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संतोष यादव (भक्कू) भईया की गरीबी उनके मकान से झलकता है, जनता बताएगी जीत का पैमाना।

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कवर्धा नगर पालिका में भाजपा से कांग्रेस की पलड़ा भारी।

कवर्धा - जिले में राजनीतिक वर्चस्व की दृष्टिकोण से जोड़कर देखी जाय तो भाजपा प्रदेश में शिखर स्थान पर रही है अपनी लक्ष्य प्राप्ति की मुकाम को छुआ है किंतु नगरीय निकाय चुनाव में कवर्धा नगर पालिका के लिए हो रहे चुनाव में अंतर्कलह से जूझ रही है। इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। पार्टी जिला अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर जो विरोध संगठन ने देखी है अभी जेहन से निकाला नहीं है। अंतर्कलह से ही राजेंद्र चंद्रवंशी को भाजपा जिला अध्यक्ष बनाया गया है उन्हें ही प्रत्याशी बना दिया गया है। इस बात से नाराज एक वर्ग ने अपना रुख बदला तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नगर में घूम घूमकर स्थिति में परिवर्तन लाने और प्रदेश व केंद्र सरकार की उपलब्धियों को गिनाकर सीधे सरकार के साथ जुड़ने को लेकर विकास में कोई बाधा उत्पन न हो इसलिए समर्थन मांग रहा है भाजपा प्रत्याशियों को जिताने अपील भी शर्मा जी मांग रहे हैं। नेतागण अपनी डफली अपना राग अलाप रहे हैं। भाजपा अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की बात करती है, कांग्रेस प्रत्याशी संतोष यादव (भक्कू) के आर्थिक स्थिति व उनके मकान को देखकर क्षीण हो रही है। गरीबी का सबसे बड़ा पैमाना रोटी कपड़ा मकान को माना गया है। गरीबों का साथ किसके हाथ पर है ये वक्त की बात है, जिसका सीधा लाभ नगर के जनमानस भक्कू को  दे सकती  है। इसका सीधा मतलब निकाला जा सकता है भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र चंद्रवंशी नुकसान में है क्या? जाति समीकरण को ध्यान में रखा जाय तो भाजपा पिछड़ता दिखाई दे रहा है। प्रदेश में दो बड़ी संख्या वाली जाति को आपस में एक दूसरे की प्रतिद्वंदी मानते हैं उनके आपसी टकराहट भी भाजपा को यहां नुकसान पहुंचा सकती है। तीन चार जातियों का समूह संतोष यादव के पक्ष में वोटिंग करता है तो भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकती है। सामान्य वर्ग में भी भक्कू के सीधेपन का लाभ मिल सकता है। इस समय दबाव की राजनीति  कवर्धा में चल रहा है जिससे लोग काफी खपा हैं। ये तो आने वाली 11 फरवरी के मतदान के बाद 15 फरवरी मतगणना को पता चल सकेगा कि राजनीतिक शहमात के खेल में ऊंट किस करवट बैठता है।

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