रायपुर - महाराष्ट्र् मंडल 90 वर्ष में प्रवेश कर गया। ये यात्रा किसी भी संगठन के लिए असाधारण ही है। स्थापना 8 अक्टूबर वर्ष 1935 में महाराष्ट्र क्लब के नाम से हुई थी। संस्थापक युवा साथियों ने मंडल की स्थापना का उद्देश्य सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और धार्मिक कार्यों के माध्यम से सारे समाज व राष्ट्र की सेवा करना निर्धारित किया था।
विजयादशमी पर स्थापित महाराष्ट्र मंडल के पांचवें स्थापना दिवस कार्यक्रम में पधारे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक गुरुवर बलिराम केशव हेडगेवार जी ने अपने संबोधन में कहा था कि महाराष्ट्र मंडल को सारे समाज के लिए कार्य करना है। सभी को स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए एकजुट होना है। उस समय लगभग 400 लोग स्थापना दिवस कार्यक्रम में उपस्थित थे। खुशी और गर्व की बात यह है कि हेडगेवार जी की बातों और उद्देश्य को अमल में लाते हुए आज भी महाराष्ट्र मंडल सर्व संगठनों के साथ सारे समाजों के लिए अनेकानेक मानवता के सेवाभावी कार्य कर रहा है। महाराष्ट्र मंडल 89 वर्षों के बाद अभी भी सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक सेवाभावी कार्यों के सतत् क्रियान्वयन के लिए संकल्पबद्ध है। माधव सदाशिव गोलवकर जी, उषा मंगेशकर, किशोर कुमार, सुहास खेड़ेकर, जगजीत सिंह, दीना पाठक, रीमा लागू, वसंत साठे, पं. रविशंकर शुक्ल, सुंदरलाल शर्मा, सुधीर मुखर्जी, गजानन माधव मुक्तिबोध, वामनराव लाखे, पं. विष्णु शंकर जोशी, माधव राव सप्रे, सुनील गावस्कर, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, मध्यप्रदेश व छतीसगढ़ के कई मुख्यमंत्री, मंत्रीगण व जनप्रतिनिधियों सहित अनेक बड़ी हस्तियां महाराष्ट्र मंडल के कार्यों और कार्यक्रमों की गवाह हैं।
आज दिव्यांग बालिका विकास गृह में लगभग 40 वर्षों में 180 से अधिक निर्धन परिवारों की दिव्यांग बच्चियां शिक्षित और आत्मनिर्भर होकर अपने घर- परिवार के साथ हैं। इनमें से पांच दिव्यांग बच्चियां ऐसी भी हैं, जिनके विवाह में महाराष्ट्र मंडल ने महत्वपूर्ण भूमिका की निर्वहन करते हुए ससुराल के लिए उनकी विदाई की।
वहीं महाराष्ट्र मंडल की ओर से 40 वर्षों से संचालित कामकाजी महिला वसति गृह व छात्रावास की सुविधा का अब तक पांच हजार से अधिक महिलाओं और लड़कियों ने लाभ लिया है। करीब 42 वर्षों से महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर इंग्लिश मीडियम स्कूल से 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने शिक्षा अर्जित की और सभी अपने- अपने क्षेत्र में कामयाबी के कीर्तिमान गढ़ रहे हैं।
49 वर्ष पूर्व महाराष्ट्र मंडल के सर्व समाज को समर्पित सामाजिक भवन में कई वर्षों से सामूहिक विवाह, युवक- युवती परिचय सम्मेलन, नि:शुल्क सामूहिक मुंज (जनेऊ संस्कार), महाशिवरात्रि पर सामूहिक लघु रुद्र पूजा, पार्थिव शिवलिंग पूजा, मंगला गौरी पूजा जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। धार्मिक कार्यक्रमों के अतिरिक्त यह भवन व्यक्तियों के सर्वांगीण विकास का बड़ा केंद्र है। इसमें वर्षभर नृत्य नाटक, संगीत, व्यक्तित्व विकास, रोजगार के माध्यम से महिलाओं, बच्चों के संस्कार एवं उत्थान के कार्यक्रम वर्षभर चलते रहते हैं। 15 वर्षों से महाराष्ट्र मंडल के शंकरनगर स्थित बाल वाचनालय व गार्डन के माध्यम से समीपस्थ बस्तियों के बच्चों के लिए संस्कार केंद्र चलाए जा रहे हैं। 16 महिला केंद्रों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों को निरंतर संस्कार देने के अलावा परंपराओं के निर्वहन, छुपी प्रतिभाओं को सामने लाने के सतत् प्रयास जारी रहते हैं।सन् 1959 में अस्तित्व में आने से लेकर आज तक सक्रिय महाराष्ट्र नाट्य मंडल से सामाजिक चेतना व मनोरंजन के नाटकों का मंचन होता रहा है।
राजधानी रायपुर में आवश्यकता पड़ने पर मेडिकल बेड, एअर बेड, वॉटर बेड, व्हील चेयर, वॉकर, बैसाखी, अॉक्सीजन कॉस्ट्रेंटर सहित लगभग हर प्रकार के मेडिकल इक्विपमेंट की योजना गत 16 वर्षों से सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। इससे अभी तक निम्न एवं मध्यम आय वर्ग परिवार के सैकड़ों जरूरतमंद मरीज लाभान्वित हो चुके हैं। महाराष्ट्र मंडल ने अपनी इस महत्वपूर्ण मानवतावादी योजना का विस्तार भिलाई, दुर्ग, धमतरी, राजनांदगांव, बिलासपुर और कोरबा में मेडिकल इक्विपमेंट की सहायता करके किया है। इस तरह महाराष्ट्र मंडल रायपुर की मेडिकल इक्विपमेंट योजना अब छत्तीसगढ़ स्तरीय हो चुकी है। इस योजना के साथ ही महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदान करने को आतुर रहते हैं। इसी तरह लगभग हर तीन महीने में स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से रामकुंड, चौबे कॉलोनी, समता कॉलोनी के सैकड़ों लोगों सहित महाराष्ट्र मंडल के लगभग सौ कर्मचारियों को इस शिविर का सीधा लाभ मिलता है। महाराष्ट्र मंडल ने गत वर्ष 26 जनवरी को फिजियोथैरेपी सेंटर शुरू किया है। यहां न्यूनतम फीस पर सभी प्रकार के इक्विपमेंट के साथ मरीजों की फिजियोथैरेपी की जाती है। इसके लिए मंडल ने अनुभवी और पारंगत डॉक्टरों व सहायकों की टीम तैयार की है, जो हर आयु वर्ग के मरीजों के इलाज एवं सहायता के लिए सदैव तैयार रहते हैं।
महाराष्ट्र मंडल की पर्यावरण समिति ने गत 10 वर्षों में 10 हजार से ज्यादा पौधों का रोपण किया है। इनमें से अधिकांश पौधे अब पेड़ के रूप में विकसित हो चुके हैं। महाराष्ट्र मंडल की नीतियों के अनुसार पर्यावरण समिति पौधे रोपने से ज्यादा, उन्हें संरक्षित रखने में अधिक सक्रिय एवं सतर्क रहती है। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति प्रति शनिवार शाम को सभी 16 महिला केंद्रों के माध्यम से समीपस्थ मंदिरों अथवा किसी एक सभासद के घर पर रामरक्षा स्त्रोत और हनुमान चालीसा का पाठ करती है। इसी तरह विष्णु सहस्त्रनाम, गीता जयंती, गुड़ी पाड़वा महोत्सव, पार्थिव शिवलिंग पूजन जैसे आयोजन किए जाते हैं।
महाराष्ट्र मंडल ने अपनी परिवार परामर्श समिति के माध्यम से महाराष्ट्रियन समाज और अन्य अनेक समाजों के टूटते- बिखरते रिश्तों को दोबारा जोड़ने और सहेजने की सफलतम कोशिश की है। इस समिति के प्रयासों का ही परिणाम है कि अनेकानेक परिवार टूटने से बच गए।स्पोर्ट्स, कला- संस्कृति, साहित्य, संस्कार, स्वावलंबन, युवा सहित सभी 15 समितियों के माध्यम से महाराष्ट्र मंडल हर हफ्ते दो- तीन कार्यक्रम आयोजित करता है। इसमें देश के सारे महापुरुषों, स्वाधीनता सेनानियों की जयंती- पुण्यतिथि पर स्मरण दिवस कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। युवा समिति की ओर से छत्रपति शिवाजी महाराज की महाआरती प्रत्येक महीने के 19 तारीख को की जाती है। साथ ही शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों से किशोर व युवा पीढ़ी को अवगत कराया जाता है।
जनजागरण अभियान चलाने के संदर्भ में प्लास्टिक- पॉलीथीन निषेध, निचली बस्तियों, स्कूलों में नशामुक्ति और ट्रैफिक नियमों की जानकारी देने का अभियान महाराष्ट्र मंडल के महिला केंद्र लगातार चलाते रहते हैं। इसके लिए समय- समय पर शहर भर में नुक्कड़ नाटक भी किए जाते हैं। महारानी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती वर्ष के अवसर पर लगातार स्कूलों, मोहल्लों, समाजों, सामाजिक संस्थाओं में जाकर विभिन्न केंद्रों की महिलाएं रानी अहिल्या बाई की जीवनी, उनके व्यक्तित्व, गुणों, विशेषताओं, दृष्टिकोण, नेतृत्व क्षमता, साहस सहित प्रत्येक पहलुओं की मनोरंजक तरीके से तथ्यात्मक जानकारी दे रहीं हैं।
कोरोना संक्रमण काल में महाराष्ट्र मंडल ने मानव सेवा की मिसाल कायम की। बेहद संवेदनशील दौर में, जब एक पुत्र अपने कोरोनाग्रस्त पिता के बिस्तर तो क्या, उनके कमरे में जाना पसंद नहीं करता था, उस समय महाराष्ट्र मंडल ने कोरोना पीड़ित 350 लोगों को सुबह- शाम घर पहुंचा कर भोजन उपलब्ध कराया। इसके अलावा उनके घरों तक फल- दवा, राशन वितरण की बेहतरीन व्यवस्था की गई। इतना ही नहीं, सड़कों पर भटक रहे कोरोना पीड़ितों और उनके परिजनों के लिए महाराष्ट्र मंडल ने कोरोना संक्रमण काल के दूसरे दौर में प्रतिदिन 500 लोगों के लिए सुबह- शाम भोजन की व्यवस्था की। भोजन वितरण में हो रही परेशानियों व अव्यवस्था को देखते हुए कलेक्टर और जिला पंचायत के सीईओ के माध्यम से महाराष्ट्र मंडल ने जन-जन तक नि:शुल्क भोजन पहुंचाने की व्यवस्था की। इसके अलावा बाजार सहित भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासदों ने 20 हजार से अधिक मास्क का वितरण किया। महाराष्ट्र मंडल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रकल्प सेवा भारती के साथ मिलकर गुजराती स्कूल देवेंद्र नगर और सरस्वती शिशु मंदिर रोहिणीपुरम में दो क्वारंटाइन सेंटर शुरू किया। 20- 20 बिस्तरों वाले इस क्वारंटाइन सेंटर में कोरोना पीड़ितों को डॉक्टर के साथ दवा- फल, जूस और भोजन- नाश्ता सहित हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। दोनों ही क्वारंटाइन सेंटर की सबसे बड़ी सफलता यह रही है कि यहां से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई। सभी अपने- अपने घर सकुशल लौटे। कोरोना काल में रोजगार से प्रभावित लोगों के बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी महाराष्ट्र मंडल आज भी पूरी कर रहा है।
महाराष्ट्र मंडल के सौ वेतनभोगी कर्मचारी व 150 से अधिक पदाधिकारी- सेवादार 24×7 जनसेवा के कार्य में लगे हुए हैं। महाराष्ट्र मंडल मेस से होने वाली आय से दिव्यांग बालिकाओं की शिक्षा- दीक्षा, पालन- पोषण, इलाज, स्वावलंबन बनाने की दिशा में प्रोफेशनल कोर्स व कंप्यूटर शिक्षा के लिए कोचिंग जैसे अनेक खर्चों की व्यवस्था की जाती है। इतना ही नहीं, आजीवन सभासदों सहित महाराष्ट्र मंडल से जुड़े लोगों के घरों में दुःखद व सुखद अवसरों पर मेस की सुविधाएं हमेशा उपलब्ध रहतीं हैं। इसमें नाश्ता, भोजन, दिवाली फराल की सुविधाएं शामिल हैं। मंडल के आधुनिक सर्व सुविधायुक्त भवन में हॉल, मिनी हॉल, डायनिंग हॉल, 15 बड़े रूम्स, दो डॉरमेट्री, बड़ी पार्किंग की सुविधा है। मंडल के खुद का दिव्य महाराष्ट्र मंडल न्यूज पोर्टल है, जिसके अब तक 10 लाख वीवर्स हो चुके हैं। इस न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से प्रतिदिन सुबह से सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक गतिविधियों के सकारात्मक व प्रेरणादायक समाचार दिए जाते हैं।
यह मंडल भविष्य में अधिक सामाजिक कार्यो के माध्यम से सारे संगठनों को प्रेरित करता रहेगा, ये तो निश्चित ही है।
जन्म से मृत्य व उसके बाद भी उनके परिवार के लिए महाराष्ट्र मंडल हमेशा एक मददगार के रूप में उपस्थित रहेगा, इसमें कोई शंका नहीं है। 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, फिर क्यों न हो राष्ट्र का विकास' वाली नीति का ही परिणाम है कि पिछले 15 वर्षों से महाराष्ट्र मंडल में चुनाव कराने की स्थिति आई ही नहीं और अध्यक्ष के नेतृत्व में पदाधिकारी अपनी सक्रियता, विश्वसनीय और संवेदनशील टीम के साथ मंडल को सर्वश्रेष्ठ सामाजिक- सांस्कृतिक- शैक्षणिक संस्था बनाने में दिन- रात एक किए हुए हैं।
अजय मधुकर काले - अध्यक्ष, महाराष्ट्र मंडल रायपुर
25 Aug 2026