(वरिष्ठ पत्रकार रामकुमार टंडन)
कवर्धा - जिला सहकारी केंद्रीय बैंक राजनांदगन जिला कवर्धा के विकास खंड शाखा पंडरिया अंतर्गत आदिवासी सेवा सहकारी समितियों में हुई अवैध नियुक्ति की शिकायत पर जांच अधिकारी की रिपोर्ट सही पाई गई है, अवैध नियुक्ति समितियों में प्रमाणित होने के बाद भी उप पंजीयक कार्यालय की असंवेदनशीलता के चलते कोई कार्रवाई नही हो पाई है। किशनगढ़, कुकदुर, कोदवागोडान, सरईसेत सहित अन्य समितियों में 32 लोगों की नियुक्ति अवैध पाई गई है। उपपंजीयक सहकारी संस्था कबीरधाम द्वारा पोर्टल GOVCH/E/2024/0001205 में दिनांक 28/01/2025 को उक्त आवेदन के संबंध में उपपंजीयक सहकारी संस्थाएं जिला - कबीरधाम द्वारा भर्ती निरस्त कर नियमानुसार भर्ती हेतु सहकारी समितियों को पत्र प्रेषित किया गया है का लेख किया गया है। किंतु समितियों द्वारा उपपंजीयक के आदेश/निर्देश का अवहेलना कर अवैध नियुक्ति कर्मचारियों को समिति के कार्य से पृथक नहीं किया गया है।
शिकायतकर्ता ग्राम मोहतरा निवासी खेमचंद यादव ने बताया है कि अवैध नियुक्ति के संबंध में जांच अधिकारी के प्रेषित 11/9/2024 के अपने 17 पेज की विस्तृत प्रतिवेदन के अनुसार समितियो के विरुद्ध उपपंजीयक कार्यालय को कार्यवाही किया जाना था। किन्तु समिति को पत्र जारी कर कार्यवाही के नाम पर "नौ दो ग्यारह हो जाना" वाली मुहावरा को चरितार्थ करने में लगे होने से केवल कागजी खानापूर्ति की गई है। खेमचंद यादव ने कहा कि जिला कलेक्टर कार्यालय से भी कार्रवाई करने का निर्देश किया गया है, पर कार्रवाई करने वाले अधिकारी ने जांच जांच और कार्रवाई करने की बात कहकर अपनी असंवेदनशीलता को उजागर कर रहा है। अब तक अधिकारी मात्र समिति को पत्र जारी कर अपने दायित्व का निर्वहन करने से उपपंजीयक कार्यालय बचने का प्रयास कर रहा है। सहकारी समितियों में अवैध नियुक्ति के संबंध में जांच की कार्रवाई किया जाना उपपंजीयक कार्यालय में लंबित है। परिणाम स्वरूप समिति में कार्यरत अधिकारी कर्मचारियों का हौसला बुलंद है। तभी तो लाखों रुपयों का भ्रष्टाचार करने के बाद भी कार्यरत रहते हैं। धन कमाऊ अधिकारी हैं कि कार्रवाई करने के बजाय मिलीभगत से "नौ दो ग्यारह हो", अपने कार्यरत स्थल से जाने में बेहतरी मानते हैं। सरकारी संपत्ति से अवैध धन अर्जित कर चंपत हो जा रहे हैं और मलमल हैं। शिकायतकर्ता पोर्टल के माध्यम प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। यथा शीघ्र 32 लोगों की अवैध नियुक्ति को निरस्त व समिति के कार्य से पृथक नहीं किया गया तो न्यायालय का शरण लेने की बात कही है।