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लोहारीडीह का मंजर भयावह? कांग्रेस पार्टी की अंतरकलह हुई जगजाहिर।

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संक्षिप्त टिप्पणी - वरिष्ठ पत्रकार रामकुमार टंडन

कवर्धा - प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार जाने के बाद से बड़े जोरों की छटपट्टाहट तो है। कवर्धा लोहारीडीह के मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी ने भाजपा को पूरी तरह घेरने का प्रयास कर रही है, उसमे काफी हद तक सफल भी हुई है। कांग्रेस पार्टी की अंतर्कलह किसी से छिपी भी नही है इसी का परिणाम है कि छत्तीसगढ़ से सत्ता गवानी पड़ी है। लोहारीडीह की घटना ने भाजपा सरकार के नाक में दम कर दिया है। जिले प्रदेश और देश में सुर्खियां बटोरने लगी है। कांग्रेस पार्टी ने मुद्दे को हर स्तर पर भुनाने में जुट गई है। छोटे बड़े नेता सभी परिजनों के पास पहुंचने के साथ ही जेल में बंद आरोपियों से पूछताछ करने पहुंचते हैं।राजनीतिक रूप से किसे कितना नफा नुकसान होता है, वह तो आने वाली नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव का परिणाम बतायेगा। फिलहाल जिले की राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ गरम तवा की तरह जल रहा है।


मंगलवार रात्रि में जो तस्वीर कांग्रेस भाजपा के बड़े नेताओं का गुफ्तगू करते हुए सोसल मीडिया में वायरल हुआ तो तरह तरह की चर्चाएं होनी शुरू हो गई। जिससे उत्साहित कांग्रेसियों में जोश कम दिखा तो भाजपाइयों के खेमे में राहत की सांस लेते दिखाई दिया है। कल दिनभर नगर में मंत्री जी भाजपा सदस्यता अभियान में जुटे देखें गए हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता का जो बयान निकलकर सामने आया है और तस्वीर देखी गई है, वह पार्टी में अंतरकलः को जगजाहिर करने के लिए काफी है। खैर राजनीति का मामला जो भी हो पर लोहारीडीह की घटना असंवेदनशीलता का परिणाम है और मानवता को कमजोर करने वाली बात के साथ ही शर्मसार कर रही है। जिस बरबरता का दृश्य नाबालिक बच्चियों व महिलाओं के साथ देखी गई है तथा चीख पुकार हो रही थी कलेजा कांप उठ जाने के साथ ही मां की ममता के आगे हर किसी की ह्रदय में पीड़ा होना स्वाभाविक है। गांव के लोगों ने जो मंजर अपनी खुली आंखों  से देखी है जीवन भर भुलाया नही जा सकता है। मामले  मीडिया ने खूब सुर्खियां बटोरी है। इस बीच पत्रकारों ने नेता अफसरों से कई अनसुलझे सवाल भी किए हैं। उत्तर मिलना बाकी है? हालांकि माहौल धीरे धीरे शांत होने लगी है। अपनो से बिछड़ने का दर्द सीने में लिए परिजन मिलने वालों से पीड़ा बता रहे हैं।

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