259 वर्ष प्राचीन आरस के अभिनंदन स्वामी भगवान विराजमान होंगे।
दीक्षा धर्म के महानायक प पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय योगतिलक सुरीश्वर जी महाराजा के मार्गदर्शन से श्री शेठ जोइता हरखा खरतरगच्छ पेढी, राधनपुर, जिला पाटन, गुजरात से विक्रम संवत १८२१ की प्रतिमा श्री शांति कल्याण मूर्तिपूजक श्वेतांबर जैन ट्रस्ट, रायपुर को प्राप्त हुई है, चल मंदिर में इनकी प्रतिष्ठा २९-०६ शनिवार को होगी, इसके साथ ५६० वर्ष प्राचीन शांतिनाथ भगवान की धातु की प्रतिमा भी विराजमान की जाएगी।
पूज्य पंन्यास भगवंत श्रमणतिलक विजय जी की निश्रा में आम्रपाली सोसायटी के पास ३ दिवसीय महोत्सव आयोजित है, आज प्रथम दिवस पूज्य श्री का भव्य प्रवेश हुआ। वासुपूज्य महिला मंडल ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, पूज्य कंचनतिलक विजय जी ने प्रवचन में भगवान के आगमन को लेकर अभिनव सेठ का दृष्टांत बताते हुए भावों के महत्व को बताया। पूज्य पंन्यास जी ने हम सभी की आत्मा भी परमात्मा के जैसी है यह बताते हुए परमात्मा में अपने शुद्ध स्वरूप को देखने का मार्ग बतलाया।
कल का प्रवचन प्रातः ८ः४५ से महोत्सव प्रांगण में होगा, श्री सुरेश जी बागमार तथा श्री अशोक जी सुराना ने बताया कि पूज्य साधू भगवंत जतन चंद जी झांबड के निवास स्थान पर विराजमान हैं।