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टेस्ट रिपोर्ट के नाम चल रहा गोरखधंधा सरपंचों का आरोप, एक काम के 4 से 5 टेस्ट, वसूली में हो रही मोटी कमाई।

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            रामकुमार टण्डन, पंडरिया

पंडरिया -: लोगों में रुपये कमाने की भूख इतनी अधिक बढ़ गई है कि अधिकारी नये-नये नायाब तरीका अपना रहे हैं। पंचायती राज व्यवस्था में गांवों की सरकार कहे जाने वाले पंडरिया क्षेत्र के सरपंच परेशान हैं अधिकारी हैं कि शिकायत को गंभीरता से लेकर सुन रहे हैं, न कार्रवाई कर रहे हैं। जनपद पंचायत पंडरिया अन्तर्गत 144 ग्राम पंचायत आते हैं, निर्माण कार्य पर मूल्यांकन सत्यापन का कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के अधिकारी करते हैं। हर काम के लिए अधिकारियों को बंधा बंधाया कमीशन तो देते ही हैं, किसी ने कमीशन की राशि नही देने की बात कही तो उसका मूल्यांकन सत्यापन इतना कम किया जाता है, कि सरपंच मजबुर हो अधिकारी के मुताबिक ही कमीशन देता है। ऊपर से "दुबर बर दू असाड़" वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए सत्यापन करने वाले अधिकारी के द्वारा टेस्ट रिपोर्ट के नाम पर गोरख धंधा चलाया जा रहा है, कागज़ों पर दौड़ती रिपोर्ट के चलते अधिक परेशान हैं। RES विभाग के एसडीओ के द्वारा शासन के द्वारा निर्धारित टेस्ट रिपोर्ट की राशि से हटकर एक टेस्ट रिपोर्ट पर 3 हजार रूपए लिया जा रहा है, किन्तु सरपंचों को रसीद नहीं दिया जा रहा है, कवर्धा में टेस्ट रिपोर्ट बनाने के लिए कार्यालय खुला हुआ है। टेस्ट रिपोर्ट बनवाने का ठेका SDO RES ने ले रखा है, मजेकी बात ये है कि अधिकारी 3 से 5 लाख के निर्माण कार्य पर एक से दो टेस्ट रिपोर्ट का रुपया लेे रहा है। 10 से 15 लाख के निर्माण कार्य पर 3 टेस्ट रिपोर्ट तथा 16 से 20 लाख के निर्माण कार्य पर 4 से 5 टेस्ट रिपोर्ट की राशि 15 से 20 हजार रूपए लेे रहा है। इसकी शिकायत जिला पंचायत कार्यालय तक की जा चुकी है। पर सरपंचों के शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सरपंचों के शिकायत में ये भी बात लिखा गया है, कि कबीरधाम जिले में ही अन्य विकास खंड में एक निर्माण कार्य पर एक टेस्ट रिपोर्ट मंगाया जा रहा है। कबीरधाम जिला से जुड़े अन्य जिलों में संपर्क किया गया है वहां भी एक टेस्ट रिपोर्ट मंगाए जाने की बात कही गई है । पर पंडरिया जनपद में सरपंचों से अधिकारी दबाव पूर्ण मोटी रकम वसूली कर रहा है। यहां पर तकनीकी कार्य पर प्रश्न ये उठता है और आश्चर्य लगता है, कि अधिकारी इतने सूक्ष्मता से एक टेस्ट रिपोर्ट के स्थान पर 4 से 5 टेस्ट रिपोर्ट सम्मीलित कर रहा है, जिसमें एक भी कार्य अमानक स्तर के नही होता है सभी गुणवत्ता युक्त होते हैं, फिर गुणवत्ताहीन मटेरियल से निर्माण कार्य कराए जाने की शिकायत क्यों होती है, और झूठी शिकायत करने वाले के खिलाफ मामला दर्ज कर भारतीय दंड संहिता के अनुसार कार्रवाई क्यों नहीं किया जाता है, बहरहाल अब देखना ये है कि सरपंचों के द्वारा लगाए गए आरोप में कितना सच्चाई है, जिले के प्रशासनिक उच्च अधिकारी कितना गंभीरता पूर्वक इस मामले को लेकर जांच की कार्रवाई पूर्णकर दोषियों पर भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जावेगी।

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