रायपुर - विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास की चातुर्मासिक प्रवचनमाला में मंगलवार को मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. ने अनुकूलता के राग से बचने का संदेश दिया। मुनिश्री ने कहा कि मन को अनुकूलता की ओर ले जाने वाला राग धीरे-धीरे कुदर्शन ध्यान का पोषण करता है और जीव को धर्म तथा मोक्ष के मार्ग से दूर कर देता है।
मुनिश्री ने कहा कि विकल्पों के साथ जुड़कर मनोकल्पित भावनाओं को लगातार पोषित करते रहेंगे तो कुदर्शन ध्यान मजबूत होगा। कुदर्शन ध्यान में अनुकूलता का राग प्रमुख होता है। यह राग भावनाओं को पोषित करता है और व्यक्ति सुदेव, सुगुरु एवं सुधर्म को छोड़कर गलत दृष्टि की ओर बढ़ने लगता है। इसके परिणामस्वरूप मिथ्यात्व का बंध होता है और जीव जिन शासन से भव-भव की दूरी बना लेता है।
मुनिश्री ने कहा कि अनुकूलता का पोषण व्यक्ति को मर्यादा लांघने के लिए प्रेरित करता है। जब भौतिक सुख की चाह और मन की अनुकूलता का प्रसंग लगातार पोषित होता है तो जीवन असुरक्षित होने लगता है। प्रश्न, तर्क-वितर्क और विकल्पों के माध्यम से मन धीरे-धीरे गलत दिशा में प्रवेश करता है।
अनुकूलता के राग और संस्कार से सावधान रहें।
मुनिश्री ने कहा कि कुसंस्कार उत्पन्न होने के बाद जीव को कुदर्शन की ओर जाने से रोकना कठिन हो जाता है। धर्मसभा में बैठे व्यक्ति के मन में यदि शारीरिक या मानसिक अनुकूलता के भाव बने हुए हैं तो वह भी कुदर्शन ध्यान का भागी बन सकता है। इसलिए अनुकूलता के राग और उसके संस्कार से सावधान रहना जरूरी है।
केवल क्रिया नहीं, ज्ञानपूर्वक क्रिया जरूरी।
मुनिश्री ने कहा कि ज्ञानपूर्वक की गई क्रिया ही मोक्ष का कारण बनती है। केवल क्रिया करते जाने से मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती। यदि अनुकूलता का राग मन में घर कर लेता है तो वह धीरे-धीरे व्यक्ति को धर्म से दूर कर देता है। जब तक यह राग बना रहेगा, तब तक शाश्वत सुख और मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है।
अनुकूलता का राग आगे चलकर भय बन जाता है।
मुनिश्री ने कहा कि अनुकूलता का राग आगे चलकर भय का कारण बन जाता है, जबकि वीतराग का मार्ग व्यक्ति को सन्मति और सन्मार्ग की ओर ले जाता है। अनाचार ध्यान और अज्ञान ध्यान को समझना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन कुदर्शन ध्यान आसानी से पकड़ में नहीं आता। यही कुदर्शन अज्ञान और मिथ्यात्व के कारण जीव को पतन की ओर ले जाता है।
मेहंदी-सांझी का कार्यक्रम 26 अगस्त को
सर्वमंगलमय वर्षावास समिति के संरक्षक श्यामसुंदर बैदमुथा
ने बताया कि श्री गिरनार नेमी तप की तपस्या के निमित्त 26 अगस्त को मुनि भगवंतों की पावन निश्रा में मेंहदी-सांझी का कार्यक्रम होगा। श्री संभवनाथ जिनालय से बैंड-बाजे के साथ मेंहदी लेकर लाभार्थी परिवार के साथ श्रावक-श्राविकाएं उपाश्रय पहुंचेंगी। यहां सभी तपस्वियों को मेहंदी भेंट की जाएगी। महिला मंडल द्वारा भक्ति गीत-संगीत से सांझी का कार्यक्रम होगा। तपस्वियों का तिलक, माला और श्रीफल से सम्मान किया जाएगा। सभी तपस्वियों को तपस्या के यादगार उपहार भेंट किए जाएंगे। गिरनार नेमी तप कर रहे 150 तपस्वी 28 अगस्त को सामूहिक पारणा करेंगे।
25 Aug 2026