कवर्धा - जिले के पंडरिया तहसील मुख्यालय से 20 किमी दूर ऐतिहासिक, पुरातात्विक और धार्मिक आस्था का बेहद महत्वपूर्ण केंद्र कामठी स्थित है।
ऐतिहासिक तथ्य :- मकड़ई राज्य के पुलस्त्यगोत्री या राजगोंड वंशी राजा करकटराय के 30वीं पीढ़ी के राजा श्यामचन्द्र जी ने कामठीगढ़ को संवत 1600 (सन1543) में राजधानी बनाया जिसे मुकुटपुर प्रतापपुर(गढ़) कहा जाता था। श्यामचन्द्र जी के 8वें पुस्त के राजा दलशाह ने राजधानी कामठी से पंडरिया स्थानांतरित किया था।
इस वनांचल क्षेत्र में ग्राम कामठी और भेड़ागढ़ दो ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थल हैं। जहाँ कामठी राजधानी थी वहीं 3 किमी दूर भेड़ागढ़ की गुफाएं सैनिक छावनी के रूप में उपयोग में आती थी।
कामठी में विशाल आकार का जलहरीयुक्त शिवलिंग,हनुमान जी तथा नरसिंह (शेर द्वारा हाथी पर आक्रमण), यक्ष-यक्षिणी, प्रस्तरों पर उत्कीर्ण मोहक आकृतियाँ और टीला इस बात का प्रमाण है कि टीले के उत्खनन से अनेकों पुरातात्विक महत्व की मूर्तियाँ,सिक्के हथियार आदि मिलने की पूरी संभावना है। कुछ वर्ष पूर्व तक कामठी मन्दिरो के समीप तालाब में यदा-कदा मूर्तियाँ निकलती रही हैं, कामठी प्राचीन राजधानी होने के कारण जलस्रोत के रूप में तालाबों की अधिक संख्या में मिलने की जनश्रुतियाँ सत्य प्रतीत होती हैं।वर्षों से यहाँ पर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर तीन दिवसीय मेला लगता है।
इस अंचल के सभी वर्ग के लोगों की आस्था का यह कामठी प्रमुख केंद्र है।
पूर्व सरपंच व मन्दिर ट्रस्ट समिति के सचिव श्रवण पटेल ने बताया कि इस क्षेत्र का योजनाबद्ध ढंग से समुचित विकास किया जाए एव मन्दिर प्रांगण में शुद्ध पेय जल व्यवस्था सामूदायिक भवन के साथ ही प्रसाधन की जरूरत है। ग्राम पंचायत कामठी के पंच बृज बघेल ने कहा है कि प्रशासन सिर्फ़ टैक्स लेती है व्यवस्था के नाम पे ढोंग करती हैं।