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खरतरगच्छ के युवाओं व महिलाओं का राष्ट्रीय अधिवेशन सूरत में सम्पन्न।

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सूरत - सूरत नगर में पाल क्षेत्र में श्री कुशल कान्ति खरतरगच्छ श्री संघ के तत्वावधान में पूज्य गुरुदेव अवंति तीर्थोद्धारक युगदिवाकर खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा और पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. पू. बहिन म. डॉ विद्युत्प्रभा श्री जी म.सा. आदि ठाणा की सान्निध्यता में अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद् और अखिल भारतीय खरतरगच्छ महिला परिषद् का अष्टम और ज्ञान वाटिका का प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन सूरत शहर में सम्पन्न हुआ। इस अष्टम राष्ट्रीय अधिवेशन में पूरे देशभर से केयुप केएमपी की साठ से अधिक शाखाओं के पदाधिकारियों के साथ केयुप और केएमपी के 1600 से अधिक सदस्यों ने भाग लिया।

अधिवेशन का शुभारंभ गुरुदेव गच्छाधिपति जी को वंदन एवं मंगलाचरण से प्रारम्भ हुआ। पूज्य गुरुदेवश्री ने फरमाया सूरत का यह अधिवेशन केयुप व केएमपी की लगातार हो रही प्रगति का परिचायक है। हमारे युवाओं व महिलाओं में इन संस्थाओं के गठन के बाद अपूर्व जागृति आई है।


उन्होंने कहा- अभी मंजिल दूर है। हमें तेज कदमों से आगे बढना है। उन्होंने लक्ष्य देते हुए कहा- हमें संगठन के क्षेत्र में, गच्छ विकास के क्षेत्र में तथा व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में नई ऊँचाईयाँ प्राप्त करनी है।

तीन दिवसीय अधिवेशन का संचालन युवा मनीषी पूज्य उपाध्याय प्रवर श्री मनितप्रभसागरजी म.सा. ने किया। उन्होंने अपने निराले अन्दाज में करते हुए समस्त युवाओं को जिनशासन एवं गच्छ से जुड़कर इसकी उन्नति में अपना सर्वस्व प्रदान करने का आव्हान किया। पूज्य मुनि श्री मयूखप्रभसागरजी म. ने पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म.सा. के उपकारों का स्मरण करते हुए नारी शक्ति की महिमा बताई। साथ ही एकता की क्षमता का बोध कराया। पूज्य मुनि श्री मृगांकप्रभसागरजी म. ने प्रभु भक्ति, पूजा और इनसे होने वाले लाभ की विवेचना की। पूज्य मुनि श्री मंथनप्रभसागरजी म. ने रात्रिभोजन की विसंगतियों को उजागर करते हुए इसके त्याग की प्रेरणा दी।

बहिन म. डॉ. विद्युत्प्रभा श्रीजी म.सा. ने युवाओं युवतियों को समाज व गच्छ के हर कार्य में आगे आने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा- केयुप व केएमपी का निर्माण गच्छ व शासन का अप्रतिम उपहार है।

पू. साध्वी डॉ. श्री नीलांजनाश्रीजी म. ने कहा- युवाओं व महिलाओं को संगठित होकर समर्पित भावों के साथ आगे आना है।

केयुप के राष्ट्रीय चेयरमैन सुरेश भंसाली, अध्यक्ष सुरेश लुनिया, पाल केयुप अध्यक्ष मनोज देसाई, पर्वत पाटिया केयुप अध्यक्ष संपतराज भंसाली, शीतलवाडी केयुप अध्यक्ष अल्पेश छाजेड तथा केएमपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सौ. श्रीमती सरोज गोलछा, स्थानीय पाल केएमपी की अध्यक्ष सौ. संगीता पारख ने देशभर से पधारे हुए समस्त सदस्यों का हार्दिक स्वागत अभिनन्दन किया और समस्त सदस्यों का तन मन और धन से सेवा प्रदान करने हेतु आभार व्यक्त किया।

महामंत्री रमेश लुंकड़ ने पिछले दो वर्षों में हुए कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया एवं अपने बच्चों एवं समस्त युवाओ को इन संस्थाओं से जोड़ने का आव्हान किया। उपाध्यक्ष प्रदीप श्रीश्रीश्रीमाल ने गुरुदेव के सतत मार्गदर्शन हेतु उपकार जताया। कोषाध्यक्ष ललित डाकलिया ने सदस्यों को धर्म के साथ एक दूसरे को व्यापारिक क्षेत्र में परस्पर सहयोग के साथ व्यवसाय बढ़ाने की बात रखी और कार्यसमिति की बैठक में पिछले दो वर्षों का लेखा जोखा प्रस्तुत किया।

अधिवेशन के संयोजक प्रवीण लुनिया, मनोज देसाई ने सूरत केयुप पाल शाखा ने रात दिन एक करके अधिवेशन को सफल बनाने के लिये भरपूर मेहनत की। समस्त व्यवस्थाएं बखुबी सम्हाली। शाखाओं के कार्यों के मूल्यांकन में बाड़मेर शाखा को देशभर की 103 शाखाओं में प्रथम स्थान, अहमदाबाद और सूरत पाल शाखा को द्वितीय स्थान और शहादा, चैन्नई और भीलवाड़ा शाखा को तृतीय स्थान से पुरस्कृत किया गया।

इस अधिवेशन में श्री जिनदत्त-कुशलसूरि खरतरगच्छ पेढी के अध्यक्ष श्री तेजराजजी गोलेच्छा, श्री प्रकाशचंदजी सुराणा, श्री विजयराजजी डोसी, श्री कुशलराजजी गोलेच्छा आदि विशिष्ट व्यक्तित्व उपस्थित थे।

ज्ञान वाटिका प्रथम अधिवेशन संपन्न सूरत नगर में पूज्य गुरुदेव अवंति तीर्थोद्धारक युगदिवाकर खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा और पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. पू. बहिन म. डॉ विद्युत्प्रभा श्री जी म.सा. आदि ठाणा की सान्निध्यता में अखिल भारतीय ज्ञान वाटिका का प्रथम अधिवेशन संपन्न हुआ। इसमें भाग लेने के लिये भारत भर से 400 से अधिक ज्ञान वाटिका के छात्र-छात्राऐं पहुँची।

ता. 29 सितम्बर को आयोजित इस अधिवेशन का संचालन पूज्य उपाध्याय श्री मनितप्रभसागरजी म. ने किया। ध्वजवंदन के बाद ज्ञान वाटिका संचालन समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष सौ. सरोज कोचर ने ज्ञान वाटिका की प्रगति की पूरी जानकारी दी। लगभग 74 से अधिक स्थानों पर चल रही ज्ञान वाटिकाओं में 6 हजार से अधिक छात्र लाभान्वित हो रहे हैं।

इस अवसर पर पूज्य गणिवर्य श्री मेहुलप्रभसागरजी म. ने कहा- ज्ञान वाटिकाओं में हमारे समाज के भविष्य का निर्माण होता है। जितनी जरूरत जिनमंदिर व दादावाडी की हैं, उतनी ही जरूरत हर क्षेत्र में ज्ञान वाटिका की है। क्योंकि स्कूल में शिक्षा मिलती है। परन्तु संस्कार पाने के लिये तो ज्ञान वाटिका में ही आना होगा।

स्थानीय अलग अलग ज्ञान वाटिकाओं के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। बाद में राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान वाटिका के छात्रों की परीक्षा में जो छात्र प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर रहे, उन छात्रों का रजत-चक्र से बहुमान किया गया। इसके साथ ही उन्हें ऑनरेरी अध्यापन कराने वाले शिक्षकों व शिक्षिकाओं का बहुमान किया गया। ज्ञान वाटिका संचालन समिति के अध्यक्ष माननीय संघवी श्री विजयराजजी डोसी के पुरुषार्थ की सराहना करते हुए उनका बहुमान किया।

इस अवसर पर अखिल भारतीय जैन श्वे. खरतरगच्छ प्रतिनिधि महासभा के अध्यक्ष श्री प्रकाशचंदजी सुराणा, जैसलमेर तीर्थ के अध्यक्ष श्री महेन्द्रजी भंसाली आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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