी भूमिका  सांसद चुनाने में महत्वपूर्ण होगी। भूपेश बघेल के जनसम्पर्क के दौरान कमजोर और निचले तपका के लोग ज्यादा दिखाई देते हैं तो वहीं संतोष पाण्डेय के साथ कुछ वर्ग विशेष के लोग अधिक नजर आते हैं। यह भी बता राजनितिक लोग पॉइंट कर रहें हैं और जनता के बीच प्रचार करते हैं। बहरहाल अभी तो मतदान 26 अप्रेल 2024 को होना है। लम्बे इंतजार के बाद परिणाम को आना है पर भूपेश बघेल कांग्रेस प्रत्याशी के सामने संतोष पाण्डेय भाजपा प्रत्याशी का डगर बहुत कठिन लगता है जो आने वाला परिणाम के गर्भ में छुपा है।

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