पंडरिया - वनांचल ग्राम पंचायत कुकदूर में एक 25 वर्षीय एमएससी पास बेटी ने गांव की विकास में अपनी भूमिका अदा करने के लिए गांव की सरकार कहे जाने वाली स्वायत संस्था ग्राम पंचायत चुनाव लड़कर सरपंच बनने के लिए राजनीति में कदम रख रही है। एक तरफ लोग राजनीति को गंदी कहते हैं वहीं दूसरी ओर परिजन अपने पढ़ी लिख बिटिया को राजनीति में लाने का प्रयास किया है। लोकतंत्र में राजनीति का पावर सभी जानते हैं। केवल उसकी ईस्तेमाल कैसे कब कहां करना है उसके ऊपर होता है। पिछले 2 दशक के इंतजार के बाद ग्राम पंचायत कुकदूर आदिवासी महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। उसमें एक पढ़ी लिखी आदिवासी बिटिया ने लोकतंत्र की खूबसूरतिय को पहचानकर अपनी किस्मत आजमाने चली है। उसके साथ जनता क्या फैसला करती है ये तो आने वाला समय ही बताएगा।